संघर्ष से स्वावलंबन तक, सुहागिनी दीदी बनीं प्रेरणा की मिसाल
From struggle to self-reliance, Suhagini Didi becomes an example of inspiration

नेशनल प्रेस टाइम्स ब्यूरो।
पाकुड़। महेशपुर प्रखंड के सीतारामपुर गाँव की रहने वाली सुहागिनी दीदी आज संघर्ष, मेहनत और आत्मविश्वास की एक प्रेरणादायक मिसाल बन चुकी हैं। एक समय रोजगार की तलाश में पलायन के लिए मजबूर रहीं सुहागिनी दीदी अब अपने क्षेत्र के किसानों के लिए सफलता की नई राह दिखा रही हैं। उनकी यह प्रेरणादायक यात्रा वर्ष 2016 में ‘सूरजमुखी आजीविका स्वयं सहायता समूह’ से जुड़ने के साथ शुरू हुई। इसके पश्चात JICA परियोजना के तहत उन्हें आधुनिक खेती की उन्नत तकनीकों का प्रशिक्षण मिला, जिसने उनके जीवन में सकारात्मक परिवर्तन की नींव रखी।
आधुनिक संसाधनों से मिली नई दिशा
परियोजना के माध्यम से उन्हें सूक्ष्म टपक सिंचाई यंत्र (ड्रिप इरिगेशन), वर्मी कंपोस्ट यूनिट तथा पॉली नर्सरी हाउस उपलब्ध कराया गया। इन संसाधनों की मदद से उन्होंने कम लागत में अधिक उत्पादन की दिशा में सफल कदम बढ़ाया।
पहली सफलता: बैंगन की खेती
टपक सिंचाई तकनीक अपनाते हुए सुहागिनी दीदी ने बैंगन की खेती की, जिससे उन्हें लगभग ₹30,000 की आय प्राप्त हुई। यह उनके लिए सफलता की पहली सीढ़ी साबित हुई। रांची (ओरमांझी एवं अनगड़ा) के प्रगतिशील किसानों के भ्रमण ने उनके आत्मविश्वास को और मजबूत किया।
केले की खेती से बड़ी उपलब्धि
इसके बाद उन्होंने तकनीकी विधि से 25 डिसमिल भूमि पर G9 किस्म के केले की खेती की। इस प्रयास से उन्हें कुल 24 क्विंटल उत्पादन प्राप्त हुआ, जिसकी बिक्री मुरारई एवं स्थानीय बाजारों में हुई। औसतन ₹28 प्रति किलोग्राम की दर से उन्हें ₹67,200 की आय हुई, जो उनके आर्थिक सशक्तिकरण की दिशा में महत्वपूर्ण उपलब्धि रही।
अब लक्ष्य बड़े पैमाने पर विस्तार
वर्तमान में सुहागिनी दीदी कृषि एवं उद्यान विभाग के सहयोग से अपनी खेती का विस्तार कर रही हैं। प्रधानमंत्री कृषि सिंचाई योजना के अंतर्गत उन्हें 1 एकड़ भूमि के लिए टपक सिंचाई यंत्र एवं मल्चिंग प्लास्टिक उपलब्ध कराया गया है। आगामी मौसम में वे बड़े पैमाने पर बैंगन की खेती करने की योजना बना रही हैं।
प्रेरणा बनीं सुहागिनी दीदी
आज वे न केवल आत्मनिर्भर बनी हैं, बल्कि अपने क्षेत्र के अन्य किसानों को भी आधुनिक खेती एवं सूक्ष्म टपक सिंचाई तकनीक अपनाने के लिए प्रेरित कर रही हैं। सुहागिनी दीदी ने अपनी सफलता का श्रेय जिला प्रशासन एवं जेएसएलपीएस (झारखंड स्टेट लाइवलीहुड प्रमोशन सोसाइटी) को देते हुए उनके प्रति आभार व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि उनके मार्गदर्शन, प्रशिक्षण एवं सहयोग के बिना यह उपलब्धि संभव नहीं थी।



