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अंतरिक्ष से भारत आज भी सारे जहां से अच्छा दिखता है

वॉशिंगटन । अंतरिक्ष में 18 दिनों तक वैज्ञानिक प्रयोग करने के बाद अब भारतीय अंतरिक्ष यात्री शुभांशु शुक्ला और उनके तीन अन्य साथी वापस आने को तैयार हैं। उन्हें आईएसएस में फेयरवेल दे दिया गया है। एक्सिओम-4 मिशन का यह दल सोमवार को पृथ्वी पर वापसी की तैयारी कर रहा है।
अंतरराष्ट्रीय अंतरिक्ष स्टेशन (आईएसएस) से ग्रुप कैप्टन शुभांशु शुक्ला ने कहा कि यह एक अविश्वसनीय यात्रा रही। यह एक जादू की तरह महसूस हुई। अंतरिक्ष से आज का भारत महत्वाकांक्षी, निडर, आत्मविश्वासी और गर्व से भरा हुआ दिखता है। उन्होंने 1984 स्पेस ओडिसी से राकेश शर्मा के प्रतिष्ठित शब्दों को दोहराते हुए कहा कि अंतरिक्ष से भारत आज भी ‘सारे जहाँ से अच्छा’ दिखता है।

अंतरिक्ष में 18 दिन बिताए
शुभांशु शुक्ला अंतरराष्ट्रीय अंतरिक्ष स्टेशन (आईएसएस) पर पहुंचने वाले भारत के पहले और अंतरिक्ष में जाने वाले दूसरे भारतीय हैं। शुभांशु शुक्ला ने अब तक अंतरिक्ष में 18 दिन बिताए हैं, जहां वे प्रतिदिन 16 बार सूर्योदय और सूर्यास्त देख रहे थे। आईएसएस पृथ्वी से लगभग 400 किमी ऊपर 28,000 किमी प्रति घंटे की रफ्तार से घूमता है।

विदाई समारोह में बोल रहे थे शुभांशु शुक्ला
शुभांशु शुक्ला ने अंतरराष्ट्रीय अंतरिक्ष स्टेशन (करर) पर एक्सिओम-4 मिशन के अंतरिक्ष यात्रियों के लिए आयोजित विदाई समारोह में बोल रहे थे। अंतरिक्ष यात्री सोमवार को पृथ्वी पर वापसी की यात्रा शुरू करने वाले हैं। 26 जून से शुरू हुए करर प्रवास के बारे में शुभांशु ने कहा कि यह मुझे जादू सा लगता है। यह मेरे लिए एक शानदार यात्रा रही है।

मंगलवार को कैलिफोर्निया तट पर उतरने की उम्मीद
भारतीय अंतरिक्ष यात्री ने कहा कि वह अपने साथ बहुत सारी यादें और सीख लेकर जा रहे हैं, जिन्हें वह अपने देशवासियों के साथ साझा करेंगे। एक्सिओम-4 मिशन सोमवार को करर से अलग होगा और इसके मंगलवार को कैलिफोर्निया तट पर उतरने की उम्मीद है।पायलट शुभांशु शुक्ला, कमांडर पैगी व्हिटसन और मिशन विशेषज्ञ स्लावोज उज्नान्स्की-विस्नीव्स्की और टिबोर कापू के साथ एक्सिओम-4 मिशन ने 25 जून को अपनी अंतरिक्ष यात्रा शुरू की थी। तब ड्रैगन स्पेस कैप्सूल ले जाने वाला फाल्कन-9 रॉकेट फ्लोरिडा से आईएसएस की ओर रवाना हुआ था। शुभांशु ने विदाई समारोह में भारत की अंतरिक्ष यात्रा के लिए गर्व, कृतज्ञता और आशा की भावना व्यक्त की।

अपने आदर्श राकेश शर्मा को याद किया
उन्होंने कहा, ‘यह एक शानदार यात्रा रही है। अब यह यात्रा समाप्त हो रही है। हमारी मानव अंतरिक्ष उड़ान की यात्रा बहुत लंबी है। यह कठिन भी है।’ उन्होंने एक संस्कृत वाक्यांश साझा करते हुए कहा, ‘लेकिन मैं आपको विश्वास दिलाता हूं कि अगर हम ठान लें, तो तारे भी पाए जा सकते हैं।’ अपने आदर्श राकेश शर्मा को याद करते हुए उन्होंने कहा कि 41 साल पहले एक भारतीय ने अंतरिक्ष की यात्रा की थी और बताया था कि वहां से भारत कैसा दिखता था।

सारे जहां से अच्छा
उन्होंने कहा, ‘हम सभी आज भी यह जानने के लिए उत्सुक हैं कि आज का भारत ऊपर से कैसा दिखता है। आज का भारत महत्वाकांक्षाओं से भरा दिखता है। आज का भारत निडर दिखता है, आज का भारत आत्मविश्वास से भरा दिखता है। आज का भारत गर्व से पूरा दिखता है। इसलिए मैं एक बार फिर कह सकता हूं कि आज का भारत आज भी ‘सारे जहां से अच्छा’ दिखता है। जल्दी ही धरती पर मुलाकात करते हैं।’

आप जैसे पेशेवरों के साथ काम करना मेरे लिए खुशी की बात
शुभांशु शुक्ला ने इस मिशन को संभव बनाने वाले लोगों के प्रति आभार व्यक्त किया। उन्होने कहा, ‘अंतरिक्ष स्टेशन पर मौजूद लोगों ने इसे अविश्वसनीय बना दिया है। आप जैसे पेशेवरों के साथ काम करना मेरे लिए खुशी की बात थी।’

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