बेतुल
बैतूल मंत्रालय जैसा वेतनमान और सीपीसीटी से राहत की मांग
मध्यप्रदेश लिपिक वर्गीय शासकीय कर्मचारी संघ ने भाजपा प्रदेश अध्यक्ष को सौंपा ज्ञापन

नेशनल प्रेस टाइम्स, ब्यूरो
बैतूल। मैदानी लिपिकों की वर्षों पुरानी वेतन विसंगति दूर करने और अनुकंपा नियुक्ति पर पदस्थ सहायक ग्रेड-3 कर्मचारियों को सीपीसीटी की अनिवार्यता से राहत दिलाने की मांग को लेकर मध्यप्रदेश लिपिक वर्गीय शासकीय कर्मचारी संघ की बैतूल जिला इकाई ने गणेश चतुर्थी के अवसर पर भाजपा प्रदेश अध्यक्ष एवं बैतूल विधायक हेमंत खंडेलवाल को ज्ञापन सौंपा। संघ ने दोनों मांगों के निराकरण के लिए शासन स्तर पर प्रभावी पहल की मांग की। हेमंत खंडेलवाल ने प्रतिनिधिमंडल की बात गंभीरता से सुनते हुए मुख्यमंत्री से चर्चा करने और अपनी ओर से अनुशंसा पत्र भेजने का आश्वासन दिया।
संघ के जिलाध्यक्ष कमलेश चौहान ने बताया कि भारतीय संविधान के अनुच्छेद 39 (घ) में समान कार्य-समान वेतन का प्रावधान है, लेकिन विभागाध्यक्ष एवं अधीनस्थ कार्यालयों में कार्यरत मैदानी लिपिकों को मंत्रालय के लिपिकों के समान वेतनमान और समयमान वेतनमान का लाभ नहीं मिल रहा है। इससे कर्मचारियों में असंतोष है। संघ ने वित्त विभाग के 24 जनवरी 2008 तथा 28 फरवरी/4 मार्च 2013 के आदेशों का हवाला देते हुए मैदानी लिपिकों को भी द्वितीय उच्चतर समयमान वेतनमान 5500-9000 का लाभ देने की मांग की है।
ज्ञापन के अनुसार मैदानी कार्यालयों में सहायक ग्रेड-3 को प्रारंभिक स्तर पर 5200-20200 प्लस 1900 ग्रेड पे और प्रथम उच्चतर समयमान में 2400 ग्रेड पे मिलता है। द्वितीय उच्चतर समयमान में 2800 ग्रेड पे तथा तृतीय समयमान में 3200 ग्रेड पे मिलता है। इसके विपरीत मंत्रालय के सहायक ग्रेड-3 को 9300-34800 प्लस 3600 ग्रेड पे तथा 1246 रुपए प्रतिमाह मंत्रालय भत्ता और तृतीय समयमान में 4200 ग्रेड पे व मंत्रालय भत्ता मिलता है। संघ का कहना है कि मैदानी लिपिक भी मंत्रालय के लिपिकों की तरह महत्वपूर्ण प्रशासनिक दायित्व निभा रहे हैं, इसलिए वेतनमान में समानता की जानी चाहिए।
संघ की दूसरी प्रमुख मांग अनुकंपा नियुक्ति पर पदस्थ सहायक ग्रेड-3 कर्मचारियों को कंप्यूटर दक्षता प्रमाणीकरण परीक्षा यानी सीपीसीटी की अनिवार्यता से राहत देने की है। संघ के अनुसार अनुकंपा नियुक्ति नियम की कंडिका 6.5 के कारण सीपीसीटी परीक्षा उत्तीर्ण नहीं कर पाने वाले कर्मचारियों की सेवाएं समाप्त होने की स्थिति बन रही है। इससे मृत कर्मचारियों के आश्रित परिवारों के सामने भरण-पोषण का संकट खड़ा हो रहा है। संघ ने कहा कि 12वीं या बीए जैसी योग्यता के आधार पर अनुकंपा नियुक्ति पाने वाले कर्मचारियों से सीपीसीटी की अनिवार्यता के कारण परेशानी पैदा हो रही है, जबकि वे इलेक्ट्रॉनिक्स, कंप्यूटराइज्ड स्टोरिंग, आईएफएमआईएस, डेटाबेस सिस्टम, ऑनलाइन कार्यपद्धति, आरटीआई, बजट, ऑडिट और विधानसभा से जुड़े जटिल कार्यों का कुशलतापूर्वक निर्वहन कर रहे हैं।
संघ ने मांग की है कि अनुकंपा नियुक्त सहायक ग्रेड-3 कर्मचारियों को तीन माह का सीपीसीटी प्रशिक्षण देकर विभागीय परीक्षा आयोजित की जाए। कंडिका 6.5 में सेवा पृथक्करण के प्रावधान को विलोपित किया जाए तथा सीपीसीटी के अभाव में जिन अनुकंपा नियुक्त कर्मचारियों की सेवाएं समाप्त की गई हैं, उन्हें वापस सेवा में बहाल किया जाए। साथ ही 40 वर्ष से अधिक आयु के कर्मचारियों को टाइपिंग परीक्षा की तरह सीपीसीटी से छूट देने और मृत कर्मचारियों के आश्रितों के लिए अनुकंपा नियुक्ति प्रक्रिया सरल करने की मांग की गई है।
ज्ञापन प्राप्त करने के बाद भाजपा प्रदेश अध्यक्ष एवं बैतूल विधायक हेमंत खंडेलवाल ने कर्मचारी प्रतिनिधिमंडल की दोनों मांगों को गंभीरता से सुना और समझा। उन्होंने आश्वासन दिया कि वे इस मामले में मुख्यमंत्री से चर्चा करेंगे तथा अपनी ओर से अनुशंसा पत्र लिखकर समस्याओं के उचित निराकरण का प्रयास करेंगे।
ज्ञापन सौंपने के दौरान जिलाध्यक्ष कमलेश चौहान के साथ मनीष उदासी, संदीप पाटिल, नंदकिशोर राठौर, सुरेंद्र कुमार इदनानी, रामराव सलाम, कैलाश कुमार दरवाई, दिनेश खड़से, दिलीप टेकाम, तारेन्द्र बचले, गुलाबराव डोंगरे, सुरेश कुमार पांसे, ललित खंडाग्रे, नीलेश चढोकार, धर्मेश कुमरे, पुरुषोत्तम निमोदा, नामदेव पोटफोड़े, पल्लव दुबे, संजय सलाम, दीप नारायण राज, रोहित उइके, संजीव वर्मा, बी.डी. झरबड़े, के.के. दरवाई, टी.आर. बचले और सुरेश कुमार सहित बड़ी संख्या में लिपिक कर्मचारी मौजूद रहे।



