बाराबंकी

43 साल पुराने मर्डर केस में आजीवन कारावास की सजा के बाद भी मुजरिम की गिरफ्तारी न होने पर पीड़ित ने लगाई गुहार

पुलिस अधीक्षक कार्यालय पहुंचे रवि शंकर मिश्रा

नेशनल प्रेस टाइम्स, ब्यूरो।

बाराबंकी : जिले में 43 साल पुराने एक सनसनीखेज हत्याकांड के मामले में न्याय की गुहार लेकर पीड़ित परिवार पुलिस अधीक्षक (SP) कार्यालय पहुँचा। पीड़ित रवि शंकर मिश्रा ने आरोप लगाया कि माननीय न्यायालय द्वारा आजीवन कारावास की सजा सुनाए जाने के बावजूद मुजरिम अभी तक पुलिस की गिरफ्त से बाहर है और पुलिस प्रशासन उच्च न्यायालय के आदेशों का पालन करने में असमर्थ नजर आ रहा है। रवि शंकर मिश्रा ने जानकारी देते हुए बताया कि उनके पिता की हत्या 6 मई 1983 को हुई थी। इस मामले में सुनवाई करते हुए सत्र न्यायालय बाराबंकी ने वर्ष 1986 में दोषियों को आजीवन कारावास की सजा सुनाई थी। सजा के खिलाफ अभियुक्तों ने उच्च न्यायालय में पुनरीक्षण याचिका दाखिल की थी, जिसके बाद से मामले में कानूनी प्रक्रिया चल रही थी।पीड़ित का आरोप है कि इस दौरान अभियुक्तों द्वारा लगातार उनका उत्पीड़न किया जाता रहा। जब यह उत्पीड़न बर्दाश्त से बाहर हुआ, तो उन्होंने उच्च न्यायालय की शरण ली और प्राइवेट वकील के माध्यम से मुकदमे की पैरवी तेज कराई।
पीड़ित के मुताबिक, माननीय उच्च न्यायालय द्वारा इस मामले में 3 सितंबर 2026 को जजमेंट जारी किया गया, जिसमें निचली अदालत द्वारा सुनाई गई आजीवन कारावास की सजा को बरकरार रखा गया है।
रवि शंकर मिश्रा ने बताया कि मुजरिम के खिलाफ अपर जिला जज (ADJ) कोर्ट से 21 तारीख को वारंट जारी हुआ था और 22 तारीख को सफदरगंज पुलिस केवल एक बार उसे गिरफ्तार करने गई थी। इसके बाद से पुलिस हाथ पर हाथ धरे बैठी है। पीड़ित का यह भी आरोप है कि जब उन्होंने सफदरगंज थाने के दरोगा (विभूति कुमार द्विवेदी) से बात की, तो दरोगा ने कथित तौर पर लापरवाही भरे अंदाज में कहा कि “मुजरिम मिल नहीं रहा है, आप जहाँ कहें फाँसी लगा लूँ या आत्महत्या कर लूँ।”पीड़ित पक्ष का कहना है कि उच्च न्यायालय की डिविजन बेंच के आदेशों का सफदरगंज पुलिस द्वारा कड़ाई से पालन नहीं किया जा रहा है। पीड़ित ने पुलिस अधीक्षक महोदय और संबंधित न्यायालय से यह पुरजोर मांग की है कि मुजरिम को जल्द से जल्द गिरफ्तार किया जाए, उसे जेल की सलाखों के पीछे डाला जाए और अदालत के आदेशों का अक्षरशः पालन सुनिश्चित करते हुए पीड़ित परिवार को न्याय दिलाया जाए।
पीड़ित पक्ष का कहना है कि उच्च न्यायालय की डिविजन बेंच के आदेशों का सफदरगंज पुलिस द्वारा कड़ाई से पालन नहीं किया जा रहा है। पीड़ित द्वारा पुलिस अधीक्षक महोदय को प्रार्थना पत्र दिए जाने के दबाव के बाद आखिरकार मुजरिम ने कोर्ट में आत्मसमर्पण दे दी है।
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