ओम साईं हॉस्पिटल पर बड़ा खुलासा
एक भवन की अनुमति, दो में चल रहा 'खेल'! नियमों की धज्जियां उड़ाने पर प्रशासन मौन क्यों?

नेशनल प्रेस टाइम्स, ब्यूरो।
सिंगरौली l जिला मुख्यालय बैढ़न स्थित ओम साईं हॉस्पिटल की कार्यप्रणाली और वैधानिकता पर गंभीर और सनसनीखेज सवाल खड़े हो गए हैं। अस्पताल प्रशासन पर आरोप है कि वह महज एक भवन की अनुमति की आड़ में बगल की दूसरी पूरी इमारत में भी अवैध रूप से अस्पताल की गतिविधियां संचालित कर रहा है। स्वास्थ्य विभाग और स्थानीय प्रशासन की आंखों में धूल झोंककर खेला जा रहा यह खेल मरीजों की सुरक्षा के साथ-साथ राज्य के सख्त कानून-कायदों को सीधी चुनौती दे रहा है।
नर्सिंग होम एक्ट की सरेआम धज्जियां
‘मध्य प्रदेश उपचर्यागृह तथा रुजोपचार संबंधी स्थापनाएं (रजिस्ट्रिकरण तथा अनुज्ञापन) अधिनियम, 1973’ की धारा 3 और 4 के तहत बिना पंजीयन, बिना लाइसेंस और स्वीकृत शर्तों के विपरीत अस्पताल चलाना पूरी तरह से गैर-कानूनी और दंडनीय है। अधिनियम के अनुसार, किसी भी चिकित्सा संस्थान को परिसर के क्षेत्रफल, निर्मित क्षेत्र, कमरे, बेड क्षमता और उपलब्ध उपकरणों के कड़े भौतिक सत्यापन के बाद ही लाइसेंस जारी किया जाता है। ऐसे में सवाल यह उठता है कि क्या ओम साईं हॉस्पिटल ने अपनी दूसरी इमारत को सरकारी अभिलेखों में पंजीकृत कराया है? या फिर बिना किसी वैध पंजीयन और विभागीय अनुमति के मरीजों की जान को खतरे में डालकर दूसरी बिल्डिंग में इलाज का कारोबार चलाया जा रहा है?
भवन अनुज्ञा और निर्माण भी जांच के दायरे में
मामला सिर्फ स्वास्थ्य विभाग के लाइसेंस तक सीमित नहीं है, बल्कि नगर निगम के भवन निर्माण नियमों के उल्लंघन का भी है। सूत्रों के अनुसार, निर्मित भवन का ढांचा स्वीकृत नक्शे के विपरीत है। मध्य प्रदेश भूमि विकास नियमों के तहत बिना स्वीकृत नक्शे या स्वीकृत प्रयोजन के विपरीत व्यावसायिक/चिकित्सकीय उपयोग करना पूरी तरह से अवैध है।
प्रशासन की भूमिका पर उठते सवाल:
नक्शा और उपयोग: भवन का निर्माण किस नक्शे के आधार पर हुआ और क्या दूसरी बिल्डिंग को चिकित्सकीय उपयोग (अस्पताल) की अनुमति प्राप्त है?
बेड क्षमता में अंतर: कागजों पर दिखाई गई स्वीकृत बेड क्षमता और मौके पर मौजूद बेड की संख्या में कितना बड़ा झोल है?
फायर सेफ्टी पर खतरा: क्या इस दूसरी अवैध इमारत के पास एनओसी (NOC) और अग्नि सुरक्षा के मानक पूरे हैं? यदि कोई अनहोनी होती है तो जिम्मेदार कौन होगा?
लापरवाही का आलम: आखिर किसकी शह पर जारी है यह खेल?
सबसे बड़ा और तीखा सवाल यह है कि जिला प्रशासन और स्वास्थ्य विभाग अब तक मूकदर्शक क्यों बने हुए हैं? क्या विभागीय अधिकारियों ने कभी इस अस्पताल का औचक निरीक्षण कर मूल दस्तावेजों का मौके से मिलान करने की जहमत उठाई? यदि निरीक्षण हुआ है, तो उसकी जांच रिपोर्ट को दबाकर क्यों रखा गया है? क्या आम जनता की सेहत और सुरक्षा से खिलवाड़ करने वाले इस संस्थान पर अब तक कार्रवाई न होना विभागीय मिलीभगत की ओर इशारा करता है?
इनका कहना है
“मामले की जानकारी मिली है, मैं इसे तुरंत दिखाता हूं और जांच करवाता हूं।”
डॉ. पुष्पराज सिंह ठाकुर,सीएमएचओ (सिंगरौली)



