बरेली

आग के मुहाने पर हैं ज्वलनशील सामान बेचने वाले कुतुबखाना एरिया के थोक बाजार

गली आर्य समाज, शास्त्री मार्केट, कटरा मानराय, गली नबावान आदि में फायर ब्रिगेड का पहुंचना भी मुश्किल

नेशनल प्रेस टाइम्स ,ब्यूरो                     
बरेली। लखनऊ में कोचिंग में हुई हृदय विदारक आग की घटना में 15 बच्चे काल के गाल में समा गए। इस भीषण अग्निकांड के बाद एक बार फिर जिम्मेदार तंत्र नींद से जाग गया। यही हाल बरेली का भी है। यहां भी तंत्र बीते वर्ष में हुए अग्निकांड के बाद भी कागजी घोड़े दौडाकर फिर सुप्ता अवस्था में आ गया। बरेली के कुतुबखाना चौराहे को अगर केंद्र मान कर देखे तो इसके 500 मीटर के दायरे में अग्निकांड में कई घटनाओं  में मौत के बाद भी स्थिति जस की तस बनी हुई है। जो कहें कि बारूद के ढेर पर है । सेटेलाइट चौराहे के पास बरेली विकास प्राधिकरण एवं अग्नि विभाग की टीम ने दो होटल अनियमितता मिलने पर सील किए। एवं पटेल चौक पर आकाश कोचिग को वयवस्था सुधार के भी निर्देश दिए ।अब कुतुबखाना सब्जी मंडी में यहां भूमिगत दो पहिया वाहन पार्किंग एवं शॉपिंग कॉम्प्लेक्स को बनाने की भी अधिक जरूरत है। कुतुबखाना का यह एरिया आग लगने जैसी घटना पर सर्वाधिक संवेदनशील क्षेत्र है। जहां फायर ब्रिगेड भी आसानी से नहीं पहुंच सकती। बरेली के सबसे घनी आबादी में इस एरिया में गली नबावॉन में टेंट का सामान बेचने वाले दुकान में आग की घटना में बीते वर्ष मौत भी  हुई थी। फायर ब्रिगेड की गाड़ी भी बड़ा बाजार तक ही पहुंच पाई थी। वहाँ से 300 मीटर का पाइप डाल कर आग पर काबू पाया गया था। शास्त्री मार्केट आदि में भी अग्निकांड में दुकान जल गई थी। कुतुबखाना चौराहे के लगभग 500 मीटर के दायरे में शास्त्री मार्केट, कनॉट प्लेस मार्केट, गली आर्य समाज, जगत टॉकीज मार्केट, गली नबावान, कटरा मानराय, जैसे कपड़ा, साड़ी, दवा, जूते चप्पल, कॉस्मेटिक सामान, प्लास्टिक सामान, प्लास्टिक खिलौने आदि का थोक कारोबार करोड़ों रुपए प्रतिदिन का होता है। तीन चार हजार दुकानें पुराने मकान तोड़ कर बन गई। सकरी गली में कपड़ा, साड़ी  दवा  मार्केट/बड़े शो रूम आदि भी बन गए। हजारों दो पहिया वाहन भी दुकानदारों/ दवा प्रतिनिधियों/ ग्राहकों के दिन भर सड़क घेर कर खड़े रहते हैं। ऐसी ऐसी जगह दुकान है जहां पैदल ही पहुंचने में काफी समय लगता है। अधिकांश मार्केट का नक्शा भी पास नहीं होगा। दुकान पर अग्नि शमन यंत्र तक नहीं है। बरेली विकास प्राधिकरण, अग्नि शमन विभाग, एवं अन्य सरकारी विभाग भी मौन ही रहते हैं। नगर निगम भी अधिकांश दुकानों से हाउस टैक्स नाम मात्र का ही बदलता है । बिजली के तार झूलते देखे जा सकते हैं। पूरे एरिया में कही भी दो पहिया वाहन पार्किंग नहीं है। महादेव पुल के नीचे ही वाहन पार्किंग करना लोगों की मजबूरी है। कभी कोई दुर्घटना होने पर फायर या एम्बुलेंस का पहुंचना भी मुश्किल होता है। जिला अस्पताल के बाहर सड़कों पर कारोबार से एंबुलेस रोज ही जाम में फंसती है। अब जरूरत है कुतुबखाना सब्जी मंडी में बनाई जाए भूमिगत वाहन पार्किंग एवं शॉपिंग कॉम्प्लेक्स।  चीफ फायर ऑफिसर मनु शर्मा के अनुसार बरेली की घनी आबादी वाले बाजार में हाइड्रेंट बनाने का मामला पिछले दिनों व्यापार बंधु की बैठक में भी उठा था। घनी आबादी के बाजार में अग्नि दुर्घटना रोकने के लिये व्यापारी/ व्यापार मंडल को ही जागरूक होना होगा। व्यापार मंडल के महामंत्री राजेश जसोरिया ने कहा कि व्यापार बंधु बैठक में वह कई बार बाजार में सड़क के नीचे दबे हुए पानी के  हाइड्रेंट प्वाइंट को सही करने की मांग नगर निगम एवं जलकल विभाग के सामने रख चुके हैं।
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