कैराना
चचेरे भाई को बचाते समय कुंड में समाया छात्र
यमुना ब्रिज के निकट हादसा, नौ वर्षीय बालक की बचाई गई जान, छात्र का शाम तक नहीं लगा सुराग
बरेली जिले से पानीपत में रहता है परिवार, हादसे से मचा कोहराम
नेशनल प्रेस टाइम्स, ब्यूरो।
कैराना। भाद्रपद माह की शुक्ल पक्ष पूर्णिमा के अवसर पर यमुना नदी में स्नान के दौरान दर्दनाक हादसा हो गया। नौ वर्षीय बालक गहरे पानी में डूबने लगा, तो उसे बचाने के लिए आगे बढ़ा उसका 18 वर्षीय चचेरा भाई छात्र कुंड में समा गया। तैराक युवक ने बालक को सकुशल बाहर निकाल लिया, लेकिन छात्र का शाम तक कोई सुराग नहीं लग सका। करीब एक दर्जन गोताखोर शाम तक सर्च अभियान में जुटे रहे। हादसे से परिजनों में कोहराम मचा हुआ है।
बरेली जिले के अलीगंज क्षेत्र के गांव मंसापुर निवासी नरदेव और अरविंद अपने परिवारों के साथ हरियाणा के पानीपत के तहसील कैंप क्षेत्र में रहते हैं। दोनों ई-रिक्शा चलाकर परिवार का पालन-पोषण करते हैं। शनिवार सुबह करीब सवा नौ बजे भाद्रपद माह की शुक्ल पक्ष पूर्णिमा के अवसर पर दोनों परिवारों और आसपास रहने वाले करीब 20 लोग यमुना स्नान के लिए कैराना पहुंचे थे। स्नान के दौरान अरविंद का नौ वर्षीय पुत्र विवेक अचानक गहरे पानी में डूबने लगा। यह देखकर यमुना में मौजूद उसके चचेरे भाई एवं नरदेव का 18 वर्षीय पुत्र विमल उसे बचाने के लिए आगे बढ़ा। इसी दौरान विमल गहरे कुंड में समा गया। परिवार के लोगों ने शोर मचा दिया। यमुना पर मौजूद इस्लामनगर निवासी इनाम अंसारी ने अपने तैराक भाई कुर्बान को पानी में छलांग लगवा दी। कुर्बान ने विवेक को सकुशल बाहर निकाल लिया, लेकिन विमल का कोई पता नहीं चल सका। हादसे की सूचना पुलिस को दी गई। पुलिस ने निजी गोताखोरों को बुलाया। करीब एक दर्जन गोताखोरों ने यमुना में विमल की तलाश शुरू की। इनमें एक गोताखोर के पास ऑक्सीजन सिलेंडर भी था। एसडीएम शिवाजी यादव, सीओ हेमंत कुमार और कोतवाली प्रभारी निरीक्षक सतीश कुमार भी यमुना पर पहुंचे। अधिकारियों ने परिजनों से हादसे की जानकारी ली और गोताखोरों को सर्च अभियान में तेजी लाने के निर्देश दिए। शाम करीब पांच बजे तक भी विमल का कोई सुराग नहीं लग सका।
बिलखती मां बोली- यमुना मैया, मेरा लाल लौटा दे
विमल की मां सर्वेश यमुना किनारे बैठकर बिलखती रही। वह हाथ जोड़कर भगवान से अपने बेटे की सलामती की प्रार्थना कर रही थी। रोते—रोते उसकी हालत बिगड़ गई और वह बेहोश भी हो गई। परिवार के लोगों ने किसी तरह उसे संभाला। मां बार—बार यमुना की ओर देखते हुए यही कहती रही कि यमुना मैया उसका लाल लौटा दे। वहीं, हादसे से पिता नरदेव का भी रो—रोकर बुरा हाल था।
छटपटाते हाथ दिखे तो बचाया विवेक, विमल का नहीं चला पता
परिवार के सदस्य रतनलाल ने बताया कि हादसे से कुछ समय पहले वह यमुना में स्नान कर कपड़े बदल चुके थे और प्रसाद लेने के लिए जा रहे थे। तभी डूबने का शोर मचा। विवेक पानी के अंदर छटपटा रहा था और उसके हाथ दिखाई दे रहे थे। इसी वजह से तैराक ने उसे देख लिया और पानी में उतरकर उसकी जान बचा ली। दूसरी ओर विमल जिस स्थान पर डूबा, वहां उसका कुछ पता नहीं चल सका और वह गहरे कुंड में समा गया।
पुलिस पर देरी का आरोप, मुआवजे की भी गुहार
रतनलाल ने बताया कि हादसे की सूचना पुलिस को दी गई थी। आरोप है कि करीब आधे घंटे बाद पुलिस मौके पर पहुंची। इसके बाद गोताखोरों को बुलाया गया। हादसा सवा नौ बजे हुआ था, जबकि करीब 11 बजे निजी गोताखोरों ने युवक की तलाश शुरू की। परिवार की मांग है कि किसी तरह विमल को तलाश कर बाहर निकाला जाए। साथ ही, सरकार से पीड़ित परिवार को मुआवजा दिए जाने की भी गुहार लगाई।
गोताखोर तैनात होते तो बच सकती थी जान
यमुना पर गोताखोरों की कोई स्थायी या संविदा पर नियुक्ति नहीं है। यदि मौके पर गोताखोर उपलब्ध होते तो हादसे के तुरंत बाद सर्च अभियान शुरू किया जा सकता था। बताया गया है कि तलाश के दौरान ऑक्सीजन सिलेंडर भी खत्म हो गया, जिसके चलते अभियान रोकना पड़ा। हादसे वाली जगह पर करीब 20 से 25 फीट गहरा कुंड बताया जा रहा है। ऐसे में ऑक्सीजन सिलेंडर के बिना गहराई में उतरकर तलाश करना मुश्किल हो रहा था।
चचेरे भाई से था लगाव, इसलिए बढ़ा मौत की ओर
विमल अपने चचेरे भाई विवेक से बेहद लगाव रखता था। दोनों के बीच छोटे—बड़े भाई जैसा स्नेह था। विवेक को गहरे पानी में डूबते देखकर विमल खुद को रोक नहीं पाया और उसे बचाने के लिए आगे बढ़ गया। उसे अंदाजा नहीं था कि विवेक की मदद के लिए बढ़ाए गए अगले दो कदम उसे गहरे कुंड में ले जाएंगे। विवेक को बचाने की कोशिश में विमल खुद पानी में समा गया और देखते ही देखते आंखों से ओझल हो गया।
विवेक दूसरी कक्षा का छात्र, विमल 11वीं में पढ़ता था
बताया गया है कि विवेक दूसरी कक्षा का छात्र है, जबकि विमल पानीपत में 11वीं कक्षा में पढ़ाई करता था। विमल दो भाइयों में बड़ा था। उसकी तीन बड़ी बहनें और एक छोटी बहन हैं। तीनों बड़ी बहनों की शादी हो चुकी है। विवेक परिवार में तीन भाइयों में से एक है। दोनों परिवार करीब डेढ़ दशक से पानीपत में रह रहे हैं। देर शाम तक परिजन यमुना किनारे विमल के मिलने की आस लगाए बैठे रहे।
बरेली जिले के अलीगंज क्षेत्र के गांव मंसापुर निवासी नरदेव और अरविंद अपने परिवारों के साथ हरियाणा के पानीपत के तहसील कैंप क्षेत्र में रहते हैं। दोनों ई-रिक्शा चलाकर परिवार का पालन-पोषण करते हैं। शनिवार सुबह करीब सवा नौ बजे भाद्रपद माह की शुक्ल पक्ष पूर्णिमा के अवसर पर दोनों परिवारों और आसपास रहने वाले करीब 20 लोग यमुना स्नान के लिए कैराना पहुंचे थे। स्नान के दौरान अरविंद का नौ वर्षीय पुत्र विवेक अचानक गहरे पानी में डूबने लगा। यह देखकर यमुना में मौजूद उसके चचेरे भाई एवं नरदेव का 18 वर्षीय पुत्र विमल उसे बचाने के लिए आगे बढ़ा। इसी दौरान विमल गहरे कुंड में समा गया। परिवार के लोगों ने शोर मचा दिया। यमुना पर मौजूद इस्लामनगर निवासी इनाम अंसारी ने अपने तैराक भाई कुर्बान को पानी में छलांग लगवा दी। कुर्बान ने विवेक को सकुशल बाहर निकाल लिया, लेकिन विमल का कोई पता नहीं चल सका। हादसे की सूचना पुलिस को दी गई। पुलिस ने निजी गोताखोरों को बुलाया। करीब एक दर्जन गोताखोरों ने यमुना में विमल की तलाश शुरू की। इनमें एक गोताखोर के पास ऑक्सीजन सिलेंडर भी था। एसडीएम शिवाजी यादव, सीओ हेमंत कुमार और कोतवाली प्रभारी निरीक्षक सतीश कुमार भी यमुना पर पहुंचे। अधिकारियों ने परिजनों से हादसे की जानकारी ली और गोताखोरों को सर्च अभियान में तेजी लाने के निर्देश दिए। शाम करीब पांच बजे तक भी विमल का कोई सुराग नहीं लग सका।
बिलखती मां बोली- यमुना मैया, मेरा लाल लौटा दे
विमल की मां सर्वेश यमुना किनारे बैठकर बिलखती रही। वह हाथ जोड़कर भगवान से अपने बेटे की सलामती की प्रार्थना कर रही थी। रोते—रोते उसकी हालत बिगड़ गई और वह बेहोश भी हो गई। परिवार के लोगों ने किसी तरह उसे संभाला। मां बार—बार यमुना की ओर देखते हुए यही कहती रही कि यमुना मैया उसका लाल लौटा दे। वहीं, हादसे से पिता नरदेव का भी रो—रोकर बुरा हाल था।
छटपटाते हाथ दिखे तो बचाया विवेक, विमल का नहीं चला पता
परिवार के सदस्य रतनलाल ने बताया कि हादसे से कुछ समय पहले वह यमुना में स्नान कर कपड़े बदल चुके थे और प्रसाद लेने के लिए जा रहे थे। तभी डूबने का शोर मचा। विवेक पानी के अंदर छटपटा रहा था और उसके हाथ दिखाई दे रहे थे। इसी वजह से तैराक ने उसे देख लिया और पानी में उतरकर उसकी जान बचा ली। दूसरी ओर विमल जिस स्थान पर डूबा, वहां उसका कुछ पता नहीं चल सका और वह गहरे कुंड में समा गया।
पुलिस पर देरी का आरोप, मुआवजे की भी गुहार
रतनलाल ने बताया कि हादसे की सूचना पुलिस को दी गई थी। आरोप है कि करीब आधे घंटे बाद पुलिस मौके पर पहुंची। इसके बाद गोताखोरों को बुलाया गया। हादसा सवा नौ बजे हुआ था, जबकि करीब 11 बजे निजी गोताखोरों ने युवक की तलाश शुरू की। परिवार की मांग है कि किसी तरह विमल को तलाश कर बाहर निकाला जाए। साथ ही, सरकार से पीड़ित परिवार को मुआवजा दिए जाने की भी गुहार लगाई।
गोताखोर तैनात होते तो बच सकती थी जान
यमुना पर गोताखोरों की कोई स्थायी या संविदा पर नियुक्ति नहीं है। यदि मौके पर गोताखोर उपलब्ध होते तो हादसे के तुरंत बाद सर्च अभियान शुरू किया जा सकता था। बताया गया है कि तलाश के दौरान ऑक्सीजन सिलेंडर भी खत्म हो गया, जिसके चलते अभियान रोकना पड़ा। हादसे वाली जगह पर करीब 20 से 25 फीट गहरा कुंड बताया जा रहा है। ऐसे में ऑक्सीजन सिलेंडर के बिना गहराई में उतरकर तलाश करना मुश्किल हो रहा था।
चचेरे भाई से था लगाव, इसलिए बढ़ा मौत की ओर
विमल अपने चचेरे भाई विवेक से बेहद लगाव रखता था। दोनों के बीच छोटे—बड़े भाई जैसा स्नेह था। विवेक को गहरे पानी में डूबते देखकर विमल खुद को रोक नहीं पाया और उसे बचाने के लिए आगे बढ़ गया। उसे अंदाजा नहीं था कि विवेक की मदद के लिए बढ़ाए गए अगले दो कदम उसे गहरे कुंड में ले जाएंगे। विवेक को बचाने की कोशिश में विमल खुद पानी में समा गया और देखते ही देखते आंखों से ओझल हो गया।
विवेक दूसरी कक्षा का छात्र, विमल 11वीं में पढ़ता था
बताया गया है कि विवेक दूसरी कक्षा का छात्र है, जबकि विमल पानीपत में 11वीं कक्षा में पढ़ाई करता था। विमल दो भाइयों में बड़ा था। उसकी तीन बड़ी बहनें और एक छोटी बहन हैं। तीनों बड़ी बहनों की शादी हो चुकी है। विवेक परिवार में तीन भाइयों में से एक है। दोनों परिवार करीब डेढ़ दशक से पानीपत में रह रहे हैं। देर शाम तक परिजन यमुना किनारे विमल के मिलने की आस लगाए बैठे रहे।