गोड्डा

गोड्डा के भटौंदा में प्रस्तावित माइनिंग के खिलाफ फूटा ग्रामीणों का गुस्सा

जान दे देंगे, लेकिन पुश्तैनी जमीन नहीं देंगे

नेशनल प्रेस टाइम्स, ब्यूरो।
गोड्डा। जिले के पोड़ैयाहाट प्रखंड अंतर्गत भटौंदा गांव में प्रस्तावित माइनिंग परियोजना के विरोध में स्थानीय आदिवासियों और ग्रामीणों का आक्रोश खुलकर सामने आ गया है। कथित DBL कंपनी की इस प्रस्तावित माइनिंग के खिलाफ सैकड़ों की संख्या में आदिवासी महिला, पुरुष, युवा और बुजुर्ग एकजुट होकर विरोध प्रदर्शन कर रहे हैं। ग्रामीणों ने दो-ूक साफ शब्दों में चेतावनी दी है कि वे किसी भी कीमत पर अपनी पुश्तैनी और जमाबंदी जमीन खदान के लिए नहीं देंगे।
क्या है पूरा मामला
भटौंदा गांव के ग्रामीणों का मुख्य जीवनयापन कृषि और पशुपालन पर आधारित है। ग्रामीणों का कहना है कि जिस जमीन पर माइनिंग की योजना बनाई जा रही है, वह उनकी उपजाऊ पुश्तैनी और जमाबंदी जमीन है। इसी भूमि पर धान की खेती होती है, मवेशी चरते हैं और क्षेत्र के सैकड़ों परिवारों की आजीविका पूरी तरह इसी पर निर्भर है। यदि यह जमीन छिन जाती है, तो इन परिवारों के सामने भुखमरी और पलायन का संकट खड़ा हो जाएगा।
पर्यावरण और आजीविका का संकट : ग्रामीणों का आरोप है कि नई माइनिंग से न केवल उनकी खेती और चरागाह नष्ट होंगे, बल्कि पूरे क्षेत्र का पर्यावरण भी गंभीर रूप से प्रभावित होगा। प्रदर्शन के दौरान ग्रामीणों ने क्षेत्र में पहले से हो चुकी माइनिंग के बाद छोड़ी गई गहरी और खतरनाक खाइयों को दिखाया। उन्होंने सवाल उठाया कि इन खुली और गहरी खाइयों के कारण हमेशा मवेशियों और बच्चों के जान का खतरा बना रहता है, जिसकी सुधि लेने वाला कोई नहीं है। ग्रामीणों का सवाल है कि क्या आदिवासियों और किसानों की कीमत पर ही तथाकथित विकास को गति दी जाएगी? जल, जंगल और जमीन ही आदिवासियों की मूल पहचान है, जिसपर कुठाराघात बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।
सरकार और प्रशासन से तीखे सवाल : इस विरोध प्रदर्शन के बाद अब सबसे बड़ा राजनीतिक और सामाजिक सवाल यह उठ खड़ा हुआ है कि क्या जल-जंगल-जमीन की रक्षा का दावा करने वाली झारखंड सरकार इन गरीब परिवारों की पुश्तैनी जमीन और आजीविका की रक्षा कर पाएगी? क्या जिला प्रशासन इस पूरी माइनिंग पट्टे की प्रक्रिया में पारदर्शिता बरतेगा और प्रभावित रैयतों के कानूनी अधिकारों की रक्षा सुनिश्चित करेगा?
ग्रामीणों की मांगें : भटौंदा गांव में प्रस्तावित DBL कंपनी की माइनिंग प्रक्रिया को तत्काल प्रभाव से रोका जाए। माइनिंग पट्टे के आवंटन और पूरी प्रक्रिया की उच्चस्तरीय और निष्पक्ष जांच हो। रैयतों के कानूनी और संवैधानिक अधिकारों की पूरी सुरक्षा सुनिश्चित की जाए।
ग्रामीणों ने दो-ूक चेतावनी दी है कि यदि उनकी मांगों पर जल्द ध्यान नहीं दिया गया, तो वे इस आंदोलन को और अधिक उग्र करने के लिए बाध्य होंगे।
Show More

Related Articles

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Back to top button