बालाघाट

घर-घर संपर्क से बच्चों को स्कूल से जोड़ने की पहल, धपेरा प्राथमिक शाला में गतिविधि आधारित शिक्षा पर जोर

नियमित उपस्थिति, स्वच्छता और रोचक शिक्षण पद्धति के जरिए विद्यार्थियों के सर्वांगीण विकास का प्रयास

नेशनल प्रेस टाइम्स, ब्यूरो

धपेरा मोहगांव। शासकीय प्राथमिक शाला धपेरा में विद्यार्थियों को नियमित रूप से विद्यालय आने और पढ़ाई के प्रति प्रेरित करने के लिए शिक्षक लगातार प्रयास कर रहे हैं। विद्यालय में बच्चों की उपस्थिति बढ़ाने के साथ स्वच्छता, गतिविधि आधारित शिक्षण और उनके सर्वांगीण विकास पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है।

प्रधानाध्यापक महेंद्र कुमार हरिनखेड़े द्वारा विद्यालय नहीं पहुंच पा रहे विद्यार्थियों के परिवारों से घर-घर संपर्क कर अभिभावकों को बच्चों की नियमित उपस्थिति के लिए प्रेरित किया जा रहा है। इस पहल का उद्देश्य बच्चों को शिक्षा की मुख्यधारा से जोड़े रखना और उनकी पढ़ाई में निरंतरता बनाए रखना है।

विद्यालय में विद्यार्थियों को व्यक्तिगत स्वच्छता, साफ-सफाई और स्वस्थ जीवनशैली के प्रति जागरूक किया जा रहा है। सेवा संकल्प अभियान एवं स्वच्छता अभियान के माध्यम से बच्चों में स्वच्छता के प्रति समझ और जिम्मेदारी की भावना विकसित करने का प्रयास किया जा रहा है।

पढ़ाई को सरल, रोचक और प्रभावी बनाने के लिए विद्यालय में ‘जादुई पिटारा’ सहित गतिविधि आधारित शिक्षण पद्धति का उपयोग किया जा रहा है। खेल और विभिन्न शैक्षणिक गतिविधियों के माध्यम से विषयों को समझाने पर जोर दिया जा रहा है, ताकि विद्यार्थियों की सीखने में रुचि बढ़े और वे सहजता से पढ़ाई कर सकें।

विद्यालय की शैक्षणिक गतिविधियों और व्यवस्थाओं को बेहतर बनाने में प्रधानाध्यापक के साथ शिक्षक पी.एस. रहांगडाले, श्रीमती नीलिमा नाग, चंद्र कुमार सिरसाम एवं राहुल चौहान भी सहयोग कर रहे हैं। विद्यालय में किए जा रहे इन प्रयासों से विद्यार्थियों की नियमित उपस्थिति और शिक्षा के प्रति रुचि बढ़ाने की दिशा में काम किया जा रहा है।

विद्यालय में किए जा रहे नवाचारों और शैक्षणिक प्रयासों के लिए जनशिक्षक ललित बिरनवार, जनशिक्षा केंद्र बिरसोला तथा प्रधानाध्यापक महेंद्र कुमार हरिनखेड़े को बधाई एवं शुभकामनाएं दी गई हैं।

धपेरा प्राथमिक शाला की यह पहल रेखांकित करती है कि बच्चों को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा से जोड़ने के लिए नियमित अध्यापन के साथ अभिभावकों से संवाद, स्वच्छता के प्रति जागरूकता और रोचक शिक्षण पद्धतियां भी महत्वपूर्ण हैं।

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