सिंगरौली

मुआवजे के बिना आदिवासियों को उजाड़ने का आरोप

ग्रामीणों ने रोका टीएचडीसी का कोयला परिवहन

अमिलिया कोल माइंस के खिलाफ महिलाओं ने भी संभाला मोर्चा, कंपनी ने कहा—एक सप्ताह में पात्र प्रभावितों को मिलेगा विस्थापन का लाभ
नेशनल प्रेस टाइम्स, ब्यूरो।
सिंगरौली। जिले की टीएचडीसी अमिलिया कोल माइंस में मुआवजे और विस्थापन का लाभ नहीं मिलने से नाराज ग्रामीणों ने कोयला परिवहन रोककर प्रदर्शन किया। आंदोलन में महिलाएं भी शामिल रहीं, जो लाठी-डंडे लेकर कोयला परिवहन करने वाले वाहनों के सामने खड़ी हो गईं। ग्रामीणों का आरोप है कि करीब पांच साल से कोयला उत्पादन होने के बावजूद प्रभावित परिवारों को उनका उचित हक नहीं मिला है। वहीं, कंपनी प्रबंधन ने दावा किया है कि अधिकांश प्रभावितों को लाभ दिया जा चुका है और शेष पात्र लोगों को एक सप्ताह के भीतर भुगतान किया जाएगा।
ब्लास्टिंग से मकानों में दरारें, प्रदूषण से परेशानी
प्रभावित ग्रामीणों का कहना है कि खदान के आसपास रहने वाले परिवार ब्लास्टिंग और प्रदूषण से परेशान हैं। खदान के नजदीक स्थित मकानों में दरारें आने और घरों तक प्रदूषण पहुंचने की शिकायतें भी सामने आई हैं। ग्रामीणों का आरोप है कि इसके बावजूद उन्हें उचित मुआवजा और अन्य सहायता नहीं मिली।
संपत्तिया देवी ने आरोप लगाया कि आंदोलन करने पर कंपनी के लोग पुलिस बुलाकर जेल भिजवाने की धमकी देते हैं। ग्रामीणों का कहना है कि कोयला खनन के कारण उनकी जमीन और जंगल प्रभावित हुए हैं, जिन पर वे पहले आजीविका के लिए निर्भर थे। अब वे उचित क्षतिपूर्ति और पुनर्वास का लाभ मिलने के बाद दूसरी जगह बसकर जीवनयापन करना चाहते हैं।
कंपनी बोली—प्रशासन के खाते में जमा कराई राशि
टीएचडीसी के उपप्रबंधक एसएस गोस्वामी ने कहा कि सभी ग्रामीणों को विस्थापन का लाभ दिया जा चुका है, जबकि कुछ लोग अभी शेष हैं। कंपनी ने जिला प्रशासन के खाते में राशि जमा करा दी है। उन्होंने दावा किया कि एक सप्ताह के भीतर सभी पात्र प्रभावितों को विस्थापन का लाभ मिल जाएगा।गोस्वामी के अनुसार, ग्रामीणों द्वारा लगातार कोयला परिवहन और उत्पादन रोकने से कोयले पर निर्भर बिजली संयंत्रों के संचालन में दिक्कतें आ रही हैं। उन्होंने यह भी कहा कि स्थानीय लोगों से बातचीत करने में परेशानी हो रही है।
पांच साल से जारी है कोयला उत्पादन
अमिलिया परियोजना में आदित्य बिड़ला समूह के साथ संयुक्त उद्यम के तहत कोयला खनन किया जा रहा है। परियोजना के कोल ब्लॉक में पिडरवाह, बोदराटोला और बाणीझरिया क्षेत्र शामिल हैं। यहां करीब पांच साल से कोयला उत्पादन जारी है। इसके बावजूद विस्थापन और मुआवजे के लाभ को लेकर ग्रामीणों और कंपनी प्रबंधन के बीच विवाद बना हुआ है।
फिलहाल ग्रामीण उचित मुआवजे और पुनर्वास की मांग पर अड़े हैं। अब देखना होगा कि कंपनी और जिला प्रशासन के स्तर पर इस विवाद का समाधान कब तक निकलता है और प्रभावित परिवारों को उनका लंबित लाभ कब मिलता है।
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