बालाघाट

 भू-माफिया अवैध प्लाटिंग करके निगल गये शासकीय तालाब

ग्रामीणों के विरोध के बाद नींद से जागा प्रशासन,एस डी एम ने दिये जांच के आदेश

नेशनल प्रेस टाइम्स, ब्यूरो
बालाघाट(म0प्र0) : जिले में भू-माफियाओं की कथित मनमानी का एक और गंभीर मामला सामने आया है।वारासिवनी क्षेत्र के डोंगरिया गांव में स्थित लगभग 100 वर्ष पूराने शासकीय तालाब की भूमि पर अवैध कब्जा कर प्लाटिंग किए जाने का आरोप लगने के बाद ग्रामीणों में भारी आक्रोश व्याप्त है।
             करीब 7 एकड़ क्षेत्र में फैले इस ऐतिहासिक तालाब के अस्तित्व पर संकट मंडराने की बात करते हुए ग्रामीणों ने प्रशासन से तत्काल कार्यवाही की मांग की है। ग्रामीणों के अनुसार गांव के बीच स्थित यह तालाब वर्षो से जल संरक्षण का प्रमुख स्रोत रहा है।
आरोप यह भी है कि रसूखदार व्यक्ति दीपचंद टेंभरे द्वारा तालाब की शासकीय भूमि पर मिट्टी का भराव कराकर अवैध रुप से प्लॉट काटे जा रहा हैं। ग्रमीणों का दावा है कि तालाब की भूमि पर किए गए लगभग 95 प्रतिशत प्रतिशत प्लाट बेचे भी जा चुके है जिससे मामले की गंभीरता और बढ़ गई है।
          ग्रामीणों ने तत्कालीन पटवारी नीरज डोंगरे पर भी गंभीर आरोप लगाए हैं। उनका कहना है कि राजस्व अभिलेखों में कथित हेरफेर करते हुए किसी अन्य स्थान के पट्टे को तालाब की भूमि पर दक्यों गया, जिसके कारण अवैध प्लाटिंग का रास्ता साफ हुआ। ग्रामीणों का यह आरोप है कि राजस्व विभाग के कुछ जिम्मेदार अधिकारियों और कर्मचारियों की मिलीभगत के बिना इतनी बड़ी कार्रवाई संभव नहीं थी।
          इधर, ग्रामीण महिलाओं ने कहा कि हम जब विवाह करके गांव आये थे, यहां तालाब था। लेकिन अब वह तालाब नजर नहीं आता। तालाब का अस्तित्व समाप्त होने से क्षेत्र में भू जल स्तर पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ रहा है। पहले जहां आसपास के कुओं और हैंडपंपों में पर्याप्त पानी उपलब्ध रहता था, कहीं अब जलस्तर लगातार नीचे जा रहा है। ग्रामीणों का मानना है कि यदि तालाब को बचाने के लिए समय रहते प्रभावी कदम नहीं उठाए गए तो आने वाले वर्षों में क्षेत्र को गंभीर जल संकट का सामना करना पड़ सकता है।
                 ग्रामीणों द्वारा लंबे समय से शिकायतें किए जाने के बावजूद कार्रवाई नहीं होने से लोगों में नाराजगी बढ़ती गई। आखिरकार सेकने ग्रामीण एकजुट होकर सामने आए और उननि प्रशासन से तालाब की भूमि को अतिक्रमण मुक्त कराने की मांग करते हुए विरोध दर्ज कराया। ग्रामीणों ने चेतावनी दी है कि यदि दोषियों के खिलाफ सरया कार्यवाई नहीं की गई तो ये बड़े स्तर पर आंदोलन करने को मजबूर होंगे।
इधर, मामले की गंभीरता को देखते हुए वारासिवनी एसडीएम कार्तिकेय जायसवाल स्वयं मौके पर पहुंचे। उन्होंने ग्रामीणों से चर्चा कर उनकी शिकायतें सुनी तथा संबंधित दस्तावेजों की जानकारी ली। मीडिया से चर्चा के दौरान एसडीएम जायसवाल ने कहा कि पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराई जाएगी। जांच में जो भी व्यक्ति दोषी पाया जाएगा, उसके खिलाफ नियमानुसार कठोर वैधानिक कार्रवाई की जाएली। फिलहाल प्रशासन ने मामले की जांच शुरू करने के संकेत दिए हैं। अब सभी की निगाहें इस बात पर टिकी है कि प्रशासन कब तक जांच पूरी कर संस्कारी तालाब की भूमि को कथित भू-माफियाओं के बनने से मुक्त करा है और इस महत्वपूर्ण जलस्रोत को संक्षित करने के लिए क्या ठोस कदम उठाए जाते हैं।
Show More

Related Articles

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Back to top button