असम

असम के कामरूप जिले में मानव-हाथी संघर्ष पर विशेष मुख्य सचिव की समीक्षा बैठक। 

नेशनल प्रेस टाइम्स, ब्यूरो  

असम के कामरूप जिले के पलाशबाड़ी और बको-छयगांव समेत सह-जिला क्षेत्रों में बढ़ते मानव-हाथी संघर्ष की घटनाओं पर सोमवार को कामरूप जिले के अमिनगांव स्थित संयुक्त जिला आयुक्त कार्यालय के सभाकक्ष में एक महत्वपूर्ण बैठक आयोजित की गई। इस बैठक की अध्यक्षता असम सरकार के पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन विभाग के विशेष मुख्य सचिव एम.के. यादव ने की। बैठक में पलाशबाड़ी के विधायक हिमांशु शेखर बैश्य भी उपस्थित रहे।बैठक में सम-जिला प्रशासन, वन विभाग और सुरक्षा तथा स्थानीय प्रतिनिधियों सहित कई वरिष्ठ अधिकारियों ने हिस्सा लिया। उपस्थित प्रमुख अधिकारियों में निचले असम सामाजिक वनानिकी वृत के प्रभारी वन संरक्षक सनीदेउ इंद्रदेउ चौधुरी, कामरूप जिला आयुक्त देव कुमार मिश्रा, अतिरिक्त जिला आयुक्त प्रांजित कुमार देव, पलाशबाड़ी सम-जिला आयुक्त भास्कर ज्योति कलिता, बको-छयगांव सम-जिला आयुक्त प्रियांशु भारद्वाज और अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक पुनम पेगु शामिल थे। साथ ही संबंधित वृतों के अधिकारी-कर्मचारी और विभिन्न विभागों के प्रतिनिधि भी बैठक में मौजूद रहे। बैठक में उन क्षेत्रों की वर्तमान स्थिति का सम्यक् आकलन किया गया जहाँ हाथियों के आने-जाने से फसलों के नुकसान, संपत्ति क्षति और मानव जीवन पर प्रतिकूल प्रभाव दर्ज हुए हैं। उपस्थित अधिकारियों ने इस समस्या के तेज़ी से बढ़ते प्रभाव को देखते हुए तत्काल तथा दीर्घकालिक दोनों तरह के उपायों पर विस्तृत चर्चा की। चर्चा के मुख्य बिंदु निम्नलिखित रहे:चेतावनी और अलर्ट व्यवस्था को सुदृढ़ करना ताकि गांवों को समय पर सूचित किया जा सके। 1. वन विभाग, जिला प्रशासन और स्थानीय समुदायों के बीच समन्वय बढ़ाना। 2. जनता में जागरूकता फैलाने हेतु कार्यक्रम और प्रशिक्षण सत्र आयोजित करना। 3. हाथियों की गतिशीलता पर नजर रखने के लिए प्रौद्योगिकी-आधारित उपायों (जैसे जीपीएस ट्रैकिंग/मानिटरिंग) अपनाने पर बल। 4. संवेदनशील क्षेत्रों में सोलर-फेंसिंग (सौर स्नान द्वारा चलने वाली बाड़) लगाने और पर्यवेक्षण टावर (वॉच टावर) निर्माण की योजना। 5. मानव-हाथी संघर्ष से प्रभावित लोगों को तत्काल मुआवजा और आपातकालीन सहायता प्रणाली को अधिक प्रभावी बनाने के उपाय। जिला आयुक्त देव कुमार मिश्रा ने स्वागत भाषण में कहा कि प्रशासन का प्राथमिक लक्ष्य मानव-हाथी संघर्ष में होने वाली जनहानि व संपत्ति क्षति को यथासंभव घटाना है। उन्होंने बताया कि संघर्ष-प्रवण क्षेत्रों में हाथी के आवागमन पर नियंत्रण और निगरानी लागू करने के लिए सोलर फेंसिंग एवं वॉच टावर जैसी संरचनात्मक योजनाओं को लागू करने की रूपरेखा बनाई जा रही है। विशेष मुख्य सचिव एम.के. यादव ने कहा कि इस समस्य का स्थायी समाधान केवल वन संरक्षा और मानव सुरक्षा के बीच संतुलित, समन्वित और दीर्घकालिक नीति से ही संभव है। उन्होंने जंगल के संरक्षण व प्राकृतिक आवास की सुरक्षा के महत्व के साथ-साथ स्थानीय निवासियों की सुरक्षा सुनिश्चित करने पर भी समान रूप से जोर दिया।बैठक में उपस्थित सभी पक्षों ने मानव और हाथियों के बीच शांतिपूर्ण सह-अस्तित्व सुनिश्चित करने के उद्देश्य से अधिक जनसहभागिता, वैज्ञानिक-आधारित प्रबंधन और अंतर-विभागीय सहयोग की आवश्यकता पर सहमति व्यक्त की। अधिकारियों ने कहा कि शीघ्र ही इन सिफारिशों के क्रियान्वयन के लिए चरणबद्ध कार्ययोजना जारी की जाएगी ताकि प्रभावित क्षेत्रों में होने वाली घटनाओं को कम किया जा सके और दोनों — मानव तथा वन्यजीवों — की सुरक्षा सुनिश्चित की जा सके।

Show More

Related Articles

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Back to top button