गाजियाबाद
लोनी नगरपालिका परिषद की बोर्ड बैठक में सभासदों का जमकर हंगामा
भ्रष्टाचार और मनमानी के आरोपों के बीच दूसरी बार भी बैठक स्थगित

नेशनल प्रेस टाइम्स, ब्यूरो।
लोनी गाजियाबाद : लोनी नगरपालिका परिषद की बोर्ड बैठक एक बार फिर भारी हंगामे की भेंट चढ़ गई। सभासदों ने चेयरमैन और अधिशासी अधिकारी के के मिश्रा पर तानाशाही पूर्वक रवैया अपनाने, सदन की अनदेखी करने तथा विकास कार्यों में मनमानी और भ्रष्टाचार के गंभीर आरोप लगाए। बैठक के दौरान सभासदों द्वारा तीखे विरोध और नारेबाजी के बीच चेयरमैन के बैठक को बीच में छोड़कर चले जाने के बाद दूसरी बार भी बोर्ड बैठक बिना किसी ठोस निर्णय के समाप्त हो गई।
करीब दस महीने बाद बुलाई गई इस बोर्ड बैठक में जनहित से जुड़े कई महत्वपूर्ण मुद्दों को सभासदों ने जोरशोर से उठाया। बैठक शुरू होते ही सभासदों ने सफाई व्यवस्था को लेकर सवाल खड़े किए और आरोप लगाया कि सफाई कंपनी को सदन की अनुमति के बिना ही पांच वर्षों का टेंडर दे दिया गया। सभासदों का कहना था कि करोड़ों रुपये के कार्य बिना पारदर्शिता और बिना बोर्ड की स्वीकृति के कराए जा रहे हैं, जो नियमों के विपरीत है।
इसके अलावा बिना नियमित जलापूर्ति के नागरिकों से जलकर वसूले जाने का मुद्दा भी गरमाया रहा। सभासदों ने कहा कि जब लोगों को पर्याप्त पानी की सप्लाई नहीं मिल रही तो उनसे जलकर लेना जनता के साथ अन्याय है। इस मुद्दे पर कई सभासदों ने प्रशासनिक अधिकारियों को घेरा और जवाब मांगा।
बैठक में विकास कार्यों की धीमी गति और निर्माण कार्यों की गुणवत्ता पर भी गंभीर सवाल उठाए गए। सभासदों का आरोप था कि कई वार्डों में निर्माण कार्य समय पर पूरे नहीं हो रहे हैं और जहां कार्य कराए भी जा रहे हैं वहां गुणवत्ता मानकों की अनदेखी की जा रही है। वार्ड संख्या-1 के सभासद आदर्श कुमार ने अपने वार्ड की लगातार उपेक्षा किए जाने का आरोप लगाते हुए कहा कि विकास कार्यों में उनके साथ भेदभाव किया जा रहा है और उनके वार्ड को जानबूझकर नजरअंदाज किया जा रहा है। इससे आक्रोशित होकर उन्होंने बोर्ड बैठक में ही अपने ऊपर तेल छिड़ककर आत्म हत्या करने की धमकी तक दे डाली।
सभासदों ने सदन की अनुमति के बिना लैंप लाइट लगवाने को लेकर भी भ्रष्टाचार के आरोप लगाए। उनका कहना था कि बिना बोर्ड बैठक में प्रस्ताव पास कराए कार्य कराना नियमों का उल्लंघन है और इसमें वित्तीय अनियमितताओं की आशंका को बल मिलता है। नगर पालिका कर्मचारियों को समय पर वेतन न मिलने का मुद्दा भी बैठक में प्रमुखता से उठा। सभासदों ने कहा कि नगरपालिका कर्मचारियों को महीनों से समय पर वेतन नहीं मिल रहा, जिससे उनके सामने आर्थिक संकट खड़ा हो गया है।
हंगामे के दौरान सभासदों ने चेयरमैन और अधिशासी अधिकारी के.के. मिश्रा पर मनमाने तरीके से विकास कार्य कराने और निर्वाचित जनप्रतिनिधियों की लगातार अनदेखी करने का आरोप लगाया। सभासदों का कहना था कि बोर्ड बैठक केवल औपचारिकता बनकर रह गई है जबकि निर्णय पहले से तय कर लिए जाते हैं। सूत्रों के अनुसार सफाई कार्यों में सरकारी धन की कथित बंदरबांट और वित्तीय अनियमितताओं को लेकर भी बैठक में तीखी बहस हुई।
स्थिति उस समय और तनावपूर्ण हो गई जब विरोध और नारेबाजी के बीच चेयरमैन बैठक छोड़कर चली गई। इसके बाद सभासदों का आक्रोश और बढ़ गया तथा भारी हंगामे के बीच बैठक दूसरी बार भी बिना निष्कर्ष के समाप्त करनी पड़ी।
नगरपालिका परिषद की इस बैठक में हुए हंगामे ने परिषद के भीतर चल रहे विवाद, प्रशासनिक कार्यप्रणाली और विकास कार्यों की पारदर्शिता पर कई गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।



