बेतुल
बैतूल उमंग है तो जिंदगी में रंग हैं, बेटियों ने सीखा स्वस्थ और सकारात्मक जीवन का मंत्र
बेटियों को बताया एनीमिया से बचाव, पॉक्सो एक्ट और साइबर अपराध से सुरक्षा का तरीका

नेशनल प्रेस टाइम्स, ब्यूरो
बैतूल। ईएफए शासकीय कन्या उच्चतर माध्यमिक विद्यालय गंज में 22 सितंबर को उमंग दिवस मनाया गया। इस वर्ष की थीम उमंग है तो जिंदगी में रंग हैं रही। कार्यक्रम का उद्देश्य छात्राओं को मानसिक स्वास्थ्य के प्रति जागरूक करना, नकारात्मकता कम करना और जीवन कौशल व व्यक्तिगत विकास को बढ़ावा देना रहा।
प्रभारी शिक्षक महेश गुंजेले ने बताया कि कार्यक्रम में छात्राओं को एनीमिया क्या और क्यों विषय पर जानकारी दी गई। प्राचार्य ललितलाल लिल्होरे, चिकित्सा अधिकारी डॉ. रूचिता खाड़े, जिला सहायक कार्यक्रम प्रबंधक प्रकाश माकोड़े, नर्सिंग ऑफिसर शिखा पंवार, कविता खपरिये, उमंग काउंसलर शिल्पा वर्मा, स्वयंसेवी संस्था प्रदीपन से चारू वर्मा, प्रत्याक्षा से तूलिका पचैरी तथा सुपरवाइजर एनआरएचएम, वार्ड आंगनवाड़ी कार्यकर्ता और एएनएम का मार्गदर्शन रहा।
डॉ. रूचिता खाड़े ने बताया कि आयरन, फोलिक एसिड और विटामिन बी-12 की कमी सहित रक्तस्राव और बढ़ती रक्त की जरूरत एनीमिया के कारण हो सकते हैं। इसके प्रमुख लक्षण थकान, कमजोरी और पीलापन हैं, जबकि गंभीर स्थिति में चक्कर, बेहोशी, पसीना, तेज नब्ज और तेजी से सांस लेने जैसी समस्या हो सकती है। प्रकाश माकोड़े ने भी एनीमिया के लक्षणों की जानकारी दी। शिल्पा वर्मा ने पोषणयुक्त आहार, दूध, फल, हरी पत्तेदार सब्जियां, चुकंदर, शकरकंद और अनाज लेने तथा जंक फूड से बचने की सलाह दी।
चारू वर्मा ने बाल अधिकार, पोषण, लाडो अभियान और गुड टच-बैड टच की जानकारी दी। तूलिका पचैरी ने पॉक्सो एक्ट, साइबर अपराध हेल्पलाइन 1930, डायल 100 और 1090 की जानकारी देते हुए आत्मरक्षा के प्रति निर्भीक रहने के लिए प्रेरित किया।
इस दौरान प्राचार्य व अतिथियों ने उमंग कॉर्नर की शुरुआत की। शिक्षिका शिवरती साहू के मार्गदर्शन में रैपिड-फायर क्विज और खेल शिक्षिका माधुरी पानकर के मार्गदर्शन में रस्सा खींच प्रतियोगिता हुई। संचालन शिक्षक वासुदेव काले ने किया। सरस्वती गायन व स्वागत गीत संगीत शिक्षक राकेश सोनी एवं ओम बालपाण्डे के मार्गदर्शन में छात्राओं ने प्रस्तुत किए। आयोजन में शिक्षक राजेश करौले, शिवप्रसाद मोहबे, सुरेश पानकर, टीना साहू, सुरेश नरवरिया, पी.आर. देशमुख, चारू शुक्ला, सुनंदा उइके, वीरेन्द्र झरबड़े, अशोक कवड़े और करन पंवार का सहयोग रहा।




