गाजियाबाद
पहली बारिश ने खोल दी लोनी में सफाई व्यवस्था की पोल
करोड़ों खर्च के वावजूद जनता जलभराव और गंदगी से त्रस्त

करोड़ों की सफाई के दावे पानी में बहे, एबीए इनवायरो पर कार्रवाई से आखिर क्यों बच रहे अधिकारी? बेबसी, लापरवाही या किसी का संरक्षण?
नेशनल प्रेस टाइम्स, ब्यूरो।
लोनी गाजियाबाद : मानसून की पहली ही मूसलाधार बारिश ने लोनी की सफाई व्यवस्था की असल तस्वीर सामने ला दी। गर्मी से राहत देने वाली बारिश ने नगर पालिका परिषद और सफाई कार्य संभाल रही एबीए इनवायरो कंपनी के दावों की भी परतें उधेड़ कर रख दीं। करोड़ों रुपये खर्च होने के बावजूद सड़कें तालाब में तब्दील हो गईं, नालियां उफन पड़ीं, सीवरों का गंदा पानी सड़कों पर बहने लगा और आम नागरिक घंटों तक जलभराव और जाम से जूझते रहे।
लोनी बॉर्डर से बंद फाटक मार्ग, बाग राणप, बंथला फ्लाईओवर, गुलाब वाटिका, जवाहर नगर, राम पार्क सहित अनेक क्षेत्रों में जलभराव ने लोगों का जनजीवन अस्त-व्यस्त कर दिया। कई स्थानों पर सीवर के ढक्कन तक पानी के दबाव से खुल गए और गंदा पानी सड़कों पर फैल गया। दोपहिया और चारपहिया वाहन चालकों को बीच रास्ते वाहन रोकने पड़े, जबकि स्कूली बच्चे, महिलाएं और बुजुर्ग गंदे पानी से होकर निकलने को मजबूर रहे।
स्थानीय लोगों का कहना है कि यदि समय पर नालियों, नालों और सीवर की सफाई हुई होती तो पहली बारिश में ही शहर की यह दुर्दशा नहीं होती। सवाल यह भी उठ रहा है कि आखिर सफाई के नाम पर खर्च होने वाला करोड़ों रुपये का बजट जाता कहां है, जब पहली ही बारिश में पूरी व्यवस्था ध्वस्त होती नजर आती है?
अब सबसे बड़ा सवाल सफाई कंपनी एबीए इनवायरो को लेकर उठ रहा है। लगातार शिकायतों और हर बारिश में सामने आने वाली बदहाल स्थिति के बावजूद कंपनी के खिलाफ कोई सख्त कार्रवाई क्यों नहीं हो रही? यदि कंपनी टेंडर की शर्तों के अनुरूप कार्य नहीं कर रही, तो अधिकारियों के हाथ आखिर किसने बांध रखे हैं?
नगर में चर्चा है कि या तो अधिकारी कार्रवाई करने की इच्छाशक्ति नहीं रखते, या फिर किसी प्रभावशाली संरक्षण के कारण फाइलें आगे नहीं बढ़ पा रहीं। आखिर जनता की परेशानी से ज्यादा चिंता किस बात की है? नियमों की या रिश्तों की? जवाबदेही की या बचाव की?
पहली बारिश ने एक बार फिर यह साबित कर दिया कि कागजों में चलने वाली सफाई व्यवस्था जमीनी हकीकत से अभी भी कोसों दूर है। जनता गंदे पानी में चलने को मजबूर है, जबकि इसके लिए जिम्मेदार विभाग और ठेकेदार अपनी जवाबदेही से बचते नजर आ रहे हैं।
तंज यही है कि लोनी में बारिश का पानी कम और दावों की स्याही ज्यादा बहती दिखाई देती है। हर साल जलभराव होता है, हर साल शिकायतें होती हैं, लेकिन कार्रवाई की नाव शायद वहीं फंस जाती है, जहां से जवाबदेही शुरू होती है। अब देखना यह है कि इस बार भी पहली बारिश के साथ मामला ठंडा पड़ जाएगा या फिर जिम्मेदारों से सचमुच जवाब मांगा जाएगा।



