गाजियाबाद

लोनी में 100 करोड़ के विकास कार्यों का आगाज़

रंजीता धामा को एक साल बाद क्यों याद आया राष्ट्रीय लोकदल?

जयंत चौधरी की सक्रियता के बाद बदले लोनी के सियासी संकेत

नेशनल प्रेस टाइम्स, ब्यूरो

लोनी, गाजियाबाद : लोनी नगर पालिका अध्यक्ष रंजीता धामा ने बुधवार को विभिन्न विकास कार्यों का शुभारंभ करते हुए क्षेत्र में करीब 100 करोड़ रुपये की विकास परियोजनाओं की शुरुआत की। इस दौरान कॉलोनी वासियों ने फूलमालाओं, ढोल-नगाड़ों और पुष्पवर्षा के साथ उनका स्वागत किया।
रंजीता धामा ने बताया कि वार्ड संख्या 33 की डीएलएफ कॉलोनी में लगभग 91 लाख रुपये की लागत से तीन पार्कों का सौंदर्यीकरण और चारदीवारी का निर्माण कराया जाएगा। इसके साथ नगर पालिका की ओर से पेड़-पौधों की व्यवस्था भी की जाएगी।
इसके अलावा वार्ड 44 के कासिम विहार और खुशहाल पार्क कॉलोनी में करोड़ों रुपये की लागत से विकास कार्यों का शुभारंभ किया गया। वहीं वार्ड 33 स्थित डाबर तालाब क्षेत्र में करीब डेढ़ करोड़ रुपये की लागत से इंटरलॉकिंग टाइल्स और आरसीसी नालियों के निर्माण कार्य का उद्घाटन किया गया।
रंजीता धामा ने कहा कि लोनी नगर पालिका की ओर से लगभग 100 करोड़ रुपये की लागत से जनहित में विकास परियोजनाएं तैयार की गई हैं, जिनका शुभारंभ आज से किया गया है। उन्होंने दावा किया कि आने वाले समय में लोनी की जनता को विकास कार्यों का लाभ मिलेगा।
हालांकि विकास कार्यों के साथ इस कार्यक्रम ने राजनीतिक हलकों में भी चर्चा तेज कर दी। वजह रही कि रंजीता धामा की ओर से जारी प्रेस विज्ञप्ति में पहली बार खुद को ‘राष्ट्रीय लोकदल की लोनी नगर पालिका अध्यक्ष’ बताया गया। पिछले एक वर्ष में उनके कार्यक्रमों और सार्वजनिक गतिविधियों में राष्ट्रीय लोकदल का नाम लगभग नदारद रहा था, जिससे संगठन और कार्यकर्ताओं के बीच सवाल उठ रहे थे।
स्थानीय स्तर पर यह चर्चा लंबे समय से चल रही थी कि चुनाव जीतने के बाद रंजीता धामा ने राष्ट्रीय लोकदल के संगठनात्मक कार्यक्रमों से दूरी बनाए रखी और पार्टी गतिविधियों में खास रुचि नहीं दिखाई। इसे लेकर क्षेत्र में राष्ट्रीय लोकदल के कार्यकर्ताओं के बीच असंतोष और सुगबुगाहट भी देखी जा रही थी।
राजनीतिक जानकारों का मानना है कि पश्चिमी उत्तर प्रदेश में रालोद प्रमुख जयंत चौधरी की बढ़ती सक्रियता और संगठन को मजबूत करने के प्रयासों के बाद स्थानीय नेताओं पर भी पार्टी से जुड़ाव दिखाने का दबाव बढ़ा है। ऐसे में एक साल बाद प्रेस विज्ञप्ति में राष्ट्रीय लोकदल का उल्लेख किया जाना महज औपचारिकता नहीं, बल्कि एक राजनीतिक संदेश माना जा रहा है।
अब सवाल यह है कि क्या रंजीता धामा वास्तव में राष्ट्रीय लोकदल के साथ सक्रिय भूमिका निभाने जा रही हैं या फिर यह बदलते राजनीतिक समीकरणों के बीच खुद को पार्टी लाइन के करीब दिखाने की रणनीति है। फिलहाल, लोनी में विकास कार्यों के साथ यह सियासी बदलाव भी चर्चा का केंद्र बना हुआ है।

 

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