
पटना । मुख्य चुनाव आयुक्त के साथ आयोजित बैठक में भाजपा, कांग्रेस, जदयू, राजद और भाकपा (माले) लिबरेशन जैसे प्रमुख दलों को इस बैठक में शामिल होने की अनुमति दी गई है। प्रत्येक दल के अधिकतम तीन प्रतिनिधि बैठक में भाग ले सकेंगे।
बिहार चुनाव की तारीखों का एलान होने में अब कुछ ही दिन शेष रह गए हैं। लेकिन, इससे पहले मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार, चुनाव आयुक्त विवेक जोशी और एस. एस. संधू शनिवार से शुरू हो रहे दो दिवसीय दौरे पर पटना पहुंचेंगे। चुनाव की तैयारी में जुटे राजनीतिक दलों के साथ मीटिंग करेंगे। मतदाता सूची प्रारूप समेत कई मुद्दों पर वह राजनीतिक दलों की प्रतिनिधियों से फीडबैक लेंगे। यह जानकारी एक अधिकारी ने दी। मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार और इस दौरे का मकसद बिहार में आगामी विधानसभा चुनावों की तैयारियों की समीक्षा करना है। यह जानकारी चुनाव आयोग के अधिकारियों ने दी।
22 नवंबर को समाप्त हो रहा नीतीश सरकार का कार्यकाल- मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के नेतृत्व में चुनाव आयोग की टीम राष्ट्रीय और राज्य स्तरीय मान्यता प्राप्त राजनीतिक दलों के प्रतिनिधियों से फीडबैक लेगी। ऐसा माना जा रहा है कि विधानसभा चुनाव की तारीखों की घोषणा चुनाव आयोग जल्द ही कर सकता है। 243 सदस्यीय बिहार विधानसभा का कार्यकाल 22 नवंबर को समाप्त हो रहा है और राज्य में चुनाव अक्टूबर के अंत या नवंबर में कई चरणों में कराए जा सकते हैं।
सूची में इन पार्टियों के नाम हैं शामिल-अपर मुख्य निर्वाचन पदाधिकारी अमित कुमार पांडेय के द्वारा जारी किए गये पत्र में जिन राजनीतिक दलों के प्रतिनिधियों को बैठक में शामिल होने का निमत्रण मिला है, उनमें आम आदमी पार्टी (आप), बहुजन समाज पार्टी (बीएसपी), भारतीय जनता पार्टी, कम्युनिस्ट पार्टी आॅफ इंडिया (मार्क्ससिस्ट) – सीपीआई (एम), इंडियन नेशनल कांग्रेस, नेशनल पीपुल्स पार्टी , जनता दल (यूनाइटेड), राष्ट्रीय लोक जनशक्ति पार्टी, लोक जन शक्ति पार्टी (रामविलास), राष्ट्रीय जनता दल, राष्ट्रीय लोक समता पार्टी और कम्युनिस्ट पार्टी आॅफ इंडिया (मार्क्ससिस्ट-लेनिनिस्ट) लिबरेशन शामिल हैं।
30 सितंबर को बिहार की अंतिम मतदाता सूची प्रकाशित की थी-चुनाव आयोग ने 30 सितंबर को बिहार की अंतिम मतदाता सूची प्रकाशित की थी, जिसमें कुल 7.42 करोड़ मतदाताओं का विवरण दर्ज है। यह संख्या जून में शुरू की गई विशेष गहन पुनरीक्षण (रकफ) प्रक्रिया के मुकाबले 47 लाख से अधिक कम है। भाजपा नेतृत्व वाले एनडीए का कहना है कि यह प्रक्रिया जरूरी थी ताकि मतदाता सूची में मौजूद गड़बड़ियों को दूर किया जा सके, जिनमें कथित रूप से अवैध विदेशी प्रवासी भी शामिल हो सकते थे, वहीं विपक्ष ने इस प्रक्रिया को लेकर चुनाव आयोग पर शासन पक्ष के इशारे पर वोट चोरी का आरोप लगाया है।



