बागपत
जनसेवा, संघर्ष और जनविश्वास की मिसाल : केपी मलिक का राजनीतिक सफर

नेशनल प्रेस टाइम्स, ब्यूरो।
बागपत। राजनीति में सफलता केवल पद प्राप्त करने से नहीं मिलती, बल्कि जनता के दिलों में स्थान बनाने से मिलती है। उत्तर प्रदेश सरकार के राज्यमंत्री K P Malik का राजनीतिक जीवन इसी सत्य का उदाहरण है। लगभग चार दशक लंबे सार्वजनिक जीवन में उन्होंने एक सामान्य कार्यकर्ता और सभासद से लेकर विधायक और राज्यमंत्री तक का सफर तय किया है। उनकी पहचान ऐसे जननेता की रही है जो जनता के सुख-दुख में सदैव सहभागी रहे और जिसने राजनीति को जनसेवा का माध्यम माना।
राजनीतिक जीवन की शुरुआत
केपी मलिक ने वर्ष 1988 में बड़ौत नगर पालिका परिषद के सभासद के रूप में राजनीति में प्रवेश किया। उस समय उन्होंने स्थानीय समस्याओं, जनसुविधाओं और सामाजिक सरोकारों को अपना प्रमुख विषय बनाया। उनकी कार्यशैली और जनता के बीच निरंतर सक्रियता ने उन्हें शीघ्र ही स्थानीय राजनीति में स्थापित कर दिया।
वर्ष 1990 में वे नगर पालिका परिषद बड़ौत के चेयरमैन चुने गए। यह उनके राजनीतिक जीवन का पहला बड़ा पड़ाव था। चेयरमैन रहते हुए उन्होंने नगर विकास, सफाई व्यवस्था, सड़क निर्माण और नागरिक सुविधाओं के विस्तार पर विशेष ध्यान दिया। जनता के बीच उनकी लोकप्रियता लगातार बढ़ती गई।
संगठन और प्रशासनिक जिम्मेदारियां
वर्ष 1996 में उन्हें भारत सरकार के खाद्य मंत्रालय द्वारा उत्तरी परिक्षेत्र का निदेशक नामित किया गया। इसके बाद वर्ष 1999 में वे उत्तर प्रदेश सहकारी ग्राम विकास बैंक लिमिटेड के मेरठ और सहारनपुर मंडल के निर्विरोध निदेशक चुने गए। इन जिम्मेदारियों ने उन्हें प्रशासनिक अनुभव प्रदान किया तथा किसानों और ग्रामीण क्षेत्रों की समस्याओं को समझने का अवसर दिया।
विधान परिषद से विधानसभा तक
वर्ष 2004 में केपी मलिक स्थानीय निकाय निर्वाचन क्षेत्र से उत्तर प्रदेश विधान परिषद के सदस्य (एमएलसी) निर्वाचित हुए। लगभग छह वर्षों तक विधान परिषद में रहते हुए उन्होंने क्षेत्रीय विकास, किसानों, स्थानीय निकायों और जनहित के मुद्दों को प्रमुखता से उठाया।
इसके बाद उन्होंने पुनः स्थानीय राजनीति में अपनी सक्रिय भूमिका निभाई और वर्ष 2012 में नगर पालिका परिषद बड़ौत के अध्यक्ष बने। यह उनकी जनस्वीकृति और लोकप्रियता का प्रमाण था।
वर्ष 2017 के विधानसभा चुनाव में भारतीय जनता पार्टी ने उन्हें बड़ौत विधानसभा क्षेत्र से उम्मीदवार बनाया। जनता ने उन पर विश्वास जताते हुए उन्हें भारी समर्थन दिया और वे पहली बार विधायक निर्वाचित हुए। विधायक बनने के बाद भी उन्होंने अपनी जमीनी कार्यशैली को बरकरार रखा।
दूसरी बार विधायक और राज्यमंत्री
वर्ष 2022 के विधानसभा चुनाव में केपी मलिक ने लगातार दूसरी बार जीत हासिल की। उनकी जीत को क्षेत्र में किए गए विकास कार्यों, जनसंपर्क और जनता के बीच मजबूत पकड़ का परिणाम माना गया। इसके बाद मुख्यमंत्री Yogi Adityanath के नेतृत्व वाली सरकार में उन्हें राज्यमंत्री बनाया गया।
राज्यमंत्री के रूप में उन्होंने अपने विभागीय दायित्वों के साथ-साथ बड़ौत और बागपत क्षेत्र के विकास कार्यों पर विशेष ध्यान दिया। सड़क, बिजली, पेयजल, स्वास्थ्य, शिक्षा तथा ग्रामीण विकास से जुड़े अनेक कार्यों को गति दिलाने में उनकी भूमिका रही है।
जनता के सुख-दुख में सहभागी नेता
केपी मलिक की लोकप्रियता का सबसे बड़ा कारण उनकी जनसंपर्क शैली रही है। राजनीति में आने के बाद से उन्होंने कभी जनता से दूरी नहीं बनाई। क्षेत्र के लोग बताते हैं कि किसी परिवार में शादी हो, सामाजिक कार्यक्रम हो, बीमारी हो, दुर्घटना हो या किसी प्रकार का दुःखद अवसर—केपी मलिक हर स्थिति में लोगों के साथ खड़े दिखाई देते हैं।
यही कारण है कि उन्हें केवल एक राजनेता नहीं बल्कि परिवार के सदस्य की तरह देखा जाता है। जनता के बीच उनकी सहज उपलब्धता और सरल व्यवहार ने उन्हें बागपत क्षेत्र के सबसे लोकप्रिय नेताओं में शामिल किया है।
जनहित में प्रमुख कार्य
अपने राजनीतिक जीवन के दौरान उन्होंने अनेक जनहितकारी कार्यों को प्राथमिकता दी। क्षेत्र में सड़क निर्माण, संपर्क मार्गों का विस्तार, बिजली व्यवस्था में सुधार, पेयजल सुविधाओं का विकास, शिक्षा संस्थानों को प्रोत्साहन तथा स्वास्थ्य सेवाओं को मजबूत करने के लिए उन्होंने लगातार प्रयास किए। किसानों की समस्याओं को शासन तक पहुंचाना और उनके समाधान के लिए संघर्ष करना भी उनकी कार्यशैली का महत्वपूर्ण हिस्सा रहा है।
जनता दरबार और नियमित जनसुनवाई के माध्यम से उन्होंने हजारों लोगों की समस्याओं के समाधान का प्रयास किया। यही कारण है कि उनका जनाधार लगातार मजबूत होता गया।
सरला मलिक का योगदान
केपी मलिक की राजनीतिक और सामाजिक यात्रा में उनकी पत्नी सरला मलिक का भी महत्वपूर्ण योगदान रहा है। वे लंबे समय से सामाजिक गतिविधियों और जनसंपर्क कार्यक्रमों में सक्रिय रही हैं। वर्ष 2006 में वे नगर पालिका परिषद बड़ौत की चेयरमैन भी चुनी गईं। महिलाओं के बीच उनकी अच्छी पहचान है और उन्होंने विभिन्न सामाजिक अभियानों तथा जनकल्याणकारी कार्यक्रमों में सक्रिय भूमिका निभाई है।
मलिक परिवार की जनसेवा की परंपरा को मजबूत करने में सरला मलिक का योगदान महत्वपूर्ण माना जाता है।
नई पीढ़ी के रूप में साहिल मलिक
अब इस जनसेवा और जनविश्वास की विरासत को नई पीढ़ी आगे बढ़ाती दिखाई दे रही है। केपी मलिक के पुत्र साहिल मलिक लगातार क्षेत्र में सक्रिय हो रहे हैं। वे सामाजिक, धार्मिक और सार्वजनिक कार्यक्रमों में भाग लेते हैं तथा लोगों के सुख-दुख में सहभागी बनते हैं।
राजनीतिक हलकों में यह चर्चा है कि साहिल मलिक भविष्य में सक्रिय राजनीति में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं। जिस प्रकार उनके पिता ने जनता के बीच रहकर अपनी पहचान बनाई, उसी प्रकार साहिल मलिक भी जनसंपर्क और सामाजिक सक्रियता के माध्यम से लोगों का विश्वास जीतने का प्रयास कर रहे हैं।
क्षेत्र के लोग मानते हैं कि यदि वे अपने पिता की जनसेवा, सादगी और जनता से जुड़े रहने की परंपरा को आगे बढ़ाते हैं, तो आने वाले समय में वे भी क्षेत्रीय राजनीति में एक महत्वपूर्ण नाम बन सकते हैं।
राजनीतिक कार्यकाल एक नजर में
1988 – सभासद, नगर पालिका परिषद बड़ौत
1990 – चेयरमैन, नगर पालिका परिषद बड़ौत
1996 – निदेशक, खाद्य मंत्रालय (उत्तरी परिक्षेत्र)
1999 – निदेशक, उत्तर प्रदेश सहकारी ग्राम विकास बैंक लिमिटेड
2004–2010 – सदस्य, उत्तर प्रदेश विधान परिषद (एमएलसी)
2006 – सरला मलिक, चेयरमैन नगर पालिका परिषद बड़ौत
2012 – अध्यक्ष, नगर पालिका परिषद बड़ौत
2017–2022 – विधायक, बड़ौत विधानसभा
2022–वर्तमान – विधायक, बड़ौत विधानसभा
2022–वर्तमान – उत्तर प्रदेश सरकार में राज्यमंत्री
केपी मलिक का जीवन संघर्ष, परिश्रम, जनसेवा और जनविश्वास की प्रेरक कहानी है। सभासद से राज्यमंत्री तक का उनका सफर यह सिद्ध करता है कि जनता के बीच रहकर, उनकी समस्याओं को समझकर और उनके सुख-दुख में सहभागी बनकर राजनीति में स्थायी पहचान बनाई जा सकती है। आज वे बागपत क्षेत्र में विकास, सेवा और लोकप्रियता के प्रतीक माने जाते हैं। वहीं उनके पुत्र साहिल मलिक नई पीढ़ी के प्रतिनिधि के रूप में उसी विरासत को आगे बढ़ाने की दिशा में कदम बढ़ा रहे हैं, जिससे क्षेत्र की राजनीति में जनसेवा की यह परंपरा आगे भी कायम रहने की उम्मीद दिखाई देती है।



