बांस – टीना से ढके भवन में पढ़ने को मजबूर 380 छात्र-छात्राएं, पेयजल और शौचालय तक की सुविधा नहीं
380 students forced to study in a structure covered with bamboo and tin sheets; lacking even basic amenities like drinking water and toilets.

नेशनल प्रेस टाइम्स ब्यूरो।
पाकुड़ प्रखण्ड अन्तर्गत मदन मोहनपुर पंचायत स्थित मदरसा मजहारुल उलूम में करीब 380 छात्र-छात्राएं शिक्षा ग्रहण कर रहे हैं। बड़ी संख्या में विद्यार्थियों के भविष्य से जुड़े इस शिक्षण संस्थान में बुनियादी सुविधाओं का अभाव बना हुआ है। मदरसे का भवन काफी पुराना और जर्जर स्थिति में है। भवन की छत को किसी तरह बांस और टीन से ढककर काम चलाया जा रहा है। ऐसे में विद्यार्थियों को असुविधाजनक परिस्थितियों में पढ़ाई करने को मजबूर होना पड़ रहा है। मदरसे में शौचालय और पेयजल जैसी मूलभूत सुविधाओं का भी अभाव है। विद्यार्थियों के लिए पेयजल की व्यवस्था के तहत चापाकल तक उपलब्ध नहीं है। शिक्षा के मौजूदा दौर में जहां शैक्षणिक संस्थानों में आधारभूत सुविधाओं के विकास पर जोर दिया जा रहा है, वही 380 छात्र-छात्राओं वाले इस मदरसे की स्थिति चिंता का विषय बनी हुई है। स्थानीय लोगों और अभिभावकों का कहना है कि जर्जर भवन में बच्चों की पढ़ाई होने से उनकी सुरक्षा को लेकर भी चिंता बनी रहती है। उनका कहना है कि मदरसे में अध्ययनरत विद्यार्थियों को बेहतर एवं सुरक्षित शैक्षणिक वातावरण उपलब्ध कराने के लिए भवन निर्माण के साथ-साथ शौचालय और पेयजल की समुचित व्यवस्था किया जाना आवश्यक है। मदरसा संचालकों के मुताबिक, पाकुड़ के पूर्व उपायुक्त मनीष कुमार के कार्यकाल में मदरसे के भवन निर्माण की दिशा में पहल की गई थी। संचालकों का कहना है कि उनके स्थानांतरण के बाद इस दिशा में अब तक कोई ठोस पहल नहीं हो सकी है। इसके कारण नये भवन निर्माण की उम्मीद अब भी अधूरी है। मदरसा प्रबंधन एवं स्थानीय लोगों को अब जिला प्रशासन से इस दिशा में आवश्यक पहल की उम्मीद है। लोगों का कहना है कि वर्तमान उपायुक्त मेघा भारद्वाज मामले का संज्ञान लेते हुए मदरसा परिसर का निरीक्षण कराकर नए भवन के निर्माण, शौचालय की सुविधा तथा विद्यार्थियों के लिए शुद्ध पेयजल उपलब्ध कराने के लिए चापाकल स्थापित कराने की दिशा में आवश्यक कार्रवाई करे। स्थानीय लोगों का कहना है कि यदि मदरसे में भवन, शौचालय और पेयजल जैसी बुनियादी सुविधाएं उपलब्ध हो जाएं तो यहां पढ़ने वाले सैकड़ों छात्र-छात्राओं को सुरक्षित, स्वच्छ और बेहतर शैक्षणिक माहौल मिल सकेगा।



