साहेबगंज

शेरशाहबादी समाज का आंदोलन 16वें दिन भी जारी, धरनास्थल पर पहुंचे पूर्व विधायक अकिल अख्तर

The agitation of the Sher Shahabadi community continues for the 16th day, former MLA Akil Akhtar reached the protest site.

नेशनल प्रेस टाइम्स ब्यूरो।
बरहरवा, साहिबगंज। शेरशाहबादी जाति प्रमाण पत्र पुनः जारी करने की मांग को लेकर बरहरवा प्रखंड सह अंचल कार्यालय परिसर में चल रहा अनिश्चितकालीन महाधरना सोमवार को 16वें दिन भी जारी रहा। आंदोलन के 16वें दिन बड़ी संख्या में छात्राओं की भागीदारी ने आंदोलन को नई ऊर्जा और मजबूती प्रदान की। धरनास्थल पर 300 से अधिक छात्राएं शामिल हुईं और अपने अधिकारों की मांग को लेकर जोरदार प्रदर्शन किया। छात्राओं ने हाथों में तख्तियां लेकर “शेरशाहबादी प्रमाण पत्र निर्गत करो”, “हमें अपना अधिकार दो”, “जिला प्रशासन होश में आओ” और “अंचल प्रशासन हाय-हाय” जैसे नारे लगाए। छात्राओं का कहना था कि जाति प्रमाण पत्र के अभाव में वे छात्रवृत्ति, शैक्षणिक दाखिला, प्रतियोगी परीक्षाओं और सरकारी नौकरियों में आरक्षण के लाभ से वंचित हो रही हैं। धरना स्थल पर पहुंचे पाकुड़ के पूर्व विधायक एवं एआईएमआईएम नेता अकिल अख्तर ने आंदोलनकारियों को समर्थन देते हुए कहा कि शेरशाहबादी समाज वर्षों से अपने संवैधानिक अधिकारों के लिए संघर्ष कर रहा है, लेकिन सरकार और प्रशासन लगातार इस मुद्दे को टालने का काम कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि यह केवल जाति प्रमाण पत्र का मामला नहीं, बल्कि हजारों छात्र-युवाओं के भविष्य और पूरे समाज की पहचान का सवाल है। उन्होंने चेतावनी देते हुए कहा कि यदि जल्द समाधान नहीं निकाला गया तो आंदोलन और व्यापक रूप लेगा तथा गांव-गांव से लोग सड़क पर उतरेंगे। अकिल अख्तर ने कहा, “आज बरहरवा में धरना चल रहा है, कल पूरे साहिबगंज और पाकुड़ की सड़कें इस आवाज़ से गूंजेंगी। प्रशासन यह न समझे कि लोग थक जाएंगे या डर जाएंगे। जब किसी समाज की पहचान और भविष्य पर चोट होती है, तब आंदोलन जनसैलाब बन जाता है।” धरना स्थल पर दिनभर नारेबाजी, सभा और विचार-विमर्श का दौर चलता रहा। आंदोलनकारियों ने स्पष्ट कहा कि जब तक शेरशाहबादी जाति प्रमाण पत्र पुनः जारी नहीं किया जाता, तब तक आंदोलन जारी रहेगा। इस दौरान भाजपा नेता एवं पूर्व नगर अध्यक्ष श्यामल दास और सीपीआईएम नेता श्याम सुंदर पोद्दार ने भी धरनास्थल पहुंचकर आंदोलन को समर्थन दिया। मौके पर मौलाना बुरहान, मो. इश्तियाक, अंसार अली, अब्दुल मालिक, सरफराज अहमद, मो. सायबान, मो. आजमाइल, शकील अहमद, रायसा खातून, वाजिहा खातून, नसरीन खातून, तमन्ना परवीन, शहनाज खातून, साइस्ता महफूज, मासूमा परवीन, सरजीना खातून सहित समाज के कई गणमान्य लोग, छात्र-छात्राएं, युवा एवं सैकड़ों आंदोलनकारी उपस्थित थे।

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