बेतुल

बैतूल हे जंतरी मंत्री के तथाकथित जेन जी तेरे नाम खुला पत्र पढ़ और कुछ समझ आये तो धरती मां, नदी मां, गौ मां, प्रकृति के लिए कुछ कर सक हेमंत चंद्र दुबे बबलू

हे जंतर मंतर के तथाकथित जेन जी  तेरे  कदमों में नमन है 
नेशनल प्रेस टाइम्स, ब्यूरो 
बैतूल आपने जंतर मंतर पर जंक फूड खाकर आंदोलन से मंत्री का इस्तीफा करवाकर जीत हासिल की है ,वह न केवल  काबिले तारीफ है बल्कि अभिनंदन योग्य है ,क्योंकि तूने दिखला दिया कि गांधी का सत्याग्रह तेरा रास्ता नहीं, भगत सिंह राजगुरू सुखदेव चंद्रशेखर आजाद की क्रांति तेरा रास्ता नहीं, तेरा रास्ता तो आप बाप पार्टी के बताएं रास्ते पर चलकर मात्र एक मंत्री का इस्तीफा  है।
अर्धसैनिक बलों के जवानों पर हमला करके जो क्रान्ति का दृश्य आपने दिखाया है और जो क्रांति का सूत्रपात किया है , आने वाली  और वर्तमान पीढ़ी उससे प्रेरणा लेकर डॉक्टर और इंजीनियर बनने में सफलता हासिल  करेगी या नहीं लेकिन इसमें कोई शक नहीं वह कम से कम डाक्टर बने न बने पर दूसरों के हाथ पैर तोड़कर डॉक्टर के पास उपचार करने वाले अवश्य हजार दो हजार  जेन जी तैयार  कर दिए हैं।
हे  तथाकथित जेन जी, तुम महान है जो मंत्री  के त्यागपत्र को अपनी जीत बताकर महंगी महंगी होटलो में नृत्य करके आने वाली पीढ़ी और वर्तमान पीढ़ी को सीखा गए कि भले ही हमारे साथी पेपर लीक होने पर मौत को  गले लगा ले, लेकिन हम मंत्री के त्यागपत्र पर जश्न  मनाने को  न भूले , क्योंकि हमारे जीवन का मिशन मात्र एक मंत्री का इस्तीफा है, न कि शिक्षा क्रांति।
हे तथाकथित जेन जी तू अर्ध सैनिक  बलों पर लात बरसाकर अपने पुरुषार्थ  और लातों की ताकत को तो देश को दिखा सकता हैं ,किंतु हे जेन जी तू फुटबॉल पर लात बरसा बरसा कर अपनी लातो की ताकत से भारत को विश्व कप फुटबॉल में क्वालीफाई नहीं करा  सकता है ,यह  कटु सत्य है। क्योंकि फुटबॉल खेलने की ताकत तेरे पैरो में नहीं है।
हे तथाकथित जेन जी तू  डॉक्टर,इंजीनियर, आई ए एस  बनने की अंधी दौड़ में हिस्सा लेकर तू आत्म हत्या अवश्य कर सकता हैं, किंतु हे जेन जी तू भारत को ओलंपिक की दौड़ में एक पदक नहीं दिलवा सकता हैं और न ही ओलंपिक खेलों में  विक्ट्री स्टैंड से तू तिरंगे को लहराकर पदकों की तालिका में भारत को दो अंकों में ला सकता है यह कटु सत्य है।
हे तथाकथित जेन जी तू पेपर लीक  मसले पर मंत्री के त्यागपत्र के लिए 24 _25 दिनों तक पिज्जा बर्गर खाकर संसद मार्च निकाल सकता है, पर हे जेन जी तू गंगा की अविरलता निरंतरता के लिए 111 दिनों की भूख हड़ताल पर अपने प्राणों का बलिदान करने वाले आई आई टी प्रोफेसर जी डी अग्रवाल स्वामी जी का साथ नहीं दे सकता हैं , न ही अपने शहर की नदी की अविरलता निरंतरता के लिए कुछ कर सकता है।
हे तथाकथित जेन जी तू भारत के  क्षितिज पर उगते हुए सूरज के दर्शन नहीं कर पाता हैं  किंतु हे जेन जी तू अमेरिका के क्षितिज पर उगते सूरज को अवश्य  देखता है क्योंकि हे जेन जी तेरी सुबह भारत के उगते सूरज से नहीं बल्कि तेरी सुबह अमेरिका के उगते सूरज से और भारत के डूबते सूरज से होती है। इसलिए तेरे  जीवन का मकसद केवल एक मंत्री का इस्तीफा बन जाता हैं , तेरा जीवन मिशन ओर आंदोलन नहीं, तेरा जीवन सुर्खियों में छाए रहने, मीडिया में  बने रहने और रील बनाने तक ही सीमित है।
हे जेन जी तू जंतर मंतर पर रात दिन मंत्री के त्यागपत्र के लिए एक कर देता है ,किन्तु तू खेत की मेड़ पर खड़ा होकर किसानों को जैविक खेती करना  नहीं सीखा सकता है ताकि मेरे देश के नागरिक को कैंसर से बचाया जा सकता, तू उसके लिए सरकार के मंत्रियों से संवाद नहीं स्थापित करता न  ही तू संसद के घेराव का आह्वान करता है।
हे तथाकथित जेन जी तू  जंतर मंतर पर बैठकर हजारों  पानी की प्लास्टिक की बोतलों को पी पी कर खाली कर सकता है, लेकिन हे जेन जी तू अपने शहर की धरती मां के दूषित हो रहे भूमिगत जल के लिए धरती मां को पॉलीथिन प्लास्टिक डिस्पोजल मुक्त नहीं कर सकता हैं। तू नदी मां की अविरलता निरंतरता के लिए आंदोलन और संसद का  घेराव और सरकार से इस्तीफा नहीं मांग सकता है क्योंकि तू सिर्फ अपने डॉक्टर इंजीनियर, क्लेकटर , विधायक सांसद बनने के सपने देखता और  बुनता है।
हे तथाकथित जेन जी तू पेपर लीक होने पर छाती पीट पीट कर रो सकता हैं , आत्महत्या कर सकता है ,लेकिन जिस धरती मां का अन्न खाकर और जल पीकर तू मंत्री का इस्तीफा लेकर क्रांतिकारी बन रहा है ,जरा धरती मां की मौत पर भी थोड़ी देर के लिए ही सही आंदोलित और दो आंसू बहा जंतर मंतर पर  छाती पीट लेता।
हे  जेन जी जिस मां ने अपनी छाती से लगाकर दूध पिलाकर स्नेह से तकलीफ़ों में रहकर , भूखे रहकर तेरे को बड़ा किया और तुझे  जेन जी कहलाने का हकदार बनाया ,आज वही सैकड़ों हजारों मां के स्तन कैंसर से ग्रसित मां को तुम मौत के मुंह में भेज रहे हो, लेकिन हे जेन जी तुझे अपनी मां का दर्द  नहीं दिखता है, सरकार की कैंसर कारक नीतियों के खिलाफ एक शब्द बोलने के लिए तू तैयार नहीं है। नित्य हजारों मां बेटियों की मौत कैंसर से हो रही है, लेकिन तू  घर में  बैठी दर्दनाक मौतों से बेखबर मंत्री के त्यागपत्र की खुशी से में  होटलों और सड़कों पर जश्न मना रहा हैं। हे जेन  जी तेरी आंखों के सामने हज़ारों पेड़ आजाद भारत की सरकारों ने विकास के नाम पर काट डाले पर हे जेन जी तुझे उन  मासूम मौतों के लिए जंतर मंतर पर आन्दोलन नहीं दिखा।
वास्तव में हे जेन जी पेपर लीक आंदोलन तो एक बहाना था, असल में तू भी जंतर मंतर पर राजनैतिक जमीन तलाशने और बनाने ही निकला है जैसा कभी  जे पी  आंदोलन में हुआ और उससे निकले नेता ने हमारे पशुधन का  भोजन ही डकार  गए जमीन के बदले नौकरी दे डाली, जैसे इंडिया अगेंस्ट करप्शन से निकले नेता एक बोतल पर दो बोतल मुफ्त शराब पिलाकर क्रांतिकारी मुख्यमंत्री बन गए, 500 वर्ष के राम मंदिर आंदोलन से हज़ारों कारसेवकों के बलिदान से बने राम मंदिर के चढ़ावे में चोरी करने वाले निकल गए? जिन्होंने देश की आजादी के लिए सर्वस्व लुटा दिया , वे ही देश की इज्जत को मिट्टी में मिलाकर विदेशी धरती पर घूम घूम कर , देश वापस आकर देश को अराजकता की आग में झौंकने में  संकोच नहीं कर रहे है।
ऐसा  ही कुछ  तथाकथित जेन जी आंदोलन का  भविष्य  है , इससे ज्यादा कुछ नहीं क्योंकि ये जंतर मंत्री जेन जी  अपनी सोच से आंदोलन नहीं कर रहे हैं बल्कि उधार की  राजनैतिक सोच से आंदोलन का मुखौटा लगाएं हुए  आंदोलन में उतरे हुए है।
कोई किसी पार्टी का विधायक बनेगा कोई  सांसद और मंत्री (जैसे भूतपूर्व हाल के शिक्षा मंत्री) भोला भाला  जेन जी मुंह लटकाए ठगा सा महसूस किसी चाय की दुकान पर चाय पीते अपनी किस्मत को कोसते और नेताओं को  गाली देते मिलेगा।
हे भारत के जेन जी यदि तू वास्तव में आंदोलनकारी जेन जी तो फिर उठ खड़ा हो  भारत की धरती मां को पॉलीथिन प्लास्टिक डिस्पोजल से मुक्त करने के लिए, हे जेन जी तू फिर उठ खड़ा हो नदी मां की अविरलता निरंतरता के लिए, तू फिर उठ खड़ा हो गौ मां के प्राणों को बचाने के लिए, हे जेन जी तू उठ खड़ा हो घर में बैठी अपनी मां बेटियों की कैंसर से होती  दर्दनाक मौतों को होने से रोकने के लिए, फ़िर तू उठ खड़ा हो कैंसर कारकों और सरकार की कैंसर जनित नीतियों के खिलाफ संसद का घेराव करके भारत को कैंसर मुक्त  बनाने के लिए। हे जेन जी फिर तू उठ खड़ा राष्ट्रमंडल खेलो के भारत में आयोजित होने के विरोध में, क्योंकि  राष्ट्रमंडल खेलो का आयोजन देश के हजारों शहीदों, वीरों का अपमान है , जिन्होंने अंग्रेजों की गुलामी से भारत मां को आजाद करने के लिए   अपने प्राणों का सर्वोच्च बलिदान कर तुम्हें आजाद  भारत का जेन जी कहलाने का हकदार बना दिया और तेरे ही देश की सरकारें उस गुलामी का महिमा मंडन करने के लिए राष्ट्रमंडल खेलो का आयोजन करने पर पहले भी आमादा रही और आज भी आमदा हैं लेकिन तू तो मंत्री का इस्तीफा लेकर तमाशा देखने में आनंदित और विक्ट्री का साइन दिखाकर होटलों में नाच रहा हैं।
ध्यान रहे जेन जी यदि  तेरे जीवन का मिशन केवल और केवल मंत्री का इस्तीफा है तो फिर तू उसके इस्तीफ़े से खुश हो फाइव स्टार होटल में निर्लज्जता के साथ नाच दिखा विधायक, सांसद, मंत्री बन जा, और फिर भविष्य में पेपर लीक जैसी घटना की पुनरावृति कराकर त्यागपत्र देकर महानता   सिद्ध करते रहना, जैसे आज हो रही है। हे तथाकथित जेन जी न तो तू अभिमन्यु है जो वीरों की  भांति चक्रव्यूह को तोड़कर प्राण दे दे , न तू लव कुश है कि भगवान के अश्वमेघ यज्ञ के  घोड़े को  हिरासत में ले ले, न तू भगत सिंह राजगुरू सुखदेव चंद्रशेखर आजाद है जो हंसते हंसते  भारत मां की जय कहते फांसी के फंदे को चूम ले , तू मात्र एक मंत्री के त्यागपत्र को मांगने वाला वह  याचक और आंदोलनकारी साबित हुआ है जो केवल अपने लिए जीता है और इसलिए तो एक मंत्री के त्यागपत्र को अपनी जीत  बताते फूला नहीं समा रहा है।
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