गाजियाबाद

विधान सभा चुनाव में बदलाव के मूड में लोनी की जनता

सोशल मीडिया पर जीत के दावों से अलग है जमीनी हकीकत

नेशनल प्रेस टाइम्स, ब्यूरो।
लोनी गाजियाबाद : विधानसभा चुनाव में अभी समय बाकी है, लेकिन लोनी विधानसभा क्षेत्र का  सियासी माहौल अभी से गरमाने लगा है। सोशल मीडिया, खासकर व्हाट्सएप ग्रुपों पर विभिन्न राजनीतिक दलों और संभावित प्रत्याशियों के समर्थक अपने-अपने नेताओं की जीत के दावे करते नजर आ रहे हैं। कहीं वर्तमान विधायक की दोबारा जीत का दावा किया जा रहा है तो कहीं कांग्रेस, सपा और राष्ट्रीय लोकदल समर्थक अपने-अपने संभावित प्रत्याशियों को मजबूत बताते हुए चुनावी जीत की भविष्यवाणी कर रहे हैं।
हालांकि सोशल मीडिया पर चल रही इस सियासी बहस से अलग लोनी की जमीनी तस्वीर कुछ और ही कहानी बयां करती नजर आ रही है। क्षेत्र में राजनीतिक चर्चाओं के बीच जनता के बीच बदलाव की चर्चा लगातार जोर पकड़ रही है। स्थानीय लोगों का कहना है कि उन्हें अब आरोप-प्रत्यारोप और राजनीतिक खींचतान से ज्यादा क्षेत्र का विकास चाहिए।
विकास कार्यों की अनदेखी से लोगों में नाराजगी
लोनी विधानसभा क्षेत्र में लंबे समय से जलभराव, जल निकासी, सड़क, साफ-सफाई, बिजली, प्रदूषण और अन्य बुनियादी सुविधाओं को लेकर लोगों की शिकायतें लगातार सामने आती रहती हैं। बारिश के दौरान कई कॉलोनियों में जलभराव की समस्या लोगों के लिए परेशानी का कारण बनती है। कई इलाकों में नालियों की सफाई और जल निकासी की व्यवस्था को लेकर भी सवाल उठते रहे हैं।
स्थानीय लोगों का कहना है कि चुनाव के समय इन राजनीतिक जनप्रतिनिधियों द्वारा विकास के बड़े-बड़े दावे किए जाते हैं, लेकिन चुनाव खत्म होने के बाद उनकी समस्याएं फिर पीछे छूट जाती हैं। जनता अब केवल घोषणाओं और राजनीतिक दावों के बजाय जमीन पर दिखाई देने वाले विकास कार्यों का हिसाब मांगने के मूड में दिखाई दे रही है।
विधानसभा से लेकर नगरपालिका तक उठ रहे सवाल
लोनी की राजनीति में विधानसभा के साथ-साथ नगरपालिका की कार्यप्रणाली भी चर्चा का विषय बनी हुई है। स्थानीय स्तर पर लोगों की शिकायत है कि कई मूलभूत समस्याओं का स्थायी समाधान नहीं हो सका है। दूसरी ओर राजनीतिक दल और उनके समर्थक एक-दूसरे पर आरोप लगाने तथा एक-दूसरे की टांग खींचने का कोई अवसर नहीं छोड़ते।
सोशल मीडिया पर भी यही तस्वीर दिखाई देती है। समर्थक अपने नेता की उपलब्धियां गिनाने के साथ विपक्षी नेताओं की कमियां तलाशने में जुटे हैं। लेकिन जनता के बीच सवाल यह है कि राजनीतिक बयानबाजी और आपसी खींचतान से आखिर क्षेत्र की समस्याओं का समाधान कैसे होगा?
साफ-सुथरी छवि वाले चेहरे की तलाश में क्षेत्रीय नागरिक
राजनीतिक चर्चाओं के बीच लोनी के मतदाताओं का एक वर्ग इस बार साफ-सुथरी छवि, बेहतर जनसंपर्क और विकास का स्पष्ट विजन रखने वाले प्रत्याशी की तलाश में नजर आ रहा है। लोगों का कहना है कि उन्हें ऐसा प्रतिनिधि चाहिए जो चुनाव के बाद भी जनता के बीच उपलब्ध रहे और क्षेत्र की समस्याओं को शासन-प्रशासन के सामने प्रभावी तरीके से उठाए।
यही वजह है कि आगामी विधानसभा चुनाव में केवल पार्टी का नाम या सोशल मीडिया पर समर्थकों की सक्रियता ही निर्णायक नहीं होगी। प्रत्याशी की व्यक्तिगत छवि, जनता के बीच उसकी स्वीकार्यता, स्थानीय मुद्दों की समझ और पिछले कामकाज का रिकॉर्ड भी महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है।
टिकट चयन में दलों के सामने बड़ी चुनौती
लोनी विधानसभा क्षेत्र में चुनावी समीकरणों को देखते हुए राजनीतिक दलों के लिए प्रत्याशी का चयन आसान नहीं होगा। यदि दल ऐसे चेहरों को चुनावी मैदान में उतारते हैं जिनके प्रति जनता में पहले से नाराजगी या असंतोष है, तो सोशल मीडिया पर समर्थकों के तमाम दावों के बावजूद उन्हें जमीनी स्तर पर मुश्किलों का सामना करना पड़ सकता है।
वहीं यदि राजनीतिक दल जनता की अपेक्षाओं को समझते हुए साफ छवि, मजबूत जनाधार और विकास के एजेंडे के साथ नए या स्वीकार्य चेहरे को मौका देते हैं तो चुनावी मुकाबला काफी दिलचस्प हो सकता है।
फिलहाल सोशल मीडिया की ‘व्हाट्सएप यूनिवर्सिटी’ में अलग-अलग दलों के समर्थक अपने-अपने प्रत्याशियों की जीत के दावे ठोक रहे हैं, लेकिन असली फैसला सोशल मीडिया पर नहीं बल्कि मतदान केंद्रों पर होगा। लोनी की जनता इस बार किसे मौका देती है, इसका जवाब चुनाव के समय ही मिलेगा। इतना जरूर है कि विकास, साफ छवि और बदलाव की चाहत इस बार लोनी के चुनावी मुद्दों को प्रभावित करने वाले प्रमुख कारकों में शामिल हो सकती है। दूसरी और हिंदू रक्षा दल के अमित प्रजापति ने लोनी में बरसात से हुए जलभराव के बीच खड़े होकर आम जनता से वादे करने वाले नेताओं से दूरी बनाने की अपील करते हुए सही व्यक्ति का चयन करने की मांग की थी जो जनता की आवाज उठाते हुए उनकी समस्याओं का निराकरण करा सके।
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