
कारीगारों और मजदूरों को मिल रहा है स्थानीय रोजगार
रबड़ी वाले घेवर ज्यादा हो रहे हैं लोकप्रिय
नेशनल प्रेस टाइम्स, ब्यूरो।
भुसावर : भरतपुर जिले के ऐतिहासिक शहरों में शामिल भुसावर शहर में सावन (श्रावण ) मास की शुरुआत के साथ ही घेवर बनाने का काम तेज हो गया है, जहां हरियाली तीज और रक्षाबंधन पर्व को देखते हुए यहां के प्रमुख हवाई घेवर बनाने में जुट गए हैं। और उनके यहां पर घेवर बनाने की परम्परा सैकड़ो कारिगारों और मजदूरों को स्थानीय रोजगार का जरिया बन रही है। वहीं घेवर बनाने वाले हरीश सिंघल , प्रदीप अग्रवाल और दीपू ने जानकारी देते हुए बताया कि सबसे पहले मैदा और दूध को मिलाकर अच्छी तरह माथा जाता है। फिर इस मिश्रण को खौलते हुए घी भरे पात्र में बने सांचों में डाला जाता है। जिसके बाद वोतल में मैदा और दूध के मिश्रण को भर कर उपर से डालने पर इस पात्र में बुलबुले उठने लगते हैं। जहां ये बुलबुले मधुमक्खी जैसी आकृर्ति बना लेते है और कुछ ही समय में घेवर तैयार हो जाते हैं। वहीं उन्होंने बताया कि उनके यहां पर पहले देशी घी के घेवर बनाए जाते थे। अब रबड़ी वाले घेवर ज्यादा लोकप्रिय हो गए है। जहां रबड़ी के घेवर पर केसर, पिस्ता, काजू और बादाम की कतरन डाली जाती है। बढ़ती मंहगाई का असर घेवर की कीमतो पर भी पड़ा है, लेकिन फिर भी हरियाली तीज और रक्षा बन्धन पर्व के सीजन को लेकर लोग रबड़ी वाले घेवर खूब खरीद रहे हैं। जहां स्थानीय लोगों के अलावा ग्रामीण क्षेत्रो के लोग घेवर के स्वाद के साथ साथ इसकी गुणवत्ता की भी तारीफ कर रहे हैं। और यह घेवर की पारम्पारिक की मिठाई भोजन की थाली की शोभा बढ़ा रही है।



