असम

भारत सर्वोत्तम ट्रस्ट ,हरियाणा के सौजन्य में और विश्वनाथ चारिआलि राष्ट्रभाषा प्रबोध विद्यालय परिचालना समिति 

विश्वनाथ (असम) के सहयोग से आज “साहित्यकार सम्मान समारोह - 2026" का आयोजन

विश्वनाथ के आठ साहित्यकार होंगे हिंदी के महान साहित्यकार के नाम से अलंकृत

नेशनल प्रेस टाइम्स, ब्यूरो।

विश्वनाथ  :- भारत सर्वोत्तम ट्रस्ट ,हरियाणा के तत्वावधान और विश्वनाथ चारिआलि राष्ट्रभाषा प्रबोध विद्यालय परिचालना समिति के सहयोग से कल विश्वनाथ चारिआल पौरसभा के सभागृह में “ सारस्वत सम्मान समारोह” का आयोजित किया जाएगा। जिसमें हिंदी के महान साहित्यकार “मोहन राकेश सम्मान ” से अलंकृत विश्वनाथ के वरिष्ठ साहित्यकार, सेवानिवृत्त हिंदी अध्यापक तथा प्रचारक शंकर प्रसाद साहू , “बाल मुकुंद गुप्त सम्मान ” से अलंकृत विश्वनाथ के वरिष्ठ साहित्यकार सेवानिवृत्त हिंदी अध्यापक हरि लुइँटेल (उपाध्याय) “डाॅ.रामनिवास गुप्त सम्मान ” से अलंकृत विश्वनाथ के साहित्यकार , हिंदी शिक्षक तथा कवि चित्र प्रसाद पौड़ेल ,
“सुभद्रा कुमारी चौहान सम्मान”  से अलंकृत विश्वनाथ के हिंदी शिक्षिका ,कवयित्री तथा प्रचारिका ऊषा साहू , “महादेवी वर्मा सम्मान ” से अलंकृत” विश्वनाथ के कवयित्री , लघुकथाकार , हिंदी शिक्षिका और प्रचारिका मनीषा पॉल ‘मनस्वी’, “मन्नू भंडारी सम्मान” से अलंकृत ”विश्वनाथ के कवयित्री , बाल साहित्यकार , हिंदी शिक्षिका और प्रचारिका सैयदा आनोवारा खातुन ,“भारतेंदु हरिश्चंद्र सम्मान” से अलंकृत विश्वनाथ के हिंदी सेवी,टं पत्रकार , कवि , हिंदी शिक्षक तथा प्रचारक संतोष कुमार महतो और“मैथिली शरण गुप्त सम्मान” से अलंकृत विश्वनाथ के कवि , लेखक तथा हिंदी शिक्षक , सुजीत कुमार शर्मा होंगे। इस अवसर पर मुख्य अतिथि के रूप में भारत सर्वोत्तम ट्रस्ट के महासचिव प्रो. (डॉ.) विपिन गुप्ता , अतिथि के रूप में राजीव गांधी विश्वविद्यालय के हिंदी विभाग के सहायक आचार्य डॉ. राजीव रंजन प्रसाद , तेजपुर विश्वविद्यालय के हिंदी विभाग के वरिष्ठ सहायक आचार्य डॉ० अनुशब्द , विश्वनाथ चारिआलि पौरसभा के पौरपति अमरज्योति बरठाकुर , अतिथि ,समिति के सलाहकार,अध्यक्ष प्रभुनाथ सिंह , सचिव संतोष कुमार महतो,कार्यकरी अध्यक्ष सूर्य नारायण पांडे ,उपाध्यक्ष विनोद कुमार गुप्ता,कोषाध्यक्ष छेदीलाल कुर्मी , सदस्य -सदस्या , विद्यार्थी ,साहित्यकार ,प्रचारक और गणमान्य व्यक्ति उपस्थित रहेंगे।उक्त सम्मान साहित्यकार को अपनी लेखनी, साधना और दूरदर्शिता के माध्यम से हिंदी भाषा को समृद्ध करने के साथ-साथ पूर्वोत्तर भारत की भाषाओं के साहित्य को भी राष्ट्रीय पटल पर विशिष्ट पहचान दिलाने और पूर्वोत्तर की सांस्कृतिक धरोहर, लोक-जीवन और भाषाई सौंदर्य को मुख्यधारा के साथ जोड़ने का आपका भागीरथ प्रयास राष्ट्र की भाषाई एकता को मजबूत सेतु साबित करने हेतु प्रदान किया जा रहा है।

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