मनिरामपुर में शिक्षा व्यवस्था को लेकर उठी आवाज, मिडिल स्कूल में उत्क्रमण/ बालिका उच्च विद्यालय की स्थापना और मदरसा में शिक्षकों की नियुक्ति की मांग
Calls raised regarding the education system in Manirampur; demands made for upgrading the middle school, establishing a girls' high school, and appointing teachers to the madrasa.

नेशनल प्रेस टाइम्स ब्यूरो।
पाकुड़ प्रखण्ड अन्तर्गत पंचायत मनिरामपुर में शिक्षा व्यवस्था को बेहतर बनाने और बच्चों के ड्रॉपआउट पर रोक लगाने की मांग को लेकर नशा मुक्ति अभियान से जुड़े सदस्यों के एक प्रतिनिधिमंडल ने पूर्व ग्रामीण विकास मंत्री आलमगीर आलम से मुलाकात की। प्रतिनिधिमंडल ने (1) प्राथमिक विद्यालय मनिरामपुर (दक्षिण टोला) को मिडिल स्कूल में उत्क्रमित करने के लिए आवश्यक पहल करने की मांग की। वही बीते कई वर्षों से मनिरामपुर पंचायत स्थित (2) उत्क्रमित प्राथमिक विद्यालय (उत्तर टोला) को मिडिल स्कूल में बदलने की मांग प्रशासन के समक्ष रखी जाती रही है। इस दिशा में डॉ. शेख सैफुद्दीन और यूसुफ खान ने भी अपने स्तर से प्रशासन को ज्ञापन सौंपकर आवश्यक कार्रवाई की मांग की थी। हालांकि, अब तक इस मामले में कोई ठोस पहल सामने नहीं आई है। ग्रामीणों के अनुसार मनिरामपुर पंचायत के बच्चों को प्राथमिक स्तर की पढ़ाई पूरी करने के बाद मिडिल स्कूल के लिए लगभग दो किलोमीटर की दूरी तय करनी पड़ती है। छोटे बच्चों के लिए इतनी दूरी तय करना कठिन होने के कारण कई छात्र-छात्राएं आगे की पढ़ाई जारी नहीं रख पाते और बीच में ही स्कूल छोड़ देते हैं। इससे बच्चों के भविष्य और उनकी शिक्षा पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ रहा है। स्थानीय ग्रामीणों के अनुसार, वर्तमान समय में पंचायत में ही मिडिल स्कूल की सुविधा उपलब्ध होना आवश्यक है, ताकि बच्चों को प्रारंभिक शिक्षा के बाद आगे की पढ़ाई के लिए दूर नहीं जाना पड़े और स्कूल छोड़ने की समस्या पर अंकुश लगाया जा सके।
मदरसा में शिक्षकों की कमी का मुद्दा भी उठा
वही पंचायत मनिरामपुर स्थित (3) मदरसा जियाउल उलूम उलूम मनीरामपुर में शिक्षकों की कमी का मुद्दा भी गहराता जा रहा है। बताया जा रहा है कि मदरसा में लगभग आठ वर्ष पूर्व चार शिक्षक सेवानिवृत्त हुए थे। उनके स्थान पर नये शिक्षकों की नियुक्ति की प्रक्रिया अब तक पूरी नहीं हो सकी है। वर्तमान में महज दो शिक्षकों के भरोसे मदरसे की पढ़ाई संचालित होने की बात कही जा रही है। ग्रामीणों के अनुसार शिक्षकों की कमी का असर विद्यार्थियों की पढ़ाई पर पड़ रहा है। विशेष रूप से विज्ञान विषय की पढ़ाई प्रभावित होने की बात कही गई। स्थानीय ग्रामीणों ने जिला प्रशासन और सम्बन्धित विभाग से मामले में आवश्यक पहल करने की मांग की है।
बालिका उच्च विद्यालय की स्थापना की मांग
स्थानीय ग्रामीणों ने मनिरामपुर पंचायत में बालिका उच्च विद्यालय की स्थापना की मांग को भी प्रमुखता से उठाया था। बताया गया कि पूर्व में भी इस संबंध में दो बार आपकी योजना- आपकी सरकार, आपके द्वार कार्यक्रम के तहत मनिरामपुर पंचायत में लगे शिविर में ज्ञापन सौंपे जा चुके हैं। पंचायत में स्वास्थ्य केंद्र की मांग पूरी हो चुकी है, लेकिन बालिका उच्च विद्यालय की स्थापना को लेकर अब तक ठोस पहल नहीं हुई है। क्षेत्र के आम-जनों के अनुसार पाकुड़ रेलवे स्टेशन के आसपास बसे घनी आबादी वाले क्षेत्रों, जिसमें पाली- गगन पहाड़ी, मनिरामपुर और झिकरहाटी (पश्चिम) सहित अन्य क्षेत्र शामिल हैं, में बालिका उच्च विद्यालय की आवश्यकता महसूस की जा रही है। इन क्षेत्रों में बालिकाओं की शिक्षा की वास्तविक स्थिति का सर्वे कराया जाए तो विद्यालय की आवश्यकता का बेहतर आकलन किया जा सकता है। स्थानीय ग्रामीणों का कहना है कि क्षेत्र में बालिका उच्च विद्यालय स्थापित होने से आसपास की छात्राओं को माध्यमिक स्तर की शिक्षा के लिए दूर नहीं जाना पड़ेगा। इससे बालिकाओं की शिक्षा जारी रखने में सुविधा होगी और वे आगे उच्च शिक्षा हासिल करने के लिए भी प्रोत्साहित होंगी। क्षेत्र की स्थानीय आम-जनों का कहना है कि विद्यालय की कमी के कारण कई परिवारों की बेटियों की पढ़ाई बीच में ही रुक जाती है। ऐसे में क्षेत्र में बालिका उच्च विद्यालय की स्थापना शिक्षा के साथ-साथ सामाजिक और आर्थिक विकास की दिशा में भी महत्वपूर्ण कदम साबित हो सकती है। नशा मुक्ति अभियान, मनिरामपुर के प्रतिनिधिमंडल तथा स्थानीय नागरिकों ने पूर्व मंत्री आलमगीर आलम से मांग की कि मनिरामपुर में मिडिल स्कूल, बालिका उच्च विद्यालय तथा मदरसा में शिक्षकों की कमी से जुड़े मामलों को सम्बन्धित विभाग और जिला प्रशासन/ झारखण्ड सरकार के समक्ष उठाकर आवश्यक कार्रवाई सुनिश्चित कराने की दिशा में पहल की जाए। वही बच्चों के भविष्य और क्षेत्र के सर्वांगीण विकास हेतु शिक्षा के प्रति उपायुक्त मेघा भारद्वाज से आवश्यक प्रशासनिक कार्रवाई की उम्मीद की जा रही है।



