गाजियाबाद

मण्डल स्तरीय पोल्ट्री कॉन्क्लेव में 415 पोल्ट्री फार्मर एवं उद्यमियों ने किया प्रतिभाग

उत्तर प्रदेश कुक्कुट विकास नीति-2022 के तहत 107 इच्छुक उद्यमियों ने लगभग ₹73 करोड़ के एमओयू किए हस्ताक्षर

नेशनल प्रेस टाइम्स, ब्यूरो।
लोनी : पशुपालन विभाग, मेरठ मंडल द्वारा आज चौधरी चरण सिंह विश्वविद्यालय, मेरठ के अटल सभागार में “एक दिवसीय मण्डल स्तरीय पोल्ट्री कॉन्क्लेव/कुक्कुट निवेश सम्मेलन” का आयोजन किया गया। कार्यक्रम का शुभारम्भ मा0 विधायक मेरठ कैन्ट  अमित अग्रवाल  एवं मुख्य विकास अधिकारी, मेरठ श्रीमती नूपुर गोयल द्वारा दीप प्रज्ज्वलित कर किया गया।
कार्यक्रम में डाॅ. अनिल कुमार, अपर निदेशक ग्रेड-1 कुक्कुट, डाॅ. मनीष सचान, संयुक्त निदेशक कुक्कुट, डाॅ. ब्रजेश त्रिपाठी, उप निदेशक कुक्कुट निदेशालय, पशुपालन विभाग, उ0प्र0 लखनऊ तथा डाॅ. मानव, अपर निदेशक ग्रेड-2, पशुपालन विभाग, मेरठ मंडल सहित मेरठ मंडल के समस्त मुख्य पशु चिकित्साधिकारी/उप मुख्य पशु चिकित्साधिकारी उपस्थित रहे।
कॉन्क्लेव में सरदार वल्लभ भाई पटेल कृषि एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय, मेरठ के वैज्ञानिकों, पं0 दीनदयाल उपाध्याय पशु चिकित्सा विज्ञान विश्वविद्यालय एवं गो अनुसंधान संस्थान, मथुरा के विशेषज्ञों तथा मेरठ मंडल के छह जनपदों से लगभग 415 पोल्ट्री फार्मर एवं पोल्ट्री उद्यमियों ने प्रतिभाग किया। उत्तर प्रदेश कुक्कुट विकास नीति-2022 के अंतर्गत पोल्ट्री योजना में निवेश के इच्छुक 226 महिला एवं पुरुष उद्यमियों द्वारा पंजीकरण कराया गया, जबकि 107 इच्छुक उद्यमियों द्वारा लगभग ₹73 करोड़ के एमओयू पर हस्ताक्षर किए गए।
कार्यक्रम के प्रारम्भ में मंच संचालक डाॅ. सुभाष मलिक, उप मुख्य पशु चिकित्साधिकारी, सरधना द्वारा अतिथियों का स्वागत करते हुए उन्हें मंचासीन होने हेतु आमंत्रित किया गया।
मा0 विधायक मेरठ कैन्ट श्री अमित अग्रवाल जी ने पशुपालन विभाग द्वारा अण्डा उत्पादन के क्षेत्र में की गई अभूतपूर्व प्रगति की सराहना की तथा अपने व्यक्तिगत अनुभव साझा किए। उन्होंने कहा कि पोल्ट्री उद्योग ग्रामीण अर्थव्यवस्था, रोजगार सृजन तथा किसानों की आय बढ़ाने का महत्वपूर्ण माध्यम बन सकता है।
इस अवसर पर बताया गया कि मेरठ मंडल में पिछले लगभग 10 वर्षों में अण्डा उत्पादन में लगभग 756 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई है। वर्ष 2017 में मंडल में लगभग 10.05 करोड़ अण्डों का उत्पादन हुआ था, जो वर्ष 2025-26 में बढ़कर 86.09 करोड़ हो गया। इस प्रकार अण्डा उत्पादन में लगभग 756.06 प्रतिशत की उल्लेखनीय वृद्धि हुई है। इस उपलब्धि से पोल्ट्री फार्मरों को आर्थिक लाभ मिलने के साथ-साथ प्रदेश की अण्डों के लिए अन्य राज्यों पर निर्भरता भी कम हुई है।
डाॅ. ब्रजेश त्रिपाठी, उप निदेशक, कुक्कुट निदेशालय, पशुपालन विभाग, उ0प्र0 लखनऊ द्वारा किसानों, युवाओं एवं उद्यमियों को पोल्ट्री उद्योग की संभावनाओं के संबंध में विस्तृत जानकारी दी गई। उन्होंने लेयर एवं ब्रायलर उत्पादन, कुक्कुट आहार उत्पादन, अण्डे एवं कुक्कुट मांस में उपलब्ध प्रोटीन तथा मानव स्वास्थ्य पर इसके सकारात्मक प्रभावों के संबंध में महत्वपूर्ण जानकारी साझा की। उन्होंने युवाओं को आधुनिक तकनीक एवं वैज्ञानिक प्रबंधन अपनाकर पोल्ट्री उद्योग को लाभकारी व्यवसाय के रूप में स्थापित करने के लिए प्रेरित किया।
डाॅ. मानव, अपर निदेशक ग्रेड-2, पशुपालन विभाग, मेरठ मंडल द्वारा उत्तर प्रदेश कुक्कुट विकास नीति-2022 के अंतर्गत संचालित कामर्शियल लेयर फार्म योजना की विस्तार से जानकारी दी गई। उन्होंने बताया कि योजना के अंतर्गत 10 हजार से 90 हजार लेयर पक्षियों की क्षमता वाले फार्म स्थापित किए जा सकते हैं। योजना की परियोजना लागत लगभग ₹99.53 लाख से ₹734.55 लाख तक है। योजना के अंतर्गत पांच वर्षों तक 7 प्रतिशत अथवा बैंक द्वारा निर्धारित ब्याज दर, इनमें से जो भी कम हो, पर ब्याज प्रतिपूर्ति के रूप में लगभग ₹14.61 लाख से ₹107.96 लाख तक की सहायता प्रदान की जाती है।
उन्होंने बताया कि पोल्ट्री क्षेत्र में निवेश को प्रोत्साहित करने के लिए पशुपालन विभाग द्वारा विभिन्न योजनाओं के माध्यम से किसानों एवं युवाओं को वित्तीय एवं तकनीकी सहयोग उपलब्ध कराया जा रहा है। इसके अतिरिक्त बैकयार्ड पोल्ट्री योजना के अंतर्गत प्रत्येक जनपद में 200 निर्बल वर्ग के महिला/पुरुष लाभार्थियों को 50 चूजे निःशुल्क उपलब्ध कराए जा रहे हैं। लाभार्थियों को चूजों के पालन हेतु निःशुल्क कुक्कुट आहार तथा रख-रखाव के लिए ₹425 प्रति लाभार्थी डीबीटी के माध्यम से उपलब्ध कराया जा रहा है।
कॉन्क्लेव में विभिन्न वित्तीय संस्थाओं के प्रतिनिधियों द्वारा पोल्ट्री फार्म की स्थापना एवं विस्तार के लिए उपलब्ध ऋण एवं वित्त पोषण सुविधाओं की जानकारी दी गई तथा इच्छुक पोल्ट्री फार्मरों को सरल एवं सुगम ऋण प्रक्रिया के संबंध में अवगत कराया गया।
कार्यक्रम में विशेषज्ञों द्वारा पोल्ट्री व्यवसाय की नई तकनीकों, वैज्ञानिक प्रबंधन, रोग नियंत्रण, संतुलित आहार, अण्डा एवं ब्रायलर उत्पादन तथा बाजार की संभावनाओं पर भी चर्चा की गई। कॉन्क्लेव का उद्देश्य प्रदेश में पोल्ट्री उद्योग को बढ़ावा देना, युवाओं एवं किसानों को उद्यमिता से जोड़ना, रोजगार के अवसर सृजित करना तथा अण्डा एवं कुक्कुट मांस उत्पादन में आत्मनिर्भरता को बढ़ावा देना रहा।
पशुपालन विभाग द्वारा आयोजित इस निवेश सम्मेलन में प्राप्त सकारात्मक सहभागिता से स्पष्ट है कि मेरठ मंडल में पोल्ट्री उद्योग के प्रति किसानों, युवाओं एवं उद्यमियों में व्यापक रुचि बढ़ रही है, जो आने वाले समय में रोजगार सृजन, ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूती प्रदान करने तथा प्रदेश की अर्थव्यवस्था में महत्वपूर्ण योगदान देने में सहायक होगी।
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