जामताड़ा
गुरु पूर्णिमा उत्सव पर सरस्वती विद्या मंदिर विद्यासागर में महर्षि वेदव्यास जयंती श्रद्धा एवं उल्लास के साथ मनाई गई

नेशनल प्रेस टाइम्स, ब्यूरो।
जामताड़ा : गुरु पूर्णिमा के पावन अवसर पर सरस्वती विद्या मंदिर, विद्यासागर में महर्षि वेदव्यास जयंती श्रद्धा, भक्ति एवं गरिमामय वातावरण में मनाई गई। कार्यक्रम का शुभारंभ विद्यालय के सचिव बलराम मंडल एवं प्रधानाचार्य विजय कुमार दांगी ने संयुक्त रूप से भारत माता, परमब्रह्म ‘ॐ’ तथा माँ शारदे के चित्र पर पुष्पार्चन एवं दीप प्रज्ज्वलित कर किया।
इस अवसर पर विभाग प्रचार प्रमुख बलबीर कुमार यादव ने जानकारी देते हुए कहा कि महर्षि वेदव्यास के व्यक्तित्व एवं कृतित्व पर विशेष प्रकाश डाला गया। वक्ताओं ने बताया कि महर्षि वेदव्यास का जन्म आषाढ़ पूर्णिमा के दिन महर्षि पराशर एवं माता सत्यवती के यहाँ हुआ था। उनका मूल नाम कृष्ण द्वैपायन था। उन्होंने चारों वेदों का संकलन एवं विभाजन कर उन्हें व्यवस्थित स्वरूप प्रदान किया, जिसके कारण उन्हें वेदव्यास की उपाधि प्राप्त हुई। वे विश्व के महानतम ऋषियों में गिने जाते हैं तथा महाभारत, श्रीमद्भागवत महापुराण, ब्रह्मसूत्र सहित अठारह महापुराणों की रचना का श्रेय भी उन्हें दिया जाता है। भारतीय ज्ञान, दर्शन, संस्कृति एवं सनातन परंपरा को सुरक्षित रखने में उनका अतुलनीय योगदान रहा है। इसी कारण गुरु पूर्णिमा को व्यास पूर्णिमा भी कहा जाता है और इस दिन समस्त गुरुजनों का सम्मान कर उनके प्रति कृतज्ञता व्यक्त की जाती है।
विद्यालय के आचार्य जयनारायण मंडल ने अपने संबोधन में कहा कि गुरु ही व्यक्ति के जीवन को सही दिशा प्रदान करते हैं। गुरु के मार्गदर्शन से ही समाज एवं राष्ट्र का उज्ज्वल भविष्य निर्मित होता है। उन्होंने विद्यार्थियों से गुरुजनों के आदर्शों का अनुसरण करते हुए अनुशासन, संस्कार एवं राष्ट्रभक्ति को अपने जीवन का आधार बनाने का आह्वान किया।
प्रधानाचार्य विजय कुमार दांगी ने कहा कि विद्या भारती की शिक्षा पद्धति में गुरु-शिष्य परंपरा का विशेष महत्व है। विद्यालय केवल शिक्षा का केंद्र नहीं, बल्कि संस्कार निर्माण का भी केंद्र है। गुरु पूर्णिमा का पर्व हमें ज्ञान, सेवा, समर्पण एवं नैतिक मूल्यों को जीवन में अपनाने की प्रेरणा देता है।
कार्यक्रम के दौरान विद्यालय परिवार की ओर से सभी आचार्य, दीदी एवं कर्मचारियों को सम्मान स्वरूप वस्त्र भेंट कर उनके प्रति सम्मान एवं कृतज्ञता व्यक्त की गई। सभी ने महर्षि वेदव्यास एवं गुरु परंपरा के आदर्शों का अनुसरण करते हुए राष्ट्र निर्माण के लिए समर्पित भाव से कार्य करने का संकल्प लिया।
कार्यक्रम में विद्यालय के समस्त आचार्यगण, दीदी, कर्मचारी एवं विद्यार्थी उपस्थित रहे। संपूर्ण कार्यक्रम श्रद्धा, अनुशासन एवं भारतीय संस्कृति की गौरवशाली परंपरा से ओत-प्रोत वातावरण में संपन्न हुआ।




