असम वन विभाग में एमसीसी उल्लंघन के आरोप
मुख्य सचिव व ईसीआई की चुप्पी पर सवाल, तत्काल ट्रांसफर की मांग।

नेशनल प्रेस टाइम्स, ब्यूरो
असम विधानसभा चुनाव 2026 के मतदान (9 अप्रैल) समाप्त होने के बाद भी वन विभाग में मॉडल कोड ऑफ कंडक्ट (एमसीसी) के कथित उल्लंघनों पर असम के मुख्य सचिव और निर्वाचन आयोग (ईसीआई) की कथित उदासीनता ने विवाद को भड़का दिया है। मिडिया में प्रकाशित खबर के बावजूद कोई कार्रवाई न होने से सचेत मंडली ने इसे लोकतांत्रिक प्रक्रिया पर हमला करार दिया है। एमसीसी के तहत संवेदनशील पदों जैसे डीएफओ पर गृह जिले में तैनाती या 3 वर्ष से अधिक एक ही स्थान पर ड्यूटी निषिद्ध है, ताकि राजनीतिक प्रभाव से बचा जा सके। वन विभाग के कई अधिकारियों पर इस नियम का प्रत्यक्ष उल्लंघन करने के आरोप हैं—जैसे अशोक देव चौधरी (AFS): गृह जिला कामरूप मेट्रो में ही कामरूप ईस्ट डीएफओ तैनात—एमसीसी के गृह जिला प्रतिबंध का सीधा उल्लंघन। अश्वनी कुमार (IFS): पिछले 5 वर्ष से गुवाहाटी असम स्टेट जू के डायरेक्टर—3 वर्ष की अनिवार्य सीमा को लांघा। अखिल दत्त (AFS): 4 वर्ष से हैलाकांदी वन डिवीजन डीएफओ के पद पर काबिज। भी. पालवे (IFS): 3+ वर्ष से काचार, सिलचर डिवीजन में ड्यूटी। तेजस मरिस्वामी (IFS): 3+ वर्ष से गोवालपारा वन डिवीजन डीएफओ । सुहास कदम ताराचंद (IFS): ठीक 3 वर्ष से नगांव वन डिवीजन डीएफओ । 15 मार्च से 4 मई तक एमसीसी लागू रहने के बावजूद ये पोस्टिंग बरकरार बताई जा रही हैं। मीडिया खबरों के बाद भी मुख्य सचिव या ईसीआई ने कोई जांच या ट्रांसफर नहीं किया। विशेष पर्यवेक्षक मंजीत सिंह को अपील के बावजूद कोई प्रतिक्रिया न मिलना चिंताजनक माना जा रहा है। ईसीआई के दिशानिर्देश स्पष्ट हैं कि अधिकारियों की ऐसी तैनाती निष्पक्षता भंग कर सकती है, इसलिए इन आरोपों पर सवाल उठना स्वाभाविक है। सचेत मंडली ने ईसीआई से स्वतंत्र जांच, सभी आरोपित डीएफओ के तुरंत ट्रांसफर और पारदर्शी पॉलिसी लागू करने की मांग दोहराई है। यदि ये उल्लंघन सिद्ध हुए, तो असम चुनाव की विश्वसनीयता पर संदेह गहरा हो सकता है। निर्वाचन आयोग को अब सख्त कदम उठाकर निष्पक्षता का संदेश देना चाहिए, वरना भविष्य के चुनाव संकट में पड़ सकते हैं। जिसके कारण सचेत जनता इनपर चिंता जताते हुए तहकीकात, सुधार और इन विषयों पर जवाबदेही चाह रही हैं। किसी किसी का यह भी कहना है कि अगर वनविभाग के इन डीएफओ का तैनाती एमसीसी के दौरान गलत है तुरंत उनके ऊपर कारवाई करते हुए उन्हें तत्काल ट्रांसफर करना चाहिए , अगर उनके तैनाती सही हो तो भी स्थिति स्पष्ट करना चाहिए । अब क्या चुनाव आयोग और मुख्य सचिव इस पर ध्यान देते हुए कड़ी से कड़ी कार्रवाई करेंगे अथवा स्थिति स्पष्ट करेंगे या इसपर फिर अनदेखी करेंगे यह आने वाले वक्त ही बतायेंगे लेकिन असम के लोग चुनाव आयोग के औचित्य का इंतजार कर रहे हैं और बारिकियों से देख रहे हैं।


