
नेशनल प्रेस टाइम्स, ब्यूरो
बरेली। एसआरएमएस रिद्धिमा के प्रेक्षागृह में रविवार शाम नाटक ‘धर्म नीति नियति’ का मंचन हुआ। डॉ. प्रभाकर गुप्ता द्वारा लिखित, अश्वनी कुमार द्वारा नाट्य रूपांतरित और अम्बुज कुकरेती व विनायक कुमार श्रीवास्तव द्वारा निर्देशित इस नाटक में महाभारत के उस निर्णायक दौर का विश्लेषण किया गया, जब युद्ध के बीज बोए जा चुके थे।
नाटक की कथा उस समय से शुरू होती है, जब श्रीकृष्ण पांडवों के शांति दूत बनकर हस्तिनापुर आते हैं। राजसी वैभव और दुर्योधन के आतिथ्य को छोड़कर वे विदुर की कुटिया में ठहरते हैं। यहां सत्ता और वैभव के सामने प्रेम और सत्य की शक्ति को प्रभावशाली ढंग से दिखाया गया है। विदुर की पत्नी सुलभा भक्ति में लीन होकर कृष्ण को फल के छिलके खिला देती हैं और कृष्ण प्रेमवश उन्हें स्वीकार कर लेते हैं। राजसभा के दृश्य में कृष्ण युद्ध रोकने का अंतिम प्रयास करते हैं। बात अधिकार से शुरू होकर पांच गांव तक आ जाती है, लेकिन दुर्योधन का अहंकार कोई समझौता स्वीकार नहीं करता। धृतराष्ट्र पुत्र-मोह और राजधर्म के बीच उलझे रहते हैं, वहीं भीष्म, द्रोण, कृपाचार्य और विदुर सत्य और नीति की आवाज बनते हैं।
नाटक सवाल उठाता है कि क्या विनाश केवल युद्ध के मैदान में होता है या उसकी शुरुआत तभी हो जाती है, जब मनुष्य सत्य जानते हुए भी मौन रह जाता है। एक दृश्य में दुर्योधन के उत्तर से आहत होकर विदुर महामंत्री पद से इस्तीफा दे देते हैं। अंतिम दृश्य में युद्ध के बाद संजय अपनी दिव्य दृष्टि से धृतराष्ट्र को कौरवों के विनाश की सूचना देते हैं। अंत में विदुर के समझाने पर धृतराष्ट्र, गांधारी और कुंती मोह त्याग कर वानप्रस्थ की ओर चले जाते हैं।
नाटक में विदुर की भूमिका पंकज कुकरेती ने, कृष्ण की गौरव कार्की ने, सुलभा की चेष्टा मौर्य ने और धृतराष्ट्र की संजय सिंह ने निभाई। अन्य भूमिकाओं में विनायक श्रीवास्तव, सोहम, हृदयांश उपाध्याय, जितिन कुमार, प्रियांशु दुबे, कमल शर्मा, हर्ष यादव, शत्रुघ्न शर्मा, अनमोल मिश्रा और सोनालिका सक्सेना रहे। वॉइस ओवर डॉ. अनुज कुमार का रहा।
इस अवसर पर एसआरएमएस ट्रस्ट के चेयरमैन देव मूर्ति, आशा मूर्ति, आदित्य मूर्ति, ऋचा मूर्ति, डॉ. प्रभाकर गुप्ता सहित शहर के कई गणमान्य और नाट्य प्रेमी मौजूद रहे।




