बीएनएसएस और पॉक्सो अधिनियम के तहत बाल अधिकारों व सुरक्षा उपायों को लेकर जिला स्तरीय बहु-हितधारक परामर्श कार्यशाला
District-level multi-stakeholder consultation workshop on child rights and safety measures under the BNSS and POCSO Act.

नेशनल प्रेस टाइम्स ब्यूरो।
पाकुड़। झालसा, रांची के निर्देशानुसार जिला विधिक सेवा प्राधिकार (डालसा), पाकुड़ के तत्वावधान में शनिवार को सिविल कोर्ट, पाकुड़ के कॉन्फ्रेंस हॉल में बीएनएसएस एवं पॉक्सो अधिनियम के तहत बाल अधिकारों और सुरक्षा उपायों को सुदृढ़ करने के उद्देश्य से जिला स्तरीय बहु-हितधारक परामर्श कार्यशाला का आयोजन किया गया। कार्यक्रम की अध्यक्षता प्रभारी प्रधान जिला एवं सत्र न्यायाधीश सह अध्यक्ष, जिला विधिक सेवा प्राधिकार, पाकुड़ कुमार क्रांति प्रसाद ने की। कार्यशाला का उद्घाटन प्रभारी प्रधान जिला एवं सत्र न्यायाधीश सह अध्यक्ष डालसा कुमार क्रांति प्रसाद, मुख्य न्यायिक दंडाधिकारी संजीत कुमार चंद्र, डीएसपी मुख्यालय उज्ज्वल कुमार साहा, एसडीपीओ विजय कुमार, मेडिएटर समीर कुमार मिश्रा, डॉ. एसके झा सहित अन्य अधिकारियों एवं छात्र-छात्राओं ने संयुक्त रूप से दीप प्रज्वलित कर किया। कार्यशाला को संबोधित करते हुए कुमार क्रांति प्रसाद ने भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस), 2023 के तहत बच्चों के अधिकारों एवं उनकी सुरक्षा से जुड़े महत्वपूर्ण प्रावधानों की जानकारी दी। उन्होंने बच्चों के विरुद्ध अपराध, मानव तस्करी तथा जांच प्रक्रिया से संबंधित कानूनी प्रावधानों पर विस्तार से चर्चा की। उन्होंने बताया कि बीएनएसएस की धारा 193 के तहत जांच पूरी करने के लिए निर्धारित समयसीमा का पालन आवश्यक है। साथ ही धारा 176 एवं 180 के तहत दर्ज बयानों की ऑडियो-वीडियो रिकॉर्डिंग तथा धारा 230 के तहत शिकायतकर्ता को सूचना उपलब्ध कराने के प्रावधानों की भी जानकारी दी गई। उन्होंने पुलिस स्तर पर होने वाली लापरवाही से न्यायिक प्रक्रिया में उत्पन्न होने वाली कठिनाइयों पर भी प्रकाश डाला। बीएनएसएस की धारा 183 के तहत बयान दर्ज करने में होने वाली अनावश्यक देरी तथा भारतीय साक्ष्य अधिनियम, 2023 की धारा 63 के तहत इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्य के लिए आवश्यक प्रमाण-पत्र जैसे महत्वपूर्ण बिंदुओं पर अधिकारियों को विशेष रूप से संवेदनशील रहने का निर्देश दिया गया। कार्यशाला में पॉक्सो अधिनियम के तहत मामलों की जांच एवं अभियोजन से जुड़ी चुनौतियों पर भी विस्तार से चर्चा हुई। पॉक्सो अधिनियम की धारा 19 के तहत अनिवार्य रिपोर्टिंग, वर्ष 2019 के संशोधन के बाद कठोर दंड के प्रावधान तथा बच्चों के मामलों में त्वरित और संवेदनशील कार्रवाई की आवश्यकता पर जोर दिया गया। किशोर पुलिस इकाइयों के लिए निर्धारित मानक संचालन प्रक्रिया के तहत बच्चों के बयान तत्काल एवं गैर- आघातकारी तरीके से दर्ज करने की आवश्यकता बताई गई। संबंधित अधिकारियों को अभियोजन की गुणवत्ता बेहतर बनाने, साक्ष्यों की आवश्यकताओं को पूरा करने तथा गवाहों को प्रभावित होने से बचाने के संबंध में भी महत्वपूर्ण दिशा-निर्देश दिए गये। कार्यशाला में किशोर न्याय (बालकों की देखरेख और संरक्षण) अधिनियम, 2015 के विभिन्न प्रावधानों पर भी चर्चा की गई। इसमें देखभाल एवं संरक्षण की आवश्यकता वाले बच्चों, धारा 75 के तहत बाल क्रूरता तथा धारा 81 एवं 82 के तहत बच्चों की बिक्री और खरीद से संबंधित अपराधों की जानकारी दी गई। अधिकारियों को बताया गया कि बच्चों की उम्र के निर्धारण से जुड़े दस्तावेजों के सत्यापन में देरी अथवा पुलिस स्तर पर किसी प्रकार की लापरवाही का सीधा असर न्यायिक प्रक्रिया पर पड़ सकता है। इसलिए संबंधित मामलों में पुलिस अधिकारियों, चिकित्सा पदाधिकारियों तथा अन्य विभागीय अधिकारियों को अपने कर्तव्यों और महत्वपूर्ण भूमिका के प्रति संवेदनशील रहते हुए मामलों के त्वरित एवं सुगम निष्पादन की दिशा में कार्य करना चाहिए। कार्यशाला के दौरान संबंधित मामलों में कानूनी प्रक्रिया, साक्ष्य संकलन, मेडिकल परीक्षण, जांच एवं अभियोजन के विभिन्न पहलुओं पर अधिकारियों के बीच विचार-विमर्श भी किया गया। बाल पीड़ितों को न्याय दिलाने के लिए विभिन्न विभागों के बीच बेहतर समन्वय और संवेदनशील कार्यप्रणाली विकसित करने पर विशेष जोर दिया गया। कार्यक्रम का संचालन डालसा सचिव रूपा बंदना किरो ने किया। मौके पर अपर मुख्य न्यायिक दंडाधिकारी विशाल मांझी, डीईओ अनीता पुनीत, जिला बाल संरक्षण इकाई के पदाधिकारी व्यास ठाकुर, जिला समाज कल्याण पदाधिकारी, जिला कल्याण पदाधिकारी, मेडिएटर अधिवक्ता, सीडब्ल्यूसी एवं जेजेबी बोर्ड के अधिकारी व सदस्य, एलएडीसीएस के अधिवक्ता, छात्र-छात्राएं, सपोर्ट पर्सन, पैरा लीगल वॉलंटियर्स, जांच अधिकारी, पर्यवेक्षण अधिकारी, अधिवक्ता, प्रशासनिक अधिकारी सहित विभिन्न विभागों के पदाधिकारी एवं कर्मी मौजूद रहे।



