भरत पुर
सुहागिन महिलाओं ने अखण्ड सौभाग्य की कामना को लेकर रखा वट सावित्री व्रत
16 मई शनिवार को शनि अमावस्या के दुर्लभ संयोग में की बरगद के वृक्ष की पूजा

बरगद के वृक्ष की परिक्रमा कर सुनी कहानी
नेशनल प्रेस टाइम्स,ब्यूरो।
भुसावर : भरतपुर जिले के ऐतिहासिक भुसावर सहित उपखण्ड मुख्यालय में आज शनिवार को ज्येष्ठ माह की अमावस्या तिथी को मनाया जाने वाला वट सावित्री व्रत इस बार 2026 में 16 मई शनिवार को रखा गया। वहीं इस दिन शनि अमावस्या पढ़ने से शनि अमावस्या का विशेष संयोग में बरगद के वृक्ष की पूजा अर्चना कर मनोकामनाएं मांगी गई।जहां कस्बे के प्रमुख कोठी वाले हनुमान जी मन्दिर,भगतराज वाले हनुमान जी मन्दिर, बरपाडा कॉलोनी, रामद्वारा शिव हनुमान जी मन्दिर आदि सहित विभिन्न स्थानों पर सुबह से ही महिलाओं ने रंग बिरंगे परिधान पहन कर सामुहिक रुप में पहुंच कर पूजा अर्चना की गई। जहां सुहागिन महिलाओं ने अपने पति की लम्बी उम्र और सुखी दाम्पत्य जीवन के लिए वट वृक्ष यानि बरगद के पेड़ की शुभ मुहुर्त में पूजा करते हुए वट वृक्ष की जड़ में जल चढ़ाकर सात, 28, 108 परिक्रमा कर निर्जला व्रत रखकर कहानी सुन कर अपने से बडी महिलाओं के पैर छूकर आशीर्वाद लिया। वहीं पुष्पेंद्र शर्मा, राघवेंद्र जती, महेश शर्मा पंडितों ने बताया कि पंचांग के अनुसार ज्येष्ठ अमावस्या तिथी 16 मई को सुबह 03 बजकर 51 मिनट से शुरु होकर रात 01 बजकर 37 मिनट तक रहेगी।
“वट वृक्ष की पूजा के लिए सामग्री”
सुहागिन महिलाए पति की लम्बी उम्र और सुखी दामपत्य जीवन के लिए वट वृक्ष यानी बरगद की पूजा के लिए रंग बिरंगे परिधानों में सज संवरकर तांवे का लोटा,गंगाजल,रोली,चावल,कलावा, कच्चा सूत,अगरबत्ती,घी दीपक,लाल पीले फूल,भीगे काले चने,फल,मिठाई,केले के पत्ते,मिट्टी का घड़ा और श्रंगार का समान अर्पित कर मनोकामनाएं मांगी गई।
“” क्यों खास है वट वृक्ष की पूजा””
महिला श्रद्वालु लक्ष्मी जती,चंचल शर्मा,ममता ने जानकारी देते हुए बताया कि माता सावित्री ने अपने तप के बल पर यमराज से अपने पति सत्यवान के प्राण वट वृक्ष के नीचे ही वापस लिए थे।बरगद की जड़ में ब्रह्मा जी, तने में भगवान विष्णु और बरगद की शाखाओं में भगवान शिव का वास माना जाता है। इसलिए इस दिन वट वृक्ष की पूजा और परिक्रमा करने से अखंण्ड सौभाग्य और पति की दीर्घायु का आशीर्वाद मिलता है।



