
नई दिल्ली। नितिन नवीन की नई टीम के गठन के ठीक एक दिन बाद भारतीय जनता पार्टी ने अपने संगठनात्मक ढांचे को और मजबूत करते हुए तीन प्रमुख राज्यों में प्रभारियों का एलान कर दिया है। यह तीन राज्य उत्तर प्रदेश, पंजाब और गुजरात हैं।
इस नए फेरबदल में पार्टी के राष्ट्रीय महासचिव विनोद तावड़े को उत्तर प्रदेश की कमान सौंपी गई है। इसके साथ ही राष्ट्रीय महासचिव सतीश पूनिया को पंजाब और तरुण चुघ को गुजरात का प्रभारी नियुक्त किया गया है।
उत्तर प्रदेश में तावड़े के सामने नई चुनौतियां
उत्तर प्रदेश बीजेपी के लिए राजनीतिक और रणनीतिक रूप से सबसे अहम राज्य है। हालांकि पार्टी ने लगातार दो बार विधानसभा और लोकसभा चुनावों में जीत दर्ज की है, लेकिन पिछले लोकसभा चुनाव में पार्टी की पकड़ी ढीली नजर आई। ऐसे में बीजेपी उत्तर प्रदेश में अपनी पकड़ को और मजबूत करना चाहती है।
ऐसे में विनोद तावड़े के सामने आगामी चुनावों में जीत की हैट्रिक सुनिश्चित करने और संगठनात्मक संतुलन बनाने की बड़ी चुनौती होगी।
संगठन में तालमेल और अंदरूनी गुटबाजी
नियुक्तियों के इतर देखें तो विनोद तावड़े उत्तर प्रदेश के संगठनात्मक मामलों में पहले से ही सक्रिय भूमिका निभा रहे थे। योगी मंत्रिमंडल के विस्तार से लेकर प्रदेश संगठन के ढांचे और समन्वय में उनकी अहम छाप देखी गई है।
सरकार के बीच बेहतर तालमेल बिठाने और अंदरूनी गुटबाजी को दूर कर सबको साथ लेकर चलने की रणनीति के तहत उन्हें यह जिम्मेदारी दी गई है।
बिहार में मिली जबरदस्त सफलता
उत्तर प्रदेश से पहले विनोद तावड़े ने बिहार में बीजेपी के प्रदेश प्रभारी के रूप में अहम भूमिका निभाई थी। 2022 में जब उन्हें बिहार का प्रभार मिला, तब राजनीतिक परिस्थितियां काफी चुनौतीपूर्ण थीं। उन्होंने जेडीयू की एनडीए में वापसी और गठबंधन सहयोगियों के साथ सीट-शेयरिंग के तालमेल में मध्यस्थ की भूमिका निभाई।
बूथ स्तर पर कैडर को फिर से सक्रिय करने और जटिल सामाजिक-जातिगत समीकरणों को साधने में उनकी भूमिका काफी महत्वपूर्ण रही। बिहार में पार्टी के बेहतर प्रदर्शन और संगठनात्मक कौशल के चलते ही केंद्रीय नेतृत्व ने उन पर लगातार भरोसा जताया है।
राजनीतिक सफर और संगठनात्मक पृष्ठभूमि
महाराष्ट्र से आने वाले विनोद तावड़े लंबे समय से बीजेपी में सक्रिय हैं। छात्र जीवन से ही वे आरएसएस और अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद से जुड़े रहे और 1980 के दशक में पूर्णकालिक कार्यकर्ता बने।
1999 में वे मुंबई भाजपा के सबसे युवा अध्यक्ष बने और कई सालों तक महाराष्ट्र बीजेपी के महासचिव रहे। 2014 से 2019 के दौरान देवेंद्र फडणवीस सरकार में उन्होंने स्कूली शिक्षा, उच्च एवं तकनीकी शिक्षा, खेल और सांस्कृतिक मामलों के कैबिनेट मंत्री के रूप में काम किया।
वे 2011 से 2014 तक महाराष्ट्र विधान परिषद में विपक्ष के नेता भी रहे। चुनाव और मतदाता संबंधी किसी भी आधिकारिक जानकारी या मतदाता सूची के सत्यापन के लिए नागरिक भारत निर्वाचन आयोग (एउक) के आधिकारिक पोर्टल पर जा सकते हैं।


