
नई दिल्ली । यूएई के फुजैरा पोर्ट पर हुए हमले में तीन भारतीयों के घायल होने के बाद पीएम मोदी ने कड़ी निंदा की है। जानिए खाड़ी क्षेत्र में बढ़ते तनाव, होर्मुज जलडमरूमध्य विवाद और वैश्विक ऊर्जा सुरक्षा पर इसका क्या असर होगा।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने मंगलवार को संयुक्त अरब अमीरात (यूएई) के बंदरगाह शहर फुजैरा पर हुए हमलों की कड़ी निंदा की है। एक प्रमुख तेल उद्योग क्षेत्र में हुए इन हमलों में तीन भारतीय नागरिक भी घायल हुए हैं। इस ताजा भू-राजनीतिक तनाव ने न केवल खाड़ी क्षेत्र की सुरक्षा को खतरे में डाल दिया है, बल्कि वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति और कच्चे तेल की कीमतों को लेकर चिंताएं भी बढ़ा दी हैं।
यूएई के साथ भारत की मजबूत एकजुटता-हमले की निंदा करते हुए पीएम मोदी ने स्पष्ट किया कि भारत इस मुश्किल समय में यूएई के साथ मजबूती से खड़ा है। उन्होंने सोशल मीडिया पर अपनी प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि नागरिकों और बुनियादी ढांचे को निशाना बनाना पूरी तरह से अस्वीकार्य है।
पीएम मोदी ने अपने संदेश में लिखा, “संयुक्त अरब अमीरात पर हुए हमलों की हम कड़ी निंदा करते हैं, जिनमें तीन भारतीय नागरिक घायल हुए हैं। नागरिकों और बुनियादी ढांचे को निशाना बनाना अस्वीकार्य है। भारत संयुक्त अरब अमीरात के साथ पूरी तरह एकजुट है और संवाद एवं कूटनीति के माध्यम से सभी मुद्दों के शांतिपूर्ण समाधान के लिए अपना समर्थन दोहराता है। होर्मुज जलडमरूमध्य से सुरक्षित और निर्बाध आवागमन सुनिश्चित करना क्षेत्रीय शांति, स्थिरता और वैश्विक ऊर्जा सुरक्षा के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है।
भारतीय विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने भी इस कृत्य को अस्वीकार्य बताते हुए शत्रुता को तुरंत रोकने का आह्वान किया। यूएई ने इस हमले का सीधा आरोप ईरान पर लगाया है। भारत ने इस स्थिति से निपटने और पश्चिम एशिया में शांति व स्थिरता बहाल करने के लिए बातचीत और कूटनीति का पुरजोर समर्थन किया है।
होर्मुज जलडमरूमध्य विवाद और ऊर्जा संकट-यह हमला ऐसे नाजुक समय में हुआ है जब होर्मुज जलडमरूमध्य में अमेरिका और ईरान के बीच संघर्ष विराम भारी दबाव में है। अमेरिका जहां इस मार्ग पर ईरान की नाकेबंदी को तोड़ने की कोशिश कर रहा है, वहीं ईरान अपने बंदरगाहों पर अमेरिकी सेना के प्रतिबंधों का कड़ा विरोध कर रहा है। होर्मुज जलडमरूमध्य वैश्विक व्यापार के लिए एक जीवन रेखा है, क्योंकि दुनिया का लगभग पांचवां (20%) तेल और गैस इसी मार्ग से गुजरता है। खाड़ी के इस संकरे जलमार्ग में संघर्ष के कारण शिपिंग बुरी तरह बाधित हुई है, जिससे तेल की कीमतों में तेज वृद्धि हुई है और कई देशों में ऊर्जा की कमी पैदा हो गई है।
यूएई की जवाबी कार्रवाई और कूटनीतिक हलचल
इस तनाव के बीच यूएई के रक्षा मंत्रालय ने सोमवार को जानकारी दी कि उनकी वायु रक्षा प्रणालियों ने ईरान की ओर से दागी गई 12 बैलिस्टिक मिसाइलों, तीन क्रूज मिसाइलों और चार ड्रोनों का सफलतापूर्वक सामना किया। यूएई के विदेश मंत्रालय ने इन हमलों को ‘खतरनाक वृद्धि’ बताते हुए इसे देश की सुरक्षा और क्षेत्रीय स्थिरता के लिए सीधा खतरा करार दिया है और स्पष्ट किया है कि वे किसी भी खतरे से निपटने के लिए पूरी तरह तैयार हैं। दूसरी तरफ, कूटनीतिक मोर्चे पर भी हलचल तेज है; ईरानी मीडिया के अनुसार, ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची विभिन्न देशों के साथ अपने चल रहे कूटनीतिक विचार-विमर्श के तहत मंगलवार को बीजिंग (चीन) का दौरा करेंगे।
निष्कर्ष-फुजैरा पोर्ट पर हुआ यह हमला क्षेत्रीय शांति के साथ-साथ वैश्विक ऊर्जा बाजारों के लिए एक बड़ा झटका है। पीएम मोदी और विदेश मंत्रालय ने स्पष्ट रूप से कहा है कि अंतरराष्ट्रीय कानून के तहत होर्मुज जलडमरूमध्य से सुरक्षित और निर्बाध नेविगेशन सुनिश्चित करना न केवल क्षेत्रीय शांति बल्कि वैश्विक ऊर्जा सुरक्षा के लिए भी बेहद महत्वपूर्ण है। भारत इस विवाद को सुलझाने के लिए सभी शांतिपूर्ण कूटनीतिक प्रयासों का समर्थन करने के लिए तैयार है।



