बागपत
गुरु दक्षिणा पर्व पर श्रद्धा और आस्था का महासंगम, शिष्यों ने गुरु पूजा कर लिया आशीर्वाद
बाबा मोहनराम मंदिर दुर्गापुरी शाहदरा में विश्व कल्याण के लिए हुआ यज्ञ, ढोल-नगाड़ों के बीच निकली भव्य गुरु रथ यात्रा

नेशनल प्रेस टाइम्स, ब्यूरो।
बागपत। गुरु-शिष्य परंपरा भारतीय सनातन संस्कृति की ऐसी अमूल्य धरोहर है, जिसमें गुरु को ज्ञान, संस्कार और आध्यात्मिक मार्गदर्शन का प्रकाश स्तंभ माना गया है। गुरु पूर्णिमा एवं गुरु दक्षिणा पर्व के पावन अवसर पर दिल्ली के बाबा मोहनराम मंदिर, दुर्गापुरी शाहदरा में श्रद्धा, भक्ति और आध्यात्मिक ऊर्जा से ओतप्रोत भव्य कार्यक्रम का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में बड़ी संख्या में गुरु के शिष्यों और श्रद्धालुओं ने भाग लेकर गुरु पूजा की तथा उनका आशीर्वाद प्राप्त किया।
कार्यक्रम का शुभारंभ विश्व कल्याण एवं सर्वजन सुख-शांति की कामना को लेकर आयोजित यज्ञ से हुआ। वैदिक मंत्रोच्चार के बीच श्रद्धालुओं ने यज्ञ में आहुति देकर समाज, देश और समस्त विश्व में सुख-शांति, समृद्धि तथा सद्भाव की प्रार्थना की।
ढोल-नगाड़ों के साथ निकली गुरु रथ यात्रा
यज्ञ के उपरांत जगतगुरु डॉक्टर तेजबीर सिंह खोखर एवं गुरु माता सुषमा देवी को विशेष रूप से सुसज्जित रथ पर बनाए गए आसन पर विराजमान कराया गया। इसके बाद शिष्यों ने ढोल-नगाड़ों और भजनों के बीच भव्य गुरु रथ यात्रा निकाली। यात्रा के दौरान श्रद्धालु “गुरु कृपा, ईश्वर कृपा” जैसे जयघोष करते हुए गुरु के प्रति अपनी श्रद्धा और समर्पण व्यक्त कर रहे थे।
भक्ति गीतों और जयकारों से वातावरण पूरी तरह आध्यात्मिक हो गया। जगह-जगह श्रद्धालुओं ने गुरु का स्वागत किया। गुरु रथ यात्रा गुरु निवास महाप्रभु महल से प्रारंभ होकर बाबा मोहनराम मंदिर दुर्गापुरी शाहदरा पहुंची, जहां श्रद्धालुओं ने पूरे भक्तिभाव के साथ गुरु का स्वागत किया।
गुरु पूजा कर शिष्यों ने लिया आशीर्वाद
मंदिर परिसर में पहुंचने के बाद गुरु के शिष्यों ने जगतगुरु डॉक्टर तेजबीर सिंह खोखर एवं गुरु माता सुषमा देवी की विधिवत गुरु पूजा की। शिष्यों ने वस्त्र एवं विभिन्न उपहार भेंट कर गुरु के प्रति अपनी श्रद्धा व्यक्त की और चरण वंदन कर आशीर्वाद प्राप्त किया।
इस अवसर पर श्रद्धालुओं में विशेष उत्साह देखने को मिला। अनेक शिष्यों ने गुरु के प्रति अपने भाव व्यक्त करते हुए कहा कि गुरु का सानिध्य जीवन को सही दिशा प्रदान करता है और उनके बताए मार्ग पर चलने से व्यक्ति अपने जीवन में सकारात्मक परिवर्तन ला सकता है।
गुरु की शरण में आने के बाद बुरे कर्मों का त्याग जरूरी : जगतगुरु
कार्यक्रम को संबोधित करते हुए जगतगुरु डॉक्टर तेजबीर सिंह खोखर ने कहा कि गुरु पूर्णिमा पर गुरु पूजा सनातन धर्म की प्राचीन और पवित्र परंपरा है। सनातन संस्कृति में गुरु और शिष्य के संबंध को अत्यंत पवित्र माना गया है। भारतीय संस्कृति गुरु में माता-पिता के साथ-साथ परमपिता परमात्मा की छवि देखती है।
उन्होंने कहा कि गुरु और ईश्वर की कृपा केवल शब्दों या दिखावे से नहीं, बल्कि शिष्य के कर्मों और आचरण से प्राप्त होती है। गुरु की शरण में आने के बाद शिष्य को अपने जीवन में बुरे कर्मों, अहंकार, छल-कपट और नकारात्मक प्रवृत्तियों का त्याग करना चाहिए। यदि कोई व्यक्ति गुरु की शरण में आने के बावजूद अपने बुरे कर्मों को नहीं छोड़ता तो वह गुरु एवं ईश्वर की वास्तविक कृपा का पात्र नहीं बन सकता।
उन्होंने शिष्यों को संदेश देते हुए कहा कि गुरु पूजा का वास्तविक अर्थ केवल पूजा-पाठ और उपहार अर्पित करना नहीं, बल्कि गुरु के बताए सद्मार्ग पर चलना, अच्छे कर्म करना, जरूरतमंदों की सेवा करना और समाज में प्रेम एवं सद्भाव फैलाना है। गुरु के प्रति सच्ची दक्षिणा यही है कि शिष्य अपने जीवन को संस्कारवान और समाजोपयोगी बनाए।
गुरु दक्षिणा का वास्तविक अर्थ जीवन में अच्छे संस्कार अपनाना
जगतगुरु ने कहा कि गुरु दक्षिणा को केवल भौतिक उपहार तक सीमित नहीं किया जाना चाहिए। शिष्य द्वारा अपने जीवन में सत्य, सेवा, संयम, सदाचार और मानवता को अपनाना ही गुरु के प्रति सबसे बड़ी दक्षिणा है। उन्होंने युवाओं से विशेष रूप से भारतीय संस्कृति, संस्कारों और सनातन परंपराओं से जुड़ने का आह्वान किया।
कार्यक्रम के दौरान श्रद्धालुओं ने गुरु के प्रति अपनी आस्था प्रकट करते हुए समाज और विश्व कल्याण की कामना की। आयोजन के अंत में उपस्थित श्रद्धालुओं ने गुरु का आशीर्वाद प्राप्त किया तथा आपसी प्रेम, भाईचारे और सामाजिक सद्भाव को मजबूत करने का संकल्प लिया।
इस अवसर पर इंदू खोखर, रश्मी खोखर, संतोष देवी, शिवराज सिंह, पंकज खोखर, राजा ब्रजवीर सिंह खोखर, आशीष चौधरी, सुभाष शर्मा, रामनिवास त्यागी, अशोक कुमार, हेमंत कुमार, आकाश शर्मा, विकास, अंकुर, प्रहलाद, मनमोहन जिंदल सहित बड़ी संख्या में श्रद्धालु एवं शिष्य उपस्थित रहे।



