गरीबी से निकलकर अंतरराष्ट्रीय मंच तक पहुंचे खलीलपुर के लाल
डॉ. अशोक कुमार ने बढ़ाया संभल और उत्तर प्रदेश का मान

नेशनल प्रेस टाइम्स, ब्यूरो
संभल/धनारी। कहते हैं कि यदि हौसले बुलंद हों तो अभाव भी सफलता की राह नहीं रोक सकते। इस कहावत को सच कर दिखाया है गुन्नौर तहसील के थाना धनारी क्षेत्र के ग्राम खलीलपुर निवासी डॉ. अशोक कुमार ने, जिन्होंने अपनी मेहनत, लगन और संघर्ष के दम पर न केवल अपने परिवार और क्षेत्र, बल्कि पूरे उत्तर प्रदेश का नाम अंतरराष्ट्रीय स्तर पर रोशन कर दिया है।
वैश्विक वैज्ञानिक मूल्यांकन संस्था द्वारा जारी नवीनतम रैंकिंग में डॉ. अशोक कुमार को दुनिया के शीर्ष चिकित्सक-वैज्ञानिकों में स्थान मिला है। वर्तमान में वे अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स), भोपाल के जैवरसायन विभाग में प्रोफेसर के पद पर कार्यरत हैं और चिकित्सा अनुसंधान के क्षेत्र में महत्वपूर्ण योगदान दे रहे हैं। डॉ. अशोक कुमार की सफलता की कहानी किसी प्रेरणादायक फिल्म से कम नहीं है। साधारण किसान परिवार में जन्मे अशोक कुमार ने आर्थिक तंगी और संसाधनों की कमी के बावजूद शिक्षा का दामन नहीं छोड़ा। परिवार की आर्थिक स्थिति इतनी मजबूत नहीं थी कि उच्च शिक्षा का खर्च आसानी से उठाया जा सके। ऐसे कठिन समय में उनकी बुआ मुन्नी देवी ने अपने घर का गेहूं और अन्य अनाज तक बेचकर उनकी पढ़ाई जारी रखने में मदद की। परिवार के त्याग, बुआ के स्नेह और अशोक कुमार की अथक मेहनत ने आज उन्हें उस मुकाम पर पहुंचा दिया है, जहां पूरा क्षेत्र गर्व महसूस कर रहा है।
ग्रामीणों का कहना है कि डॉ. अशोक कुमार बचपन से ही मेधावी छात्र रहे हैं। उन्होंने कभी परिस्थितियों को अपनी कमजोरी नहीं बनने दिया। शिक्षा और शोध के प्रति उनकी लगन ने उन्हें देश के प्रतिष्ठित चिकित्सा संस्थान एम्स भोपाल तक पहुंचाया और आज उनका नाम अंतरराष्ट्रीय स्तर पर सम्मान के साथ लिया जा रहा है।
डॉ. अशोक कुमार की इस उपलब्धि की खबर जैसे ही उनके पैतृक गांव खलीलपुर पहुंची, पूरे गांव में खुशी की लहर दौड़ गई। ग्रामीणों, परिजनों और क्षेत्र के लोगों ने इसे पूरे जनपद संभल के लिए गौरव का क्षण बताया। लोगों का कहना है कि डॉ. अशोक कुमार आज उन हजारों युवाओं के लिए प्रेरणा हैं, जो सीमित संसाधनों के बावजूद बड़े सपने देखने का साहस रखते हैं। उनकी इस ऐतिहासिक उपलब्धि ने यह साबित कर दिया है कि संघर्ष और मेहनत के बल पर गांव की पगडंडियों से निकलकर भी दुनिया के सबसे बड़े मंचों तक पहुंचा जा सकता है। आज खलीलपुर का यह बेटा केवल अपने परिवार का नहीं, बल्कि पूरे संभल, उत्तर प्रदेश और देश का गौरव बन गया है।



