मालपहाड़ी ओपी के नये भवन के साथ पूर्ण थाना का दर्जा देने की उठी मांग, सड़क से तीन फीट नीचे हुआ परिसर, भूमि उपलब्धता का मामला बना रोड़ा
Demand raised to upgrade Malpahari Outpost to a full-fledged police station along with a new building; the premises currently sit three feet below road level, while land availability has become a hurdle.

नेशनल प्रेस टाइम्स ब्यूरो।
पाकुड़। झारखण्ड सरकार की ओर से पुलिस प्रशासन को आधुनिक और हाईटेक बनाने तथा सुरक्षा व्यवस्था को और मजबूत करने के लिए लगातार प्रयास किए जा रहे हैं। इसके तहत नये थाना भवनों का निर्माण, नये थानों की स्थापना, सीसीटीवी कैमरों की व्यवस्था और आधुनिक पुलिसिंग से जुड़े विभिन्न उपकरण उपलब्ध कराने पर जोर दिया जा रहा है। पुलिस विभाग को अत्याधुनिक सुविधाओं से लैस बोलेरो वाहन के साथ बाइक भी उपलब्ध कराई गई है। पाकुड़ जिला पुलिस को भी इन सुविधाओं से सुसज्जित किया गया है। जिले में नये थाना भवनों के निर्माण की कवायद लंबे समय से जारी है। बीते वर्षों में महेशपुर, हिरणपुर और नगर थाना को नये भवन उपलब्ध कराए जा चुके हैं। वही सिमलौंग ओपी और मालपहाड़ी ओपी अब भी नये भवन की प्रतीक्षा में हैं। दोनों स्थानों पर वर्तमान भवनों की स्थिति को देखते हुए नये भवन की आवश्यकता लगातार महसूस की जा रही है। मालपहाड़ी ओपी का वर्तमान भवन समय के साथ सड़क से करीब तीन फीट नीचे हो गया है, जबकि सड़क का स्तर लगभग तीन फीट ऊंचा हो चुका है। इससे भवन की स्थिति और भी असुविधाजनक हो गई है। ऐसे में नये भवन का निर्माण जरूरी माना जा रहा है। मालपहाड़ी ओपी के नये भवन के निर्माण की दिशा में पूर्व पुलिस अधीक्षक प्रभात कुमार के कार्यकाल में पहल शुरू हुई थी। उनके स्थानांतरण के बाद एसपी निधि द्विवेदी के कार्यकाल में भी इस दिशा में प्रयास किए गये, लेकिन उनका भी स्थानांतरण हो गया। अब जिले के वर्तमान पुलिस अधीक्षक अनुदीप सिंह से उम्मीद की जा रही है कि वे मालपहाड़ी ओपी और सिमलौंग ओपी के नये भवन निर्माण की दिशा में प्रभावी पहल करेंगे। बताया जा रहा है कि मालपहाड़ी ओपी के भवन निर्माण में भूमि उपलब्धता से जुड़ा मामला लंबित रहने के कारण प्रक्रिया आगे नहीं बढ़ पा रही है। ऐसे में जिला प्रशासन को पुलिस विभाग के साथ समन्वय स्थापित कर आवश्यक भूमि उपलब्ध कराने की दिशा में पहल करनी चाहिए, ताकि भवन निर्माण का रास्ता साफ हो सके। आधुनिक दौर में पुलिस प्रशासन को बेहतर और प्रभावी बनाने के लिए थाना भवनों का सुरक्षित और सुविधाजनक होना भी जरूरी है। नये भवन में पुलिसकर्मियों के लिए बेहतर कार्यस्थल के साथ आम लोगों को भी पुलिस से सम्बन्धित सेवाएं अधिक व्यवस्थित तरीके से उपलब्ध कराई जा सकती है। इसलिए मालपहाड़ी ओपी/ सिमलौंग ओपी के भवन निर्माण को प्राथमिकता दिए जाने की जरूरत महसूस की जा रही है।
जर्जर पुलिस निरीक्षक कार्यालय भी चिंता का विषय
पाकुड़ प्रखण्ड परिसर/ कैंपस में स्थित पुलिस निरीक्षक कार्यालय की स्थिति भी जर्जर बताई जा रही है। भवन की स्थिति ऐसी है कि इसके कभी भी क्षतिग्रस्त होने की आशंका बनी हुई है। महत्वपूर्ण बात यह है कि इस भवन में पुलिस प्रशासन से सम्बन्धित जरूरी फाइलें और दस्तावेज रखे होने की बातें कही जा रही है। पुलिस निरीक्षक कार्यालय भवन की जर्जर स्थिति को देखते हुए पुलिस प्रशासन को महत्वपूर्ण फाइलों और कागजात को तत्काल सुरक्षित स्थान पर स्थानांतरित करने की पहल करनी चाहिए। वैकल्पिक व्यवस्था के तौर पर नगर थाना परिसर में मौजूद पुलिस निरीक्षक कार्यालय में आवश्यक दस्तावेजों को सुरक्षित तरीके से रखने पर भी विचार किया जा सकता है।
40-45 वर्षों से संचालित है मालपहाड़ी ओपी
बताया जाता है कि मालपहाड़ी ओपी की स्थापना करीब 40 से 45 वर्ष पूर्व हुई थी। क्षेत्र में बढ़ती आबादी और बदलती आवश्यकताओं को देखते हुए अब इसे पूर्ण थाना का दर्जा देने की मांग भी जोर पकड़ रही है। स्थानीय स्तर पर यह महसूस किया जा रहा है कि मालपहाड़ी ओपी को पूर्ण थाना का दर्जा मिलने से क्षेत्र की बड़ी आबादी को पुलिस सेवा और सुरक्षा व्यवस्था से जुड़ी सुविधाएं अधिक प्रभावी तरीके से उपलब्ध हो सकेंगी। साथ ही पूर्ण थाना का दर्जा मिलने से पुलिस बल, संसाधन और प्रशासनिक व्यवस्था को बेहतर तरीके से विकसित करने का अवसर भी मिल सकता है। इससे क्षेत्र में पुलिसिंग को और प्रभावी बनाने में मदद मिलने की उम्मीद है। वही मालपहाड़ी ओपी को पूर्ण थाना का दर्जा दिलाने और नये थाना भवन के निर्माण के लिए स्थानीय जनप्रतिनिधियों से भी आवश्यक पहल करने की अपेक्षा की जा रही है। पुलिस विभाग और जिला प्रशासन के साथ समन्वय स्थापित कर इस मामले को उच्च स्तर तक पहुंचाने में जनप्रतिनिधियों की भूमिका महत्वपूर्ण हो सकती है। फिलहाल मालपहाड़ी ओपी/ सिमलौंग ओपी के नये भवन का निर्माण, भूमि उपलब्धता और मालपहाड़ी ओपी को पूर्ण थाना का दर्जा दिए जाने का मुद्दा स्थानीय स्तर पर महत्वपूर्ण माना जा रहा है। अब देखना होगा कि पुलिस प्रशासन, जिला प्रशासन और स्थानीय जनप्रतिनिधि इस दिशा में कब तक ठोस पहल करते हैं।



