बरेली
डीपीडीपी एक्ट में पत्रकारिता के लिए स्पष्ट छूट जरूरी : जेसीआई
डिजिटल न्यूज पब्लिशर्स एसोसिएशन की SC में याचिका का समर्थन

नेशनल प्रेस टाइम्स, ब्यूरो
बरेली । डिजिटल व्यक्तिगत डेटा संरक्षण अधिनियम, 2023 में पत्रकारिता के लिए स्पष्ट छूट नहीं होने पर जर्नलिस्ट काउंसिल ऑफ इंडिया (जेसीआई) ने चिंता जताई है। जेसीआई ने डिजिटल न्यूज पब्लिशर्स एसोसिएशन (DNPA) द्वारा सुप्रीम कोर्ट में दायर याचिका का समर्थन करते हुए कानून में पत्रकारिता छूट को स्पष्ट रूप से शामिल करने की मांग की है।
जेसीआई के राष्ट्रीय अध्यक्ष डॉ. अनुराग सक्सेना ने कहा कि स्पष्ट कानूनी छूट के अभाव में खोजी पत्रकारिता और जनहित की रिपोर्टिंग प्रभावित हो सकती है। भ्रष्टाचार, प्रशासनिक अनियमितताओं जैसे मामलों में कई बार व्यक्तिगत या संवेदनशील जानकारी का उपयोग जरूरी होता है। यदि हर जानकारी के लिए पहले सहमति लेना अनिवार्य हुआ तो जनहित के तथ्य सामने लाने में व्यावहारिक दिक्कत आएगी। जेसीआई ने मांग की है कि डीपीडीपी एक्ट की धारा 17 में Journalistic Exemption को फिर से शामिल किया जाए, जो पूर्व के मसौदे में प्रस्तावित थी।
स्रोतों की गोपनीयता पर चिंता
डॉ. सक्सेना ने धारा 36 के तहत सरकार को जानकारी मांगने की शक्तियों पर भी सवाल उठाया। उन्होंने कहा कि समाचार स्रोतों की गोपनीयता स्वतंत्र पत्रकारिता की बुनियाद है और उसकी सुरक्षा के लिए कानूनी संरक्षण जरूरी है। संगठन ने आरटीआई एक्ट की धारा 8(1)(जे) में पूर्ववर्ती व्यवस्था बहाल करने और डीपीडीपी एक्ट की धारा 44(3) के प्रभावों की समीक्षा की भी मांग की, ताकि निजता की सुरक्षा और नागरिकों की सूचना तक पहुंच के बीच संतुलन बना रहे।
17 नवंबर की सुनवाई पर नजर
जेसीआई ने सुप्रीम कोर्ट से आग्रह किया है कि 17 नवंबर की आगामी सुनवाई में प्रेस की स्वतंत्रता, खोजी पत्रकारिता, स्रोतों की गोपनीयता और जनहित में सूचना के अधिकार जैसे पहलुओं पर भी विचार किया जाए।
डॉ. सक्सेना ने बताया कि जेसीआई इस मामले में इंटरवेंशन एप्लीकेशन दायर करने पर भी विचार कर रहा है। उन्होंने कहा कि डेटा संरक्षण कानून में निजता और प्रेस की स्वतंत्रता के बीच संतुलन बनाना लोकतंत्र के लिए जरूरी है।



