बालाघाट

बालाघाट में शराब कारोबार पर माफिया का शिकंजा 

नकली शराब और प्रिंट रेट से अधिक वसूली के आरोपों ने खोली व्यवस्था की पोल

सफेदपोश कारोबारियों और कथित राजनीतिक-प्रशासनिक संरक्षण की निष्पक्ष जांच की मांग; इंद्रजीत भोज ने दी उग्र आंदोलन की चेतावनी

नेशनल प्रेस टाइम्स, ब्यूरो 

बालाघाट। जिले में शराब कारोबार को लेकर एक बार फिर सवालों का तूफान खड़ा हो गया है। नकली शराब की कथित बिक्री, शराब दुकानों पर निर्धारित प्रिंट रेट से अधिक कीमत वसूलने और कारोबार में प्रभावशाली लोगों की मनमानी के आरोपों ने आबकारी विभाग की निगरानी व्यवस्था को कठघरे में खड़ा कर दिया है। सवाल यह है कि यदि शराब कारोबार में खुलेआम नियमों की अनदेखी हो रही है, तो जिम्मेदार विभाग आखिर किसकी प्रतीक्षा कर रहे हैं?

आरोप लगाए जा रहे हैं कि जिले में कुछ रसूखदार और सफेदपोश शराब कारोबारी अपने प्रभाव के दम पर कथित तौर पर मनमानी कर रहे हैं। शराब दुकानों पर निर्धारित प्रिंट रेट से अधिक राशि वसूलने की शिकायतें आम उपभोक्ताओं के आर्थिक शोषण का मामला बन रही हैं। वहीं, नकली शराब की बिक्री के आरोप इससे भी अधिक गंभीर हैं, क्योंकि ऐसी शराब का सेवन लोगों की जान के लिए खतरा बन सकता है।

मामले में कथित राजनीतिक रसूख और कुछ प्रशासनिक अधिकारियों के संरक्षण की आशंकाएं भी उठाई जा रही हैं। हालांकि इन आरोपों की आधिकारिक पुष्टि होना बाकी है, लेकिन इनकी गंभीरता को देखते हुए केवल औपचारिक जांच पर्याप्त नहीं होगी। शराब के स्रोत, आपूर्ति नेटवर्क, लाइसेंसधारियों की भूमिका, दुकानों के बिक्री रिकॉर्ड और निर्धारित दरों से अधिक वसूली की शिकायतों की गहन जांच जरूरी है। साथ ही यह भी स्पष्ट होना चाहिए कि कहीं किसी प्रभावशाली व्यक्ति के दबाव में कार्रवाई तो नहीं रोकी जा रही है।

मध्यप्रदेश श्रमजीवी पत्रकार संघ के अध्यक्ष इंद्रजीत भोज ने इस पूरे मामले पर कड़ा रुख अपनाते हुए कहा कि शराब के नाम पर कथित लूट और अवैध गतिविधियों को किसी भी कीमत पर बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। उन्होंने मांग की कि नकली शराब की बिक्री, प्रिंट रेट से अधिक वसूली और कथित शराब माफिया के नेटवर्क की निष्पक्ष जांच कर दोषियों के खिलाफ कठोर कार्रवाई की जाए।

भोज ने स्पष्ट चेतावनी दी कि जांच का दायरा केवल छोटे कर्मचारियों और दुकानों तक सीमित नहीं रहना चाहिए, बल्कि कारोबार से जुड़े प्रभावशाली चेहरों तथा कथित संरक्षण देने वालों की भूमिका भी जांची जानी चाहिए। यदि संबंधित विभागों ने समय रहते ठोस कार्रवाई नहीं की, तो इस मुद्दे को लेकर व्यापक और उग्र आंदोलन किया जाएगा।

अब आबकारी विभाग और जिला प्रशासन के सामने जवाबदेही की चुनौती है। क्या जिले की शराब दुकानों पर निर्धारित दरों से अधिक वसूली की जांच होगी? क्या शराब की गुणवत्ता और आपूर्ति श्रृंखला का परीक्षण कराया जाएगा? क्या कथित माफिया नेटवर्क और उसे संरक्षण देने वालों की भूमिका उजागर होगी? या फिर यह मामला भी शिकायतों और आश्वासनों के बीच दबकर रह जाएगा? बालाघाट की जनता अब केवल कार्रवाई के दावे नहीं, बल्कि जांच के नतीजे और दोषियों पर ठोस कार्रवाई देखना चाहती है।

Show More

Related Articles

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Back to top button