गाजियाबाद

आनंद बिहार बस अड्डे पर डग्गामारी प्राइवेट टैक्सियों का कब्जा 

प्रशासन की निष्क्रियता पर उठे सवाल 

नेशनल प्रेस टाइम्स, ब्यूरो
दिल्ली/लोनी : आनंद विहार और पटपड़गंज थाना क्षेत्र में अवैध रूप से  संचालित हो रही डग्गामार गाड़ियों पर प्रशासन की लगातार शिकायतों के बावजूद कार्यवाही न होने से स्थानीय लोगों में रोष बढ़ता जा रहा है।
इन गाड़ियों के कारण सड़कों पर अव्यवस्था फैल गई है — बेतरतीब खड़े वाहनों से जहां पैदल यात्रियों और दुकानदारों को भारी दिक्कतें हो रही हैं, वहीं सरकार को भी राजस्व की भारी हानि झेलनी पड़ रही है।
 डग्गामार गाड़ियों का अड्डा बना आनंद विहार क्षेत्र
जानकारी के अनुसार, आनंद विहार और पटपड़गंज क्षेत्र में शाम ढलते ही डग्गामार वाहनों का जमघट लग जाता है, जो देर रात तक सवारियां ढोने का सिलसिला जारी रखते हैं।
स्थानीय सूत्रों के मुताबिक, यह पूरा नेटवर्क खोड़ा निवासी एक व्यक्ति की देखरेख (ठेकेदारी) में संचालित है, जिसे कथित रूप से खाकी और खादी दोनों का संरक्षण प्राप्त है।
हर वाहन चालक से प्रतिमाह लगभग ₹5,000 और दैनिक ₹150–₹200 वसूले जाने का आरोप है। इस अवैध वसूली और संचालन से सरकार को प्रति दिन लाखों रुपये के राजस्व का नुकसान हो रहा है
 भाकियू (अनाज) की चेतावनी
लगातार शिकायतों के बावजूद जब कार्यवाही नहीं हुई तो भारतीय किसान यूनियन (अनाज) ने इस मुद्दे को गंभीरता से उठाया है।
संगठन के पदाधिकारियों ने चेतावनी दी है कि यदि जल्द ही इन अवैध रूप से चलने वाले वाहनों पर रोक नहीं लगाई गई, तो भाकियू कार्यकर्ता सड़क पर उतरकर विरोध प्रदर्शन करने को मजबूर होंगे।
स्थानीय नागरिकों की परेशानी
लोगों का कहना है कि डग्गामार वाहनों के कारण सड़कों पर अतिक्रमण की स्थिति बन गई है।
मुख्य सड़क के किनारे बेतरतीब खड़ी गाड़ियाँ न केवल यातायात अवरुद्ध करती हैं, बल्कि आस-पास के दुकानदारों और पैदल चलने वालों के लिए भी परेशानी का सबब बन गई हैं।
नागरिकों ने कई बार परिवहन विभाग और पुलिस प्रशासन से शिकायत की, लेकिन अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई है।
 स्थानीयों की मांग
क्षेत्रवासियों ने मांग की है कि प्रशासन तुरंत कार्रवाई करते हुए
अवैध रूप से चलने वाले इन वाहनों पर रोक लगाए,
सड़क किनारे बने अवैध टैक्सी अड्डों को हटाए, और
इस अवैध धंधे में शामिल लोगों पर सख्त कानूनी कार्रवाई करे।
लोगों का कहना है कि यदि प्रशासन ने जल्द कदम नहीं उठाए तो वे भी भाकियू के आंदोलन में शामिल होकर सड़कों पर उतरने को तैयार हैं।
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