पर्यटन और चारधाम यात्रा के नाम पर साइबर ठगों से बचने की डीआईजी मेरठ ने जारी की चेतावनी
नेशनल प्रेस टाइम्स, ब्यूरो
मेरठ। ग्रीष्मकालीन अवकाश के दौरान पर्यटन स्थलों पर बढ़ती भीड़ और उत्तराखंड में शुरू हो चुकी चारधाम यात्रा के बीच साइबर अपराधियों की सक्रियता भी तेज हो गई है। इसको लेकर मेरठ रेंज के पुलिस उप महानिरीक्षक कलानिधि नैथानी ने पर्यटकों और श्रद्धालुओं को सतर्क रहने की अपील की है। उन्होंने कहा कि फर्जी वेबसाइट, सोशल मीडिया विज्ञापनों और हेलीकॉप्टर बुकिंग के नाम पर बड़े स्तर पर ऑनलाइन ठगी की घटनाएं सामने आ रही हैं, जिनमें कई लोग अपनी मेहनत की कमाई गंवा चुके हैं।
डीआईजी ने बताया कि साइबर ठग बेहद शातिर तरीके से सरकारी या अधिकृत वेबसाइट जैसी दिखने वाली फर्जी वेबसाइट तैयार करते हैं। ये वेबसाइट नाम और डिजाइन में इतनी मिलती-जुलती होती हैं कि आम व्यक्ति आसानी से धोखा खा जाता है। इसके बाद ठग सर्च इंजन और सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स पर विज्ञापन देकर इन वेबसाइट्स को ऊपर दिखाते हैं, जिससे लोग उन पर क्लिक कर बैठते हैं।
उन्होंने बताया कि खासतौर पर चारधाम यात्रा के लिए हेलीकॉप्टर बुकिंग के नाम पर ठगी का ट्रेंड तेजी से बढ़ा है। इस संबंध में इंडियन साइबर क्राइम कोआरडिनेशन सेंटर द्वारा भी अलर्ट जारी किया गया है। ठग “वीआईपी दर्शन”, “लास्ट सीट उपलब्ध” या “30 प्रतिशत डिस्काउंट” जैसे आकर्षक ऑफर देकर लोगों को तुरंत भुगतान करने के लिए प्रेरित करते हैं। कई मामलों में फर्जी आईडी कार्ड और नकली ट्रैवल एजेंट बनकर लोगों का विश्वास जीता जाता है।
प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि उत्तराखंड सरकार द्वारा चारधाम हेलीकॉप्टर बुकिंग के लिए केवल आईआरटीसी के आधिकारिक पोर्टल को ही अधिकृत किया गया है। इसके अलावा पर्यटन विभाग ने एक व्हाट्सएप नंबर 8394833833 जारी किया है, जिस पर यात्रा संदेश भेजकर श्रद्धालु पंजीकरण और अन्य महत्वपूर्ण जानकारी प्राप्त कर सकते हैं। इसके अलावा किसी भी अन्य वेबसाइट या लिंक से बुकिंग करना जोखिम भरा हो सकता है।
साइबर ठगों के तौर-तरीकों पर प्रकाश डालते हुए डीआईजी ने बताया कि ये अपराधी पहले लोगों को विज्ञापन या लिंक के माध्यम से अपने जाल में फंसाते हैं। इसके बाद व्हाट्सएप या फोन कॉल के जरिए संपर्क कर खुद को अधिकृत एजेंट बताते हैं। वे समूह बुकिंग पर सस्ते पैकेज, त्वरित टिकट और विशेष सुविधाओं का लालच देते हैं। भुगतान के लिए वे फर्जी न्च्प् आईडी या फत् कोड साझा करते हैं, जिन पर पैसे ट्रांसफर करने के बाद या तो फर्जी टिकट भेज दिया जाता है या फिर संपर्क पूरी तरह समाप्त कर दिया जाता है।
इस बढ़ती समस्या को देखते हुए मेरठ रेंज पुलिस को भी आवश्यक दिशा-निर्देश जारी किए गए हैं। पुलिस को निर्देश दिए गए हैं कि आमजन को जागरूक करने के लिए व्यापक स्तर पर अभियान चलाया जाए, ताकि लोग केवल अधिकृत पोर्टल से ही बुकिंग करें। साथ ही, फ्रॉड में इस्तेमाल हो रहे मोबाइल नंबर, व्हाट्सएप अकाउंट, सोशल मीडिया आईडी और बैंक खातों की जानकारी जुटाकर उनके खिलाफ कार्रवाई की जाए।
डीआईजी ने यह भी बताया कि यदि कोई व्यक्ति ठगी का शिकार हो जाता है और घटना किसी अन्य राज्य, जैसे उत्तराखंड में हुई हो, तो वह अपने नजदीकी थाने में ई-जीरो एफआईआर दर्ज करा सकता है। इसके बाद मामले को संबंधित राज्य में स्थानांतरित किया जा सकता है। इसके अलावा संबंधित बैंक खातों और न्च्प् आईडी को तत्काल फ्रीज कराने के भी निर्देश दिए गए हैं। फर्जी सोशल मीडिया विज्ञापनों को हटवाने और संदिग्ध वेबसाइट्स को ब्लॉक कराने के लिए भी कार्रवाई तेज की जा रही है।
जनसामान्य को सलाह देते हुए डीआईजी ने कहा कि यात्रा की योजना बनाते समय केवल सरकारी या अधिकृत वेबसाइट्स का ही उपयोग करें और किसी भी अनजान लिंक या ऑफर पर भरोसा न करें। वेबसाइट का न्त्स् ध्यानपूर्वक जांचें और भुगतान से पहले उसकी प्रमाणिकता सुनिश्चित करें। उन्होंने कहा कि व्हाट्सएप या सोशल मीडिया के माध्यम से आने वाले ऑफर्स से विशेष सतर्कता बरतें।
उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि किसी भी परिस्थिति में अपना व्ज्च्, बैंक विवरण या अन्य व्यक्तिगत जानकारी किसी अज्ञात व्यक्ति के साथ साझा न करें। यदि किसी प्रकार की संदिग्ध गतिविधि नजर आए तो उसे नजरअंदाज न करें और तुरंत इसकी सूचना पुलिस को दें।
अंत में उन्होंने कहा कि यदि कोई व्यक्ति साइबर ठगी का शिकार होता है, तो वह तुरंत 1930 हेल्पलाइन नंबर पर कॉल करे या बलइमतबतपउम.हवअ.पद पर ऑनलाइन शिकायत दर्ज करे। समय पर शिकायत करने से ठगी गई धनराशि को वापस पाने की संभावना बढ़ जाती है।
प्रशासन ने आमजन से अपील की है कि वे सतर्क रहें और सुरक्षित यात्रा के लिए केवल आधिकारिक माध्यमों का ही सहारा लें। सावधानी और जागरूकता ही साइबर अपराध से बचाव का सबसे प्रभावी उपाय है।



