असम

इलाज के लिए आए मरीज के साथ बुरा सलूक

असम के AIIMS गुवाहाटी में भड़के परिवार, सरकार एवं प्रशासन से जांच की मांग। 

 नेशनल प्रेस टाइम्स, ब्यूरो 

असम में स्थित AIIMS गुवाहाटी में बिस्तर व समुचित इलाज़ न मिलने के आरोप में कामरूप जिले के एक परिवार ने अस्पताल की लापरवाही और डॉक्टरों के अभद्र व्यवहार की निंदा की है। पीड़ित परिवार से पारूल नामक एक लड़की का कहना है कि उनके भाई की बेडसोर (decubitus ulcer) गंभीर स्थिति में थी, मगर अस्पताल के कर्मचारियों ने उन्हें पर्याप्त इलाज़ और बेड देने से मना कर दिया, जिससे रोगी की स्थिति और बिगड़ गई। परिवार के अनुसार, पहले वे OPD के जरिए डॉक्टर से मिले, जहां उन्हें अपमानजनक भाषा और सवालों का सामना करना पड़ा। डॉक्टरों ने कहा कि बेड्स उपलब्ध नहीं हैं और इलाज के लिए घर पर ड्रेसिंग करने को कहा गया। परिवार ने बताया कि उन्हें कई बार आग्रह के बावजूद भी एम्स की किसी डाक्टर से मदद नहीं मिल सकी। घर पर ड्रेसिंग करने के बाद भी घाव नहीं ठीक हुआ और संक्रमण बढ़ गया, जिस पर डॉक्टरों ने ऑपरेशन की सलाह दी। आर्थिक तंगी के कारण परिवार प्राइवेट इलाज वहन नहीं कर सका और अंततः रोगी को किसी और अस्पताल में भर्ती कराने की नौबत आ गया । घटना के बाद परिवार ने एम्स अस्पताल प्रशासन और राज्य सरकार से इस मामले की निष्पक्ष जांच और दोषी डॉक्टरों व स्टाफ पर अनुशासनात्मक कार्रवाई की मांग की है। उन्होंने कहा कि AIIMS जैसी सरकारी संस्थान का उद्देश्य ही मरीजों को मुफ्त व गुणवत्तापूर्ण इलाज उपलब्ध कराना है, लेकिन उनके साथ हुई बेइज़्ज़ती और उपेक्षा असहनीय है। परिवार का यह भी आरोप है कि अस्पताल कर्मचारियों ने repeatedly कहा कि बिस्तर व संसाधन उपलब्ध नहीं हैं, जबकि यह सुविधा सरकारी अस्पताल होने के नाते मरीजों के लिए होनी चाहिए थी। डॉक्टरी सलाह के अनुसार घाव में संक्रमण की स्थिति गंभीर होने पर शल्यचिकित्सा (सर्जरी) आवश्यक हो सकती है, और इसे टाला जाना मरीज के स्वास्थ्य के लिए जोखिमपूर्ण हो सकता है। परिवार का कहना है कि समय पर उचित उपचार न मिलने से रोगी को तेज बुखार और संक्रमण के लक्षण दिखे, जिससे चिंता बढ़ गई। AIIMS गुवाहाटी के किसी आधिकारिक प्रवक्ता से तुरंत प्रतिक्रया उपलब्ध नहीं हुई है । अस्पताल प्रशासन से आह्वान है कि वह सार्वजनिक रिपोर्ट जारी कर मामले की जांच कराए, और आवश्यकतानुसार संबंधित कर्मचारियों के व्यवहार तथा बेड व इलाज़ की उपलब्धता की रिपोर्ट स्पष्ट करे। साथ ही पीड़ित परिवार ने असम सरकार से भी हस्तक्षेप की मांग की है ताकि ऐसे मामलों को दोबारा रोका जा सके और मरीजों को सम्मानजनक उपचार सुनिश्चित हो सके। परिवार ने घटना का विस्तृत विवरण सोशल मीडिया के जरिए साझा कर व्यापक जागरूकता भी फैलाई है और प्रदेश सरकार से कार्रवाई की अपील की है। अस्पतालों में मरीजों के अधिकारों और सुलभ, सम्मानजनक इलाज़ की व्यवस्था पर यह मामला सवाल खड़ा करता है। अब प्रशासन ओर सरकार इसपर क्या कारवाई करते हैं, लोगों की नजर उसपर टीके हुए हैं।

Show More

Related Articles

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Back to top button