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किसानों ने सीएम योगी पर भरोसा किया

अपनी जमीन दी और जेवर हवाई अड्डे से पहली उड़ान पकड़ कर इतिहास बना दिया

जेवर : देखा जाये तो स्थानीय ग्रामीणों और किसानों की यह उड़ान केवल लखनऊ तक की यात्रा नहीं थी। यह गांव से वैश्विक मंच तक पहुंचते नए उत्तर प्रदेश की उड़ान थी। यह उस विश्वास की जीत थी, जहां किसान और सरकार साथ आए।
उत्तर प्रदेश के विकास की नई गाथा आज उस समय इतिहास के स्वर्णिम पन्नों में दर्ज हो गई, जब जेवर के वह किसान, जिन्होंने कभी अपनी पुश्तैनी जमीन नोएडा अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे के निर्माण के लिए समर्पित की थी, उसी धरती से पहली यात्री उड़ान में सवार होकर लखनऊ पहुंचे। यह केवल एक विमान यात्रा नहीं थी, बल्कि किसानों के त्याग, विश्वास, सरकार की दूरदर्शी सोच और बदलते उत्तर प्रदेश की जीवंत तस्वीर थी।
हम आपको बता दें कि नोएडा अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे से वाणिज्यिक उड़ान सेवाओं का औपचारिक शुभारंभ हुआ। लखनऊ से पहली उड़ान सुबह जेवर पहुंची और कुछ ही देर बाद लखनऊ के लिए पहली उड़ान रवाना हुई। इस ऐतिहासिक उड़ान में जेवर क्षेत्र के 172 ग्रामीण और किसान सवार थे, जिनकी जमीन हवाई अड्डे के पहले चरण के निर्माण के लिए अधिग्रहीत की गई थी। हाथों में बोर्डिंग पास लिए ग्रामीणों और महिलाओं के चेहरों पर गर्व और भावुकता साफ दिखाई दे रही थी। जिन हाथों ने कभी खेतों में हल चलाया, उन्हीं हाथों में आज हवाई यात्रा का बोर्डिंग पास था।
यह दृश्य केवल विकास का नहीं, बल्कि विश्वास का भी प्रतीक था। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में जिस परियोजना ने आकार लिया, वह आज पूरे उत्तर प्रदेश की प्रगति का नया द्वार बन चुकी है। मुख्यमंत्री ने स्वयं किसानों से संवाद करते हुए कहा कि आज का दिन ऐतिहासिक है और इस उपलब्धि के पीछे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की प्रेरणा तथा किसानों का त्याग सबसे बड़ा आधार है। उन्होंने याद किया कि जब राज्य मंत्रिमंडल ने जेवर में अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे के निर्माण का प्रस्ताव पारित किया था, तब उन्होंने अधिकारियों को सौ दिनों में भूमि अधिग्रहण प्रक्रिया शुरू करने की समयसीमा दी थी। प्रारंभिक सुस्ती के बाद मुख्यमंत्री ने स्वयं बैठक कर प्रक्रिया को गति दी और किसानों का विश्वास जीतते हुए इस महत्वाकांक्षी परियोजना को जमीन पर उतारा।
देखा जाये तो मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की यही कार्यशैली आज उत्तर प्रदेश को नई पहचान दे रही है। उनकी दूरदर्शी सोच ने जेवर को केवल एक हवाई अड्डा नहीं दिया, बल्कि पूरे पश्चिमी उत्तर प्रदेश को आर्थिक, औद्योगिक और व्यापारिक शक्ति केंद्र के रूप में स्थापित करने की दिशा में मजबूत आधार तैयार किया है। दिल्ली एनसीआर अब उन चुनिंदा वैश्विक महानगरों की श्रेणी में शामिल हो गया है, जहां एक से अधिक हवाई अड्डे संचालित हैं। इससे क्षेत्र में रोजगार, निवेश, पर्यटन और व्यापार के नए अवसर खुलेंगे।
इस पूरे परिवर्तन में जेवर के विधायक धीरेंद्र सिंह की भूमिका भी अत्यंत महत्वपूर्ण रही है। भूमि अधिग्रहण जैसे संवेदनशील और जटिल विषय में उन्होंने किसानों और प्रशासन के बीच मजबूत सेतु का कार्य किया। अनेक भूमि संबंधी विवादों और समस्याओं को सुलझाने में उनका सहयोग निर्णायक साबित हुआ। उन्होंने लगातार गांव गांव जाकर किसानों से संवाद किया, उनकी शंकाओं का समाधान कराया और विकास की इस यात्रा में उन्हें सहभागी बनाया। यही कारण है कि आज किसान खुले मन से इस परियोजना को अपनी खुद की उपलब्धि मान रहे हैं।
लखनऊ पहुंचे किसानों के प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्व करते हुए विधायक धीरेंद्र सिंह ने कहा कि यह दिन इतिहास के स्वर्णिम पन्नों में दर्ज होने योग्य है। उन्होंने कहा कि जिन किसानों ने राष्ट्रहित और प्रदेश के उज्ज्वल भविष्य के लिए अपनी भूमि समर्पित की, वही किसान आज विकास की इस यात्रा के सहभागी बनकर राज्य की राजधानी पहुंचे हैं। उधर, कई किसानों ने इस अवसर को अपने जीवन का सबसे बड़ा क्षण बताया। एक किसान ने कहा कि उन्होंने हवाई अड्डे के लिए अपनी तीस बीघा जमीन दी थी और अब क्षेत्र में हो रहे विकास को देखकर उन्हें गर्व महसूस हो रहा है। वहीं महिला यात्रियों ने कहा कि पहली उड़ान का हिस्सा बनना पूरे जेवर क्षेत्र के लिए सम्मान और गर्व की बात है। अबरार खान जैसे किसानों ने इसे अपने सपनों का साकार होना बताया।
हम आपको यह भी बता दें कि विमान सेवा के शुभारंभ के अवसर पर केंद्रीय नागर विमानन मंत्री किंजरापु राममोहन नायडू ने कहा कि जो सपना कभी असंभव लगता था, उसे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में साकार किया गया। उन्होंने कहा कि नोएडा अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे को केवल परिवहन केंद्र नहीं, बल्कि एक ऐसे आर्थिक क्षेत्र के रूप में विकसित किया जाएगा जहां उद्योग, व्यापार और आधुनिक सुविधाओं का विशाल तंत्र विकसित होगा।
देखा जाये तो स्थानीय ग्रामीणों और किसानों की यह उड़ान केवल लखनऊ तक की यात्रा नहीं थी। यह गांव से वैश्विक मंच तक पहुंचते नए उत्तर प्रदेश की उड़ान थी। यह उस विश्वास की जीत थी, जहां किसान और सरकार साथ आए। यह उस नेतृत्व का परिणाम था, जिसने विकास को केवल घोषणाओं तक सीमित नहीं रखा, बल्कि उसे जमीन पर उतारकर इतिहास बना दिया।

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