
नेशनल प्रेस टाइम्स, ब्यूरो
बरेली। सीएमओ कार्यालय में फर्जी दिव्यांग प्रमाण पत्र का मामला पकड़े जाने के बाद सोमवार को लगे शिविर में सख्ती दिखी। दो सप्ताह बाद शिविर लगा तो सुबह से ही भीड़ उमड़ पड़ी, दो लाइनें लगवानी पड़ीं।
अधिकारी-कर्मचारी अलर्ट रहे। आवेदन पत्रों की दो स्तर पर जांच की गई। फोटो और पते का आवेदन व परिचय पत्र से मिलान कराने के बाद ही मेडिकल परीक्षण के लिए भेजा गया।
दिल्ली पुलिस ने इस मामले में सीएमओ कार्यालय में डाटा एंट्री का काम करने वाले आउटसोर्सिंग कर्मचारी कुलदीप को पकड़ा है। इसी जांच के चलते पिछला शिविर नहीं लगा था। नोडल अधिकारी एसीएमओ डॉ. राकेश पूरे समय मौजूद रहे और एक-एक आवेदन जांचते रहे। नए डाटा एंट्री ऑपरेटर मुकेश को हिदायत दी गई है कि सत्यापन के बिना परीक्षण न कराया जाए।
दिल्ली पुलिस डेढ़ साल में बने 100 से अधिक प्रमाण पत्रों की जांच कर रही है। अधिकांश बहरेपन की दिव्यांगता के हैं।



