किसानों की समस्याओं को लेकर 25 सूत्री मांगों का ज्ञापन, राज्य सरकार से त्वरित कार्रवाई की अपील
A 25-point memorandum of demands regarding farmers' problems, appealing to the state government for immediate action

नेशनल प्रेस टाइम्स ब्यूरो।
पाकुड़। जिले के पाकुड़िया प्रखंड क्षेत्र के किसानों एवं ग्रामीण हितों से जुड़ी विभिन्न समस्याओं को लेकर 25 सूत्री मांगों का विस्तृत ज्ञापन तैयार कर राज्य सरकार से त्वरित एवं प्रभावी कार्रवाई की मांग की गई है। ज्ञापन में किसानों के हितों को प्राथमिकता देते हुए धान के न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) को 3200 रुपए प्रति क्विंटल करने की मांग की गई है। साथ ही धान के बकाया भुगतान को अविलंब सुनिश्चित करने का आग्रह किया गया है। बेमौसम बारिश और ओलावृष्टि से हुए फसल नुकसान का जमीनी सर्वेक्षण कर वास्तविक मुआवजा देने की मांग भी प्रमुख रूप से उठाई गई है। इसके अलावा किसानों को समय पर सब्सिडी पर खाद, बीज एवं कृषि उपकरण उपलब्ध कराने, सिंचाई व्यवस्था को सुदृढ़ करने, कोल्ड स्टोरेज एवं प्रोसेसिंग इकाइयों की स्थापना, फसल एवं पशुधन बीमा योजना की बाधाएं दूर करने तथा निःशुल्क बिजली एवं 450 रुपए में गैस सिलेंडर उपलब्ध कराने की मांग शामिल है। ज्ञापन में पूर्ववर्ती मुख्यमंत्री आशीर्वाद योजना को पुनः शुरू करने, किसान ऋण माफी योजना के वास्तविक लाभार्थियों की समीक्षा करने तथा किसानों को आधुनिक कृषि तकनीकों के प्रति जागरूक करने पर भी जोर दिया गया है। स्थानीय स्तर पर ग्रामीण विकास से जुड़ी मांगों में “माईया सम्मान योजना” के लाभुकों को पेंशन भुगतान, पंचायत प्रतिनिधियों एवं कर्मियों के मानदेय में वृद्धि, आंगनबाड़ी सेविका-सहायिका, जल सहिया, रसोईया सहित विभिन्न कर्मियों के मानदेय में बढ़ोतरी की बात कही गई है। साथ ही ग्रामीण क्षेत्रों में बंद पड़े चापाकलों की मरम्मती, जलमीनारों को चालू कर “हर घर जल” योजना को प्रभावी बनाने, सभी गांवों में स्ट्रीट लाइट लगाने, दिव्यांगजनों को ट्राईसाइकिल उपलब्ध कराने तथा वृद्धा, विधवा एवं दिव्यांग पेंशन का नियमित भुगतान सुनिश्चित करने की मांग भी की गई है। ज्ञापन में यह भी कहा गया है कि वर्षों से रिक्त पड़े चतुर्थवर्गीय पदों पर शीघ्र नियुक्ति की जाए ताकि प्रशासनिक कार्यों में सुधार हो सके। अंत में राज्य सरकार से आग्रह किया गया है कि इन सभी मांगों पर गंभीरता से संज्ञान लेते हुए किसानों एवं ग्रामीणों के हित में आवश्यक ठोस कदम उठाए जाएं, ताकि उनकी समस्याओं का शीघ्र समाधान हो सके।



