रांची

हल्द्वानी शुद्धिकरण मामले में जीरो एफआईआर की मांग, SC/ST थाना पहुंचे विजय शंकर नायक

Demand for Zero FIR in Haldwani 'purification' case; Vijay Shankar Nayak visits SC/ST police station.

 नेशनल प्रेस टाइम्स ब्यूरो।

रांची।हल्द्वानी के रामलीला मैदान में कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे की सभा के बाद कथित ‘शुद्धिकरण’ हवन-यज्ञ एवं गंगाजल छिड़काव के मामले को लेकर झारखंड प्रदेश कांग्रेस कमिटी के प्रदेश प्रवक्ता विजय शंकर नायक ने गुरुवार को रांची स्थित अनुसूचित जाति/अनुसूचित जनजाति थाना पहुंचकर लिखित शिकायत दी। उन्होंने मामले में जीरो एफआईआर दर्ज कर संबंधित थाना, हल्द्वानी को भेजने की मांग की। विजय शंकर नायक ने अपने आवेदन में कहा कि यदि जांच में यह तथ्य सामने आता है कि किसी अनुसूचित जाति के नेता की जातिगत पहचान अथवा उपस्थिति के कारण सार्वजनिक स्थल को ‘अपवित्र’ मानकर कथित रूप से उसका शुद्धिकरण कराया गया, तो यह गंभीर जातिगत भेदभाव और अपमान का मामला हो सकता है। उन्होंने मामले की निष्पक्ष जांच की मांग करते हुए SC/ST (Prevention of Atrocities) Act, 1989, Protection of Civil Rights Act, 1955 सहित अन्य लागू कानूनी प्रावधानों के तहत कार्रवाई की मांग की। उन्होंने पुलिस से घटना से संबंधित CCTV फुटेज, वीडियो, फोटो, सोशल मीडिया सामग्री और अन्य दस्तावेजी साक्ष्यों को तत्काल सुरक्षित कराने की भी मांग की, ताकि जांच के दौरान महत्वपूर्ण साक्ष्यों के साथ छेड़छाड़ या उनके नष्ट होने की संभावना न रहे। नायक ने कहा कि यह पता लगाया जाना आवश्यक है कि सार्वजनिक स्थल के कथित शुद्धिकरण का आधार क्या था और इसके पीछे किसी प्रकार की जातिगत मंशा थी या नहीं। उन्होंने कहा कि यदि मामला जातिगत भेदभाव से जुड़ा पाया जाता है तो इसकी निष्पक्ष कानूनी जांच कर जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कार्रवाई होनी चाहिए। उन्होंने कहा कि घटना उत्तराखंड के हल्द्वानी में हुई है, इसलिए रांची में प्राप्त शिकायत को जीरो एफआईआर के रूप में दर्ज कर संबंधित थाना क्षेत्र को भेजा जा सकता है। उन्होंने पुलिस से पूरे मामले की जांच कर उपलब्ध डिजिटल और दस्तावेजी साक्ष्यों को सुरक्षित रखने की मांग की। विजय शंकर नायक ने कहा कि यह केवल कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे के सम्मान का प्रश्न नहीं है, बल्कि दलित सम्मान, सामाजिक न्याय और संवैधानिक मूल्यों से जुड़ा विषय है। उन्होंने कहा कि जाति के आधार पर किसी भी व्यक्ति के साथ अपमान या भेदभाव की स्थिति स्वीकार्य नहीं होनी चाहिए। उन्होंने अनुसूचित जाति/अनुसूचित जनजाति थाना प्रभारी से मांग की कि उनके आवेदन पर तत्काल जीरो एफआईआर दर्ज कर उसे संबंधित थाना क्षेत्र को प्रेषित किया जाए। साथ ही पूरे मामले की निष्पक्ष जांच करते हुए दोषी पाए जाने वाले व्यक्तियों के विरुद्ध SC/ST कानून सहित अन्य लागू कानूनी प्रावधानों के तहत कार्रवाई की जाए। नायक ने कहा कि संविधान प्रत्येक नागरिक को समान सम्मान और अधिकार प्रदान करता है। जाति के नाम पर अपमान और भेदभाव की मानसिकता के खिलाफ कानूनी और लोकतांत्रिक तरीके से आवाज उठाई जाती रहेगी।

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