साहिबगंज कांग्रेसियों ने मौलाना अबुल कलाम आजाद की मनाईजयंती
Sahibganj Congress workers celebrated the birth anniversary of Maulana Abul Kalam Azad.

नेशनल प्रेस टाइम्स ब्यूरो।
साहिबगंज देश के प्रथम शिक्षा मंत्री भारत रत्न मौलाना अबुल कलाम आजाद की जयंती हर्षोल्लास के साथ जिला कांग्रेस कार्यालय साहिबगंज में मनाई गई मौके पर कांग्रेसजनों ने मौलाना आजाद के चित्र पर माल्यार्पण किया और पुष्प अर्पित कर श्रद्धा सुमन अर्पित किया.मौलाना आजाद की जयंती के अवसर पर जिला कांग्रेस कमिटी द्वारा एक गोष्ठी का आयोजन किया गया जिसकी अध्यक्षता जिला अध्यक्ष बरकतुल्लाह खान ने किया,इस अवसर पर कई वरिष्ठ कांग्रेसियों ने मौलाना आजाद के जीवन,कार्यों और उनके मूल्यों पर अपने विचार प्रकट किए.जिला महासचिव सरफ़राज़ आलम ने अपने विचार साझा करते हुए कहा कि मौलाना आजाद एक महान स्वतंत्रता सेनानी थे वह गांधी जी के अहिंसा के दर्शन से बेहद प्रभावित थे देश के प्रथम शिक्षा मंत्री के तौर पर शिक्षा के क्षेत्र में उनके अतुलनीय योगदान को कभी भुलाया नहीं जा सकता जिला उपाध्यक्ष मो कलीमुद्दीन ने अपने विचार साझा करते हुए कहा कि आज से ठीक 100 साल पहले 1923 में 35 वर्ष की आयु में वह भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस केअध्यक्ष के रूप में सेवा देने वाले सबसे कम उम्र के व्यक्ति बने शिक्षा किस क्षेत्र में उनके बहुमूल्य योगदान के लिए वह हमेशा याद किए जाते रहेंगे मौलाना आजाद का उद्देश्य जहां अंग्रेजों का विरोध था वही हिंदू मुस्लिम एकता और राष्ट्रीयता की भावना एवं मेल जोल पर हमेशा जोर देते रहे.शिक्षा के क्षेत्र में उनके द्वारा किए गए उत्कृष्ट कार्यो के चलते हर साल उनके जन्मदिन 11 नवंबर को राष्ट्रीय शिक्षा दिवस के रूप में मनाया जाता है पूर्व जिला अध्यक्ष अनुकूल मिश्रा ने कहा मौलाना आजाद भारत के प्रमुख स्वतंत्रता सेनानियों में से एक हैं आजादी की लड़ाई में वह कई बार जेल गए वह एक प्रकांड विद्वान के अलावा उच्च कोटि के लेखक भी थे उन्हें कई भाषाओं की जानकारी थी देश के प्रथम शिक्षा मंत्री के तौर पर उनकी बनाई गई नीतियों पर आज तक देश चल रहा है और आगे बढ़ रहा है जिला अध्यक्ष बरकतुल्लाह खान ने अपने विचारों को साझा करते हुए कहा कि आजादी की लड़ाई में मौलाना आजाद के योगदान को कभी भुलाया नहीं जा सकता साथ ही देश के प्रथम शिक्षा मंत्री के रूप में शिक्षा के क्षेत्र में उनका योगदान अनुकरणीय रहा है उन्होंने हमेशा शिक्षा के साथ-साथ संस्कृति को भी प्राथमिकता दिया.उन्होंने संगीत नाटक अकादमी,साहित्य अकादमी व ललित कला अकादमी की स्थापना की शिक्षा मंत्री के रूप में उनके कार्यकाल के दौरान ही देश में पहले IIT, IISc,स्कूल ऑफ प्लानिंग एंड आर्किटेक्चर और विश्वविद्यालय अनुदान आयोग की स्थापना की गई थी।मौलाना अबुल कलाम महात्मा गांधी के सिद्धांतों पर चलते थे वह अहिंसा में विश्वास करते थे।आजादी की लड़ाई एवं शिक्षा के क्षेत्र में उनके योगदान के लिए भारत की जनता हमेशा उनका सम्मान करती रहेगी.कार्यक्रम में अनुकूल मिश्रा,मो कलीमुद्दीन,बासुकीनाथ यादव, सरफराज आलम,उमेश कुमार पांडे, रामसिंगार ओझा,राजेश सिंह,सतीश कुमार पासवान,औरंगजेब,सब्दुल अंसारी,देवराज सिंह,आफताब आलम उर्फ चिंटू,अल्ताफ़ हुसैन,जाकिर हुसैन, संजय चौधरी,गुफरान आलम,अजीज अंसारी,मज़हर खान,मो मेराजुद्दीन, कार्तिक साह,सूरज पासवान एवं दर्जनों कांग्रेसजन शामिल थे।



