बेतुल
बैतूल सत्ता अपनी, मंत्री अपने, फिर धरना क्यों? एबीवीपी की प्रदर्शन राजनीति पर एनएसयूआई का हमला
एनएसयूआई ने घेरा- 20 साल की सरकार, फिर भी पीजी के लिए प्रदर्शन की नौटंकी!

एबीवीपी का आंदोलन नहीं, भाजपा सरकार की नाकामियों का चार्जशीट: जैद खान
एबीवीपी की मांगों ने खोली सरकार की पोल: जैद खान
नेशनल प्रेस टाइम्स, ब्यूरो
बैतूल। बैतूल में पीजी कोर्स शुरू करने, छात्रावासों की सीटें बढ़ाने और शिक्षा व्यवस्था में सुधार की मांग को लेकर एबीवीपी द्वारा किए गए प्रदर्शन के बाद राजनीतिक बयानबाजी तेज हो गई है। एनएसयूआई के जिला अध्यक्ष जैद खान ने एबीवीपी के आंदोलन को प्रदर्शन की नौटंकी करार देते हुए कहा है कि जब केंद्र से लेकर प्रदेश तक भाजपा की सरकार है और सत्ता के हर महत्वपूर्ण पद पर भाजपा का कब्जा है, तब अपनी ही सरकार के खिलाफ धरना देना यह साबित करता है कि वर्षों के शासन के बावजूद छात्र समस्याओं का समाधान नहीं हो सका।
एनएसयूआई जिला अध्यक्ष जैद खान ने कहा कि एबीवीपी द्वारा कलेक्टर कार्यालय के बाहर किया गया धरना किसी उपलब्धि का नहीं भाजपा सरकार की असफलताओं का प्रमाण है। उन्होंने कहा कि जिन लोगों की विचारधारा की सरकार प्रदेश और देश में सत्ता चला रही है, उन्हें यदि अपनी मांगों के लिए सड़कों पर उतरना पड़े तो यह सरकार की कार्यशैली पर सबसे बड़ा प्रश्नचिह्न है। उन्होंने तंज कसते हुए कहा कि यह आंदोलन कम और प्रदर्शन की नौटंकी ज्यादा दिखाई देता है।
जैद खान ने कहा कि मध्यप्रदेश में लगभग 20 वर्षों से भाजपा का शासन है। इसके बावजूद यदि जिले के महाविद्यालयों में पीजी कोर्स शुरू नहीं हो पाए, विद्यार्थियों को उच्च शिक्षा के लिए दूसरे जिलों में जाना पड़ रहा है और छात्रावासों की सुविधाएं पर्याप्त नहीं हैं, तो आखिर इसकी जिम्मेदारी किसकी है। उन्होंने कहा कि एबीवीपी की मांगें स्वयं यह स्वीकार कर रही हैं कि सरकार शिक्षा के क्षेत्र में अपेक्षित काम नहीं कर पाई है।
– एक मंत्री से कहते तो काम हो जाता
एनएसयूआई जिला अध्यक्ष ने कटाक्ष करते हुए कहा कि यदि एबीवीपी नेताओं की सरकार में इतनी मजबूत पकड़ है तो उन्हें कलेक्टर कार्यालय के बाहर धरना देने की बजाय किसी मंत्री, सांसद या विधायक के कार्यालय में जाकर बात करनी चाहिए थी। उन्होंने कहा कि पीजी कोर्स जैसी मांग कोई असंभव विषय नहीं है। सरकार चाहती तो वर्षों पहले यह व्यवस्था शुरू हो सकती थी। लेकिन जब समाधान की जगह प्रदर्शन को चुना जाए तो सवाल खड़े होना स्वाभाविक है।
– मांगों ने खोली शिक्षा व्यवस्था की हकीकत
जैद खान ने कहा कि एबीवीपी ने अपने ज्ञापन में जिन मुद्दों को उठाया है, वही प्रदेश की शिक्षा व्यवस्था की वास्तविक तस्वीर पेश करते हैं। शिक्षकों की कमी, नए छात्रावास भवनों की आवश्यकता, छात्रावास सीटों में वृद्धि, नई शिक्षा नीति का प्रभावी क्रियान्वयन और पीजी कोर्स की मांग यह बताती है कि बुनियादी समस्याएं अब भी जस की तस बनी हुई हैं। उन्होंने कहा कि यह सभी विषय सीधे सरकार के अधिकार क्षेत्र में आते हैं और वर्षों बाद भी इनका समाधान नहीं होना चिंता का विषय है।
– छात्र हित या राजनीतिक मंचन?
जैद खान ने कहा कि छात्र हितों की लड़ाई बैनर, पोस्टर और धरनों से नहीं लड़ी जाती, समस्याओं का समाधान करवाने से लड़ी जाती है। उन्होंने आरोप लगाया कि एबीवीपी ने छात्रों की वास्तविक समस्याओं को भी राजनीतिक मंचन का माध्यम बना दिया है। यदि छात्र हितों के प्रति गंभीरता होती तो इन मांगों को सत्ता के गलियारों तक प्रभावी ढंग से पहुंचाया जाता, न कि केवल प्रदर्शन कर सुर्खियां बटोरी जातीं।
– प्रदेश के विद्यार्थियों को जवाब चाहिए
एनएसयूआई जिला अध्यक्ष ने कहा कि आज प्रदेश का विद्यार्थी यह जानना चाहता है कि दो दशक के लंबे शासन के बाद भी उच्च शिक्षा की मूलभूत सुविधाओं के लिए आंदोलन क्यों करना पड़ रहा है। उन्होंने कहा कि बैतूल में हुआ यह प्रदर्शन अनजाने में ही भाजपा सरकार की शिक्षा व्यवस्था पर अविश्वास का प्रमाण बन गया है। अब सरकार को यह बताना चाहिए कि जब उसके अपने समर्थक छात्र संगठन को भी सड़क पर उतरना पड़ रहा है तो आखिर शिक्षा व्यवस्था में सुधार के दावे कितने जमीन पर दिखाई दे रहे हैं।



