गोड्डा

108 फीट कांवर यात्रा का गोड्डा में भव्य स्वागत

नेशनल प्रेस टाइम्स, व्यूरो
गोड्डा। सिंधाडी की ओर से बाबा बासुकीनाथ धाम जलार्पण के उद्देश्य से निकली 108 फीट लंबी कांवर यात्रा ने गोड्डा कॉलेज परिसर में प्रवेश किया। जहां हजारों की संख्या में उपस्थित श्रद्धालुओं ने इस अद्भुत कांवर का स्वागत किया। ऐतिहासिक महत्व और परंपरा कांवर यात्रा केवल धार्मिक अनुष्ठान नहीं, बल्कि आस्था, परंपरा और सामाजिक एकता का प्रतीक है। गोड्डा जिले में 2016 से इस विशेष कांवर यात्रा की शुरुआत हुई थी। पिछले वर्ष कांवर की लंबाई 54 फीट थी, वहीं इस बार श्रद्धालुओं और सहयोगियों के सामूहिक प्रयास से इसे दोगुना बढ़ाकर 108 फीट बनाया गया। कांवर बनाने में लगभग 15 दिनों का समय लगा और कई कारीगरों एवं स्थानीय श्रद्धालुओं ने इसमें सहयोग किया।गोड्डा कॉलेज मैदान में आयोजित स्वागत समारोह में भाजपा के पूर्व जिला अध्यक्ष सह अखिल भारतीय कुशवाहा महासभा के राष्ट्रीय सचिव राजीव मेहता, महासभा अध्यक्ष चंद्र शेखर सिंह, सचिव संजय कुशवाहा, कोषाध्यक्ष सुमन कुमार सिंह, सह सचिव पारसमणि कुशवाहा, सामाजिक कार्यकर्ता अमित कुमार सिंह, रजनीश कुमार, रेणु देवी और गायत्री देवी मौजूद थे।इनके साथ-साथ युवा नेता दिलीप कुशवाहा, मनोज मंडल, रौशन कुशवाहा, त्रिवेणी कुशवाहा और अन्य श्रद्धालु भी कांवरियों के स्वागत में शामिल हुए। सभी ने सामूहिक रूप से कांवरियों का फूल-मालाओं, ढोल-नगाड़ों और जयकारों के साथ जोरदार अभिनंदन किया। स्वागत के दौरान कांवरियों के लिए भोजन, जलपान, पेयजल और विश्राम की विशेष व्यवस्था की गई। स्थानीय लोगों ने भी श्रद्धालु कांवरियों को हर संभव सहयोग प्रदान किया। यह दृश्य देखते ही बनता था जब पूरा परिसर हर-हर महादेव के जयकारों से गूंज उठा।यह कांवर यात्रा कहलगांव चारो धाम से जल उठाकर शुरू हुई है। कांवरिए गोड्डा कॉलेज से आगे बढ़कर पोड़ैयाहाट, हसंडीहा एवं नोनीहाट मार्ग से गुजरेंगे। यात्रा लगभग 5 दिनों तक चलेगी और अंततः 3 सितंबर को बाबा बासुकीनाथ धाम पहुंचकर जल अर्पण के साथ संपन्न होगी।श्रद्धालुओं की प्रतिक्रिया कांवरिया सुमन कुमार सिंह ने बताया कि यह यात्रा हम सभी के लिए आस्था का पर्व है। उन्होंने कहा, “2016 से हम यह परंपरा निभा रहे हैं। हर साल कांवर की लंबाई में बढ़ोतरी की जाती है। पिछले साल यह 54 फीट थी, इस बार 108 फीट की कांवर बनाई गई है। यह केवल कांवर नहीं, बल्कि सामूहिक सहयोग और आस्था का प्रतीक है।”धार्मिक उत्साह का माहौल गोड्डा शहर में कांवर यात्रा के स्वागत से उत्सव का माहौल बन गया। जगह-जगह श्रद्धालु खड़े होकर कांवरियों का अभिनंदन कर रहे थे। ढोल, बाजा, शंखनाद और भक्ति गीतों के बीच कांवरियों की टोली ने अगले पड़ाव की ओर कदम बढ़ाए। यह यात्रा न केवल धार्मिक दृष्टिकोण से महत्वपूर्ण है, बल्कि यह सामाजिक एकजुटता, सामूहिक सहयोग और आस्था की गहरी जड़ों को भी दर्शाती है।
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