बरेली

राजनीति के खिलाड़ियों को चौंकाया डा.पवन सक्सेना ने

देश के बड़े मीडिया हाउस के सर्वे में शहर विधानसभा से सबसे मजबूत दावेदार बनकर उभरे

सोशल मीडिया पर मचने लगा शोर
नेशनल प्रेस टाइम्स ,ब्यूरो
बरेली। डा. पवन सक्सेना – जाने माने पत्रकार हैं। लम्बे वक्त तक मीडिया की दुनिया में  रहे हैं.। स्व व्यावसायी हैं और एक शानदार वक्ता और मिलनसार व्यक्तित्व भी। वह खुद को नॉन पालिटिकल कहते हैं मगर लोग उनको राजनीति की पिच पर लाने के लिए आमादा लग रहे हैं। देश के एक बड़े मीडिया हाउस के उत्तर प्रदेश के विधानसभा के सर्वे में वह एक चौंकाने वाला नाम बनकर उभरे। बरेली शहर विधानसभा की सीट पर रहने वाले डा. पवन सक्सेना को इस सर्वे में मौजूदा विधायक व मंत्री डा. अरुण कुमार के बाद सबसे ज्यादा पसंद किया गया है। सोशल मीडिया पर शोर मचा है। यह माना जा रहा है कि डा.अरुण कुमार के बाद डा. पवन कुमार ही वह चेहरा होंगे जो नेतृत्व की दिशा में आगे बढ़ेंगे।
बरेली शहर की विधानसभा की सीट कायस्थ बहुलता की वजह से जानी जाती है। यहां प्रदेश के स्वास्थ्य मंत्री रहे डा. दिनेश जौहरी ने कायस्थ राजनीति की नींव डाली थी मगर बाद में उनको तत्कालीन मुख्यमंत्री कल्याण सिंह ने विभिन्न आरोपों में मंत्रीमंडल से बर्खास्त कर दिया। फिर डा. जौहरी की राजनीति कभी पटरी पर नहीं लौट सकी। इस बीच लम्बे वक्त तक राजेश अग्रवाल शहर के विधायक रहे। इस बीच वरिष्ठ अधिवक्ता उमेश सक्सेना और डा. अरुण कुमार व उनके भाई अनिल कुमार एडवोकेट ने भी सपा और बसपा से किस्मत आजमाई मगर कामयाबी नहीं मिली। साल 2012 में नए परिसीमन के बाद डा. अरुण कुमार समाजवादी पार्टी से भाजपा में आ गए और उनकी जीत का सिलसिला शुरु हो गया। वर्तमान में वह प्रदेश में वन एवं पर्यावरण राज्यमंत्री स्वतंत्र प्रभार हैं। डा. अरुण कुमार भी अपने मिलनसार व्यक्तित्व के कारण जाने जाते हैं लेकिन 2027 में उम्र की सीमा उनके आड़े आ सकती है, ऐसी चर्चायें चल रही हैं।
भाजपा में अंदरखाने इस बात की भी तलाश चल रही है कि क्या बरेली में डा. अरुण कुमार का कोई विकल्प हो सकता है। हाल ही में हुए मतदाता पुनर्रीक्षण यानी एसआईआर के बाद शहर विधानसभा के गणित में भी बहुत बदलाव हो चुका है। ऐसे में भाजपा के अंदर कोई ऐसा दमदार प्रत्याशी फिलहाल नजर नहीं आ रहा है, जो एसआईआर के बाद की परिस्थिति से मुकाबला कर सके। इसी बीच डा. पवन सक्सेना के नाम ने राजनीतिक रणनीतिकारों को चौंका दिया है। वह 2022 में कैंट विधानसभा से चुनाव की तैयारी में थे, इस बार वह बेहद खामोशी के साथ शहर विधानसभा में काम कर रहे हैं। एक पढ़े लिखे – विजनरी, बेहतर व्यक्तित्व के मालिक और शानदार वक्ता के रूप में उनकी ख्याति है। डा. पवन सक्सेना पत्रकारिता में रहने के कारण अपने उच्च स्तरीय नेटवर्क के लिए जाने जाते हैं मगर बेहद खामोशी के साथ बड़े बड़े मिशन को अंजाम देने के लिए चर्चित हैं। उनको जानने वाले उनको एक ट्रबल शूटर मानते हैं। उनको आप अपनी समस्या बता दीजिए फिर आपका काम खत्म उनका शुरु।
कई बड़े राजनीतिक मिशन को अंजाम दे चुके डा. पवन सक्सेना का सर्वे में लोगों की पसंद बनना चौंका रहा है। सर्वे में पहला सवाल पूछा गया है कि क्या आपके विधायक डा. अरुण कुमार को 2027 में टिकट मिलना चाहिए। केवल 23 प्रतिशत जनता ने हां कहा है और 48 परसेंट ने ना। 52 प्रतिशत ने भाजपाऔर 47 प्रतिशत ने सपा को पहली पसंद बताया है। यहां सपा का मतलब सपा कांग्रेस गठबंधन  से है। केवल एक प्रतिशत शहरी जनता ही बसपा के साथ गई है। तीसरा सवाल है भाजपा से कौन सा उम्मीदवार पसंद है। ऐसे में 44 प्रतिशत लोगों ने मौजूदा विधायक डा. अरुण कुमार को ही पसंद माना है। डा. पवन सक्सेना को पसंद करने वालों की तादाद 35 प्रतिशत, सभासद सतीश कातिब को पांच प्रतिशत व राहुल जौहरी को पांच प्रतिशत लोगों ने ही पसंद किया है। यह माना जा रहा है कि जिस मीडिया हाउस की ओर से यह प्रदेश व्यापी सर्वे किया गया है, यह दिल्ली के शीर्ष नेतृत्व तक भी जायेगा। ऊपरी तौर पर तो यह माना जा रहा है कि अभी डा. अरुण कुमार के टिकट पर कोई संकट नहीं है। 79 का होने के बाद भी उनका टिकिट रिपीट होने के चांस पूरे हैं लेकिन अगर कोई बदलाव होता है तब डा. पवन कुमार सभी वर्गों में अपने बड़े संपर्क और नेटवर्क की बदौलत एक बड़े दावेदार बनकर उभर सकेंगे। स्थिति आने वाले दिनों में स्पष्ट हो सकेगी।
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