बालाघाट
बैगा अंचल में बीमारी का कहर, अंधविश्वास बनी बड़ी चुनौती
झाड़-फूंक के भरोसे इलाज में देरी, स्वास्थ्य विभाग ने गांवों में डेरा डालकर संभाला मोर्चा

नेशनल प्रेस टाइम्स, ब्यूरो
बालाघाट(म0प्र0) : बारिश के मौसम के साथ बालाघाट जिले के बैगा आदिवासी अंचल में संक्रमण का खतरा बढ़ गया है। मछुरदा, अडोरी, बोंदारी, कोरका और कुंडेकसा सहित बैगा बाहुल्य गांवों में मलेरिया, टायफाइड, डायरिया और त्वचा संक्रमण जैसी बीमारियों के मामले सामने आए हैं। बच्चों के बीमार पड़ने और कुछ मासूमों की मौत के बाद स्वास्थ्य विभाग ने प्रभावित क्षेत्रों में निगरानी बढ़ाते हुए मेडिकल टीमों को तैनात किया है। इन गांवों में कुंडेकसा सबसे अधिक प्रभावित बताया जा रहा है। स्वास्थ्य विभाग की टीमें गांव-गांव पहुंचकर लोगों की स्क्रीनिंग, जांच और उपचार कर रही हैं।
गंभीर मरीजों को आवश्यकता के अनुसार अस्पताल पहुंचाया जा रहा है। कुंडेकसा के सरकारी स्कूल में अस्थायी स्वास्थ्य केंद्र बनाकर मरीजों को उपचार उपलब्ध कराया जा रहा है। डॉक्टरों और स्वास्थ्यकर्मियों की टीमें लगातार स्थिति पर नजर बनाए हुए हैं। 96 बच्चे गंभीर स्थिति में अस्पताल पहुंचे सरकारी आंकड़ों के अनुसार, 96 बच्चों को गंभीर स्थिति में सिविल अस्पताल बैहर और जिला अस्पताल बालाघाट में भर्ती कराया गया। इनमें 51 बच्चों की हालत में सुधार होने के बाद उन्हें डिस्चार्ज किया जा चुका है, जबकि जिला अस्पताल में 45 बच्चों का उपचार जारी बताया गया है। अस्पताल में भर्ती बच्चों और उनके परिजनों के लिए भोजन की व्यवस्था भी की गई है। प्रभावित गांवों में स्वास्थ्य विभाग लगातार निगरानी कर रहा है। विभाग की प्राथमिकता मरीजों को समय पर उपचार उपलब्ध कराने और संक्रमण को आगे फैलने से रोकने की है। हालांकि बीमारी के बीच कई मासूमों की मौत ने पूरे क्षेत्र में चिंता बढ़ा दी है। अंधविश्वास भी बनी इलाज की राह में बाधा बीमारी से निपटने के बीच स्वास्थ्य विभाग के सामने एक और बड़ी चुनौती अंधविश्वास और झाड़-फूंक की है। बैगा अंचल के कुछ परिवार आज भी बीमारी को चिकित्सकीय समस्या के बजाय देवी-देवताओं का प्रकोप मान लेते हैं। ऐसे में अस्पताल या स्वास्थ्य केंद्र पहुंचने से पहले पंडा-पुजारी, झाड़-फूंक और पारंपरिक उपचार का सहारा लिया जाता है। हाल ही में बीमारी को दूर करने के नाम पर बड़ी संख्या में मुर्गों की बलि दिए जाने की बात भी सामने आई है। स्वास्थ्यकर्मी ग्रामीणों को लगातार समझाइश दे रहे हैं कि बुखार, दस्त, कमजोरी अथवा संक्रमण के अन्य लक्षण दिखाई देने पर झाड़-फूंक में समय गंवाने के बजाय तत्काल स्वास्थ्य केंद्र या अस्पताल पहुंचें। गांव में ही इलाज उपलब्ध कराने की कोशिश स्वास्थ्य विभाग ने प्रभावित क्षेत्रों में मेडिकल टीमों की मौजूदगी बढ़ा दी है, ताकि ग्रामीणों को इलाज के लिए दूर न जाना पड़े। मरीजों की जांच, दवा वितरण, स्क्रीनिंग और गंभीर मरीजों को अस्पताल भेजने की प्रक्रिया लगातार जारी है।
विभाग का कहना है कि फिलहाल स्थिति नियंत्रण में है, लेकिन ग्रामीणों को सतर्क रहने और बीमारी के लक्षण दिखाई देने पर तत्काल चिकित्सकीय सलाह लेने की जरूरत है। पूर्व सांसद ने उठाई मुआवजे और टास्क फोर्स की मांग प्रभावित गांवों में बच्चों की मौत के बाद पूर्व सांसद कंकर मुंजारे ने भी क्षेत्र का दौरा किया। उन्होंने बीमारी की स्थिति को देखते हुए विशेष टास्क फोर्स गठित करने और मृत बच्चों के परिवारों को मुआवजा देने की मांग उठाई है। फिलहाल बैगा अंचल में स्वास्थ्य विभाग की चुनौती दोहरी है—एक ओर संक्रमण और बीमारियों पर नियंत्रण करना, वहीं दूसरी ओर ग्रामीणों को अंधविश्वास से बाहर निकालकर समय पर चिकित्सा सुविधा तक पहुंचाना। ऐसे में जागरूकता और समय पर उपचार ही इस संकट से निपटने की सबसे महत्वपूर्ण कड़ी बनकर सामने आ रहे हैं।



